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PM Modi Egypt Visit: कभी मिस्र के एक वोट से हार गया था पाकिस्तान; अब पीएम के काहिरा दौरे से खौफ में इस्लामाबाद

Sat, 24 Jun 2023 08:33 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sat, 24 Jun 2023 08:33 PM IST
सार

PM Modi Egypt Visit: रक्षा मामलों से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि भारत और मिस्र की आतंकवाद को रोकने की संयुक्त कार्य योजना वाली बैठकों में स्पष्ट तौर पर मिस्र की ओर से "इस्लामिक टेररिज्म" को फैलाने से रोकने के लिए हर स्तर पर मदद करने का भरोसा भी दिया है।

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Pakistan was defeated by one vote of Egypt Now Islamabad in awe of PM Modi's visit to Cairo
India Egypt - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिस्र दौरे को लेकर पाकिस्तान बहुत डरा हुआ है। पाकिस्तान को अंदेशा इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काहिरा यात्रा के बाद भारत और मिस्र के जुगलबंदी से इस्लामी सहयोग संगठन (आईओसी) में न सिर्फ सेंधमारी होगी बल्कि पाकिस्तान की आतंकवाद फैलाने वाली साजिशों का पर्दाफाश होगा। जानकारों का कहना है कि यही वजह है पाकिस्तान ने एक बार फिर से मिस्र को इस्लामी सहयोग संगठन से बाहर करने की साजिश रचनी शुरू कर दी हैं। वहीं, विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद लड़खड़ाई हुई अर्थव्यवस्था वाले मिस्र को अपने देश के विकास और वित्तीय मदद की उम्मीदें जगी हैं।

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काहिरा में पीएम मोदी। - फोटो : विदेश मंत्रालय (एमईए)

मिस्र की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था में भारत बनेगा सहारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिश्र दौरे से इस देश की लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था को बूस्टर मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है। डेमोग्राफिक सेंटर फॉर डेवलपमेंट एंड कल्चरल रिलेशन इन इंडिया एंड अफ्रीका के डायरेक्टर राशिद अल बुखारी कहते हैं कि मुस्लिम देशों के संगठनों में शामिल होने के बाद भी मिस्र हमेशा से भारत का बड़ा सहयोगी ही रहा है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की राजकीय यात्रा के बाद पहली विदेश यात्रा मिस्र की कर रहे हैं इसलिए इसके कई बड़े सियासी और आर्थिक नजरिए से मायने तलाशे जा रहे हैं। वह कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में जिस तरीके से मिस्र में अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर में पहुंची है उसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद कुछ ऊंचाई मिल सकते हैं। 
 

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

अमेरिका से मदद की गुहार लगा रहा मिस्र
इसके पीछे राशिद का तर्क है कि मिस्र की करेंसी डॉलर की तुलना में बहुत कमजोर होकर नीचे पहुंच गई है। लगातार अमेरिका से मदद की गुहार लगाई गई बावजूद इसके अमेरिका की ओर से उच्च स्तर की मदद इस देश को नहीं मिली। उनका कहना है कि मिस्र इस उम्मीद से प्रधानमंत्री की यात्रा को अब तक की सबसे बड़ी यात्रा करार दे रहा है क्योंकि मोदी अमेरिका की राजकीय यात्रा के बाद सबसे पहले मिस्र का दौरा कर रहे हैं। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी की पूरी कैबिनेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाने वाली मदद के भरोसे और भारत की ओर से प्रत्यक्ष रूप से किए जाने वाली मदद को लेकर उम्मीद लगाए हैं।
 

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मोदी और अल-सिसी - फोटो : AMAR UJALA

