Pakistan Poverty Report: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खुलासा, छह साल में गरीबी और असमानता में तेज बढ़ोतरी
पाकिस्तान योजना आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले छह वर्षों में देश में गरीबी और आय असमानता तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय गरीबी दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पाकिस्तान के योजना आयोग की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले छह वर्षों में देश में गरीबी और आय असमानता दोनों तेजी से बढ़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकट, बेरोजगारी और नीतिगत अस्थिरता के कारण आम लोगों का जीवन स्तर लगातार गिरा है। इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और सामाजिक असमानता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018-19 में राष्ट्रीय गरीबी दर 21.9 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई। इसका मतलब है कि छह वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं। रिपोर्ट में घरेलू आय और उसके वितरण का विश्लेषण करते हुए बताया गया कि आय में गिरावट और असमानता बढ़ने से लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है।
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ग्रामीण और शहरी इलाकों में गरीबी का अंतर
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की स्थिति और ज्यादा खराब हुई है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी दर 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसर और कृषि क्षेत्र की कमजोर स्थिति इसके प्रमुख कारण हैं।
बेरोजगारी और आय में गिरावट बड़ा कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरोजगारी दर में भी लगातार वृद्धि हुई है। 2020-21 में बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई। इसी दौरान परिवारों की औसत वास्तविक आय में करीब 27.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आय में कमी और महंगाई के कारण लोगों की क्रय शक्ति कम हो गई है, जिससे उनके जीवन स्तर पर नकारात्मक असर पड़ा है।
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महामारी, बाढ़ और आर्थिक नीतियों का असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2019-20 की कोविड महामारी और 2022-23 की विनाशकारी बाढ़ ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यक्रमों के तहत सब्सिडी में कटौती, अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी और विकास खर्च में कमी से आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि गरीबी और असमानता को कम करने के लिए सरकार को निर्यात आधारित विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाने होंगे।
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