{"_id":"5f8f46f58ab2b8551d7c8d45","slug":"pakistani-senator-anwaar-ul-haq-kakar-says-pak-failed-to-stop-forcible-conversion-of-religious-minorities","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तानी सांसद ने माना कि धार्मिक अल्पसंख्यकों का जबरन धर्मांतरण रोकने में नाकाम रहा पाक","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पाकिस्तानी सांसद ने माना कि धार्मिक अल्पसंख्यकों का जबरन धर्मांतरण रोकने में नाकाम रहा पाक
Wed, 21 Oct 2020 01:52 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, इस्लामाबाद।
एजेंसी, इस्लामाबाद।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 21 Oct 2020 01:52 AM IST
विज्ञापन
पाकिस्तानी सांसद अनवर-उल-हक काकर (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter@anwaar_kakar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने कहा है कि देश जबरन धर्मांतरण से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाया है। सांसद अनवर-उल-हक काकर की अध्यक्षता में जबरन धर्मांतरण मामलों पर गौर करने के लिए एक संसदीय समिति ने हाल में सिंध के कुछ इलाकों का दौरा किया जहां से हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के कई मामले आए हैं।
विज्ञापन
काकर ने मीडिया से बातचीत के दौरान माना कि पाकिस्तान जबरन धर्मांतरण से धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर पाया है। हालांकि, उन्होंने अधिकतर मामलों में कुछ हद तक रजामंदी भी बताई। एक सवाल पर काकर ने कहा कि जबरन धर्मांतरण की कई परिभाषाएं हैं और समिति ने इस पर व्यापक चर्चा की है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ‘बेहतर जीवनशैली के लिए हुए धर्मांतरण को जबरन धर्मांतरण माना जाता है, लेकिन आर्थिक कारणों से हुए धर्मांतरण को शोषण माना जा सकता है क्योंकि यह सहमति से होता है।’ काकर ने कहा कि जो लोग हिंदू लड़कियों को बाहर निकलने और अपनी इच्छा से शादी करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं वे अपनी बेटियों के मामले में उदारता नहीं दिखाते। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद स्थिति यह है कि परिवार के ‘दुख और दर्द’ पर विचार नहीं किया जाता।
विज्ञापन
शादी के वक्त अभिभावक की मौजूदगी अनिवार्य हो
काकर ने विवाह के लिए नए नियमों को लागू करने का सुझाव दिया जिसमें शादी के समय अभिभावक की मौजूदगी को अनिवार्य किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक सांघर, घोटकी, सुक्कुर, खैरपुर और मीरपुरखास जिलों में जबरन धर्मांतरण के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों से कम ही मामले आते हैं जबकि पंजाब से ईसाई समुदाय के धर्मांतरण के कुछ मामले सामने आए हैं ।