इसलिए डरा हुआ है पाकिस्तान
विदेशी मामलों के जानकार कर्नल एसएन पुरी कहते हैं कि भारत और विश्व की ऐतिहासिक यात्रा को लेकर पाकिस्तान की निगाहें सबसे ज्यादा लगी हुई है। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए क्योंकि मिस्र मुस्लिम देशों के संगठन में शामिल होने के बाद भारत का हमेशा से सहयोग करता आया है। इसके अलावा मिस्र की चार दशक से इजरायल के साथ बड़ी रणनीति भागीदारी और रिश्ते भी हैं। भारत और इजरायल के मजबूत रिश्ते समूची दुनिया में किसी से छिपे नहीं है। कर्नल पुरी कहते हैं भारत और मिस्र की मजबूत हो रही भागीदारी में पड़ोसी मुल्क इस्राइल भी अपनी दोस्ती को और मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत और इस्राइल के त्रिकोणीय मजबूत होते रिश्ते पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन सकते हैं। विदेशी मामलों के जानकार भारतीय विदेश सेवा के रिटायर्ड अधिकारी सुजीत सिन्हा का कहना है कि ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि पाकिस्तान बीते कुछ समय से मिस्र पर मुस्लिम संगठन देशों के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाता रहा है। इसके अलावा मिस्र के पड़ोसी देश सूडान में बिगड़े हालातों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिस्र को जब अंदरूनी मदद की आवश्यकता हुई तो पाकिस्तान ने हाथ पीछे खींच लिए। ऐसे में भारत ने उसको कई स्तर पर सपोर्ट किया। अब जब तकरीबन ढाई दशक बाद देश प्रधानमंत्री मिस्र की यात्रा पर हैं तो पाकिस्तान इसी उधेड़बुन में लगा है कि भारत, मिस्र और इजरायल के रिश्ते आने वाले दिनों में किस तरीके से उस पर भारी पड़ने वाले हैं।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : सोशल मीडिया

इस बात का पाकिस्तान को अभी भी है मलाल
वरिष्ठ राजनयिक रहे सुजीत सिन्हा कहते हैं कि मिस्र के तमाम राजनयिक और वाणिज्यिक रिश्ते होने के बाद भी पाकिस्तान के दिल में एक मलाल अभी भी है। जो उसको हमेशा टीस देता है। दरअसल, मोहम्मद पैगंबर के खिलाफ हाल में पैदा हुए एक विवाद को लेकर जब पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों के संगठनों के बीच में भारत के खिलाफ प्रस्ताव रखा तो मिस्र ही एक ऐसा देश था जिसने उसका समर्थन नहीं किया था। नतीजा हुआ कि भारत के खिलाफ रखा जाने वाला प्रस्ताव मिस्र के समर्थन न करने से गिर गया था। इसको लेकर पाकिस्तान और मिस्र के बीच अंदरूनी तौर पर बड़ी दूरियां बन गई। रही सही कसर पूरी हो गई जब मिस्र के राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित हुए। पाकिस्तान इससे इतना ज्यादा अंदरूनी तौर पर नाराज हुआ की मिस्र को मुस्लिम देशों के संगठन वाले समूह से बाहर करने की साजिश तक रचने लगा। विदेशी मामलों के जानकार कर्नल पुरी कहते हैं, 'अब जब भारत के रिश्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा से और मजबूत हो रहे हैं तो पाकिस्तान को सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है और उसे डर भी लग रहा है।'

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पीएम मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी - फोटो : सोशल मीडिया

पाकिस्तान आतंकवाद फैला रहा तो मिस्र रोकने के लिए भारत के साथ खड़ा
रक्षा मामलों से जुड़े और विदेशों में शांति मिशन में हिस्सा ले चुके अखिल प्रधान कहते हैं कि भारत और मिस्र आतंकवाद के मुद्दे पर एक कार्यसमूह का गठन कर चुका है। तीन महीने पहले भारत और मिस्र के इसी कार्यसमूह की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है। प्रधान कहते हैं कि इस बैठक में आतंकवाद फैलाने में इस्तेमाल किए जाने वाले टेरर फंडिंग को रोके जाने की महत्वपूर्ण रणनीति और योजनाएं बनाई गई। पाकिस्तान को अब डर इस बात का बना हुआ है कि जैसे-जैसे भारत और मिस्र आतंकवाद को रोकने वाली इस कार्य योजना पर आगे बढ़ते जाएंगे पाकिस्तान के आतंकवाद फैलाए जाने वाले मंसूबे का समूची दुनिया में और पर्दाफाश होता जाएगा। रक्षा मामलों से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि भारत और मिस्र की आतंकवाद को रोकने की संयुक्त कार्य योजना वाली बैठकों में स्पष्ट तौर पर मिस्र की ओर से "इस्लामिक टेररिज्म" को फैलाने से रोकने के लिए हर स्तर पर मदद करने का भरोसा भी दिया है।

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