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पालघर लिंचिंग: हाई कोर्ट ने 10 आरोपियों को जमानत दी, 8 अन्य को नहीं मिली राहत
Fri, 01 Apr 2022 10:22 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालघर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पालघर
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 01 Apr 2022 10:22 PM IST
सार
इस मामले की शुरुआत में पालघर पुलिस ने जांच की थी और बाद में इसे राज्य सीआईडी-अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया था।
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मॉब लिंचिंग
- फोटो : social media
विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में अप्रैल 2020 के पालघर लिंचिंग मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि दिखाए गए वीडियो फुटेज और अपराध स्थल की तस्वीरों में आरोपी खुले तौर पर हिंसक नहीं दिखे हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने मामले में आठ अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हिंसा स्थल से सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और तस्वीरों में पीड़ितों पर हमला करने में उनकी सक्रिय भागीदारी दिखी है।
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पीठ राज्य पुलिस द्वारा मामले में आरोपित 100 से अधिक आरोपियों में से 18 द्वारा दायर चार अलग-अलग आवेदनों की सुनवाई कर रही थी। कोरोनो वायरस राष्ट्रव्यापी तालाबंदी के बीच 16 अप्रैल, 2020 को पालघर जिले से सटे गडचिनचिले गांव में भीड़ ने तीन लोगों –दो संतों और उनके कार चालक की हत्या कर दी थी। एक कार में गुजरात जा रहे पीड़ितों को ग्रामीणों की भीड़ ने रोका और उन्हें चोर समझकर उन पर हमला कर दिया।
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मामले की शुरुआत में पालघर पुलिस ने जांच की थी और बाद में इसे राज्य सीआईडी-अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया था। 18 आरोपियों ने जमानत के लिए पिछले साल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपने वकील वैशाली राजे, आशीष चव्हाण, वेस्ले मेनेजेस और एशले कुशर के माध्यम से आरोपी व्यक्तियों ने जमानत के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें दावा किया गया था कि ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जिससे पता चलता है कि उन्होंने घटना में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
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हालांकि, विशेष लोक अभियोजक सतीश मानेशिंदे ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए सभी जमानत याचिकाओं का विरोध किया। अपने आदेश में न्यायमूर्ति डांगरे ने पाया कि जिस आरोपी को वह जमानत देने से इनकार कर रही थी, उसकी पहचान घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज, फोटो और मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग में की गई थी।