पाकिस्तान: कभी अमेरिकी इशारे पर सड़क पर उतर जाते थे इमरान, अब ऐसा क्या हुआ कि बन गए दुश्मन
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विस्तार
पूरी दुनिया को पता चल गया है कि इमरान खान ने इस बार अमेरिका के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। लेकिन ताज्जुब होगा जानकर कि यह वही इमरान खान हैं जो पकिस्तान की सत्ता में आने से पहले अमेरिका के इशारे पर अपने ही देश की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर जाते थे। यही नहीं पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अमेरिकी ड्रोन हमले को मंजूरी देने वाले परवेज मुशर्रफ की शान में भी यही इमरान खान कसीदे गढ़ने से नहीं चूकते थे। अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर सत्ता पाने के बाद ऐसा क्या हुआ कि इमरान खान का अमेरिका इतना बड़ा दुश्मन हो गया कि उन्हें चीन और रूस की शरण में जाकर अपना बचाव करना पड़ रहा है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का सत्ता को बहाल करने का फैसला अमेरिका की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान और वहां की राजनीति को करीब से समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान शुरुआत से ही किसी न किसी माध्यम से अमेरिका के इशारों पर पाकिस्तान में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करते आये हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और साउथ एशिया मामलों के जानकार प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि इमरान खान बाकायदा इस्लामाबाद की सड़कों पर पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। वे कहते हैं कि उस वक्त भी आंदोलन पाकिस्तानी फौज के इशारे पर हो रहा था और पाकिस्तानी फौज अमेरिका के इशारे पर यह सब कर रही थी। उस वक़्त इमरान खान अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए अमेरिका के इशारे पर यह सब कर रहे थे।
अमेरिकी शह पर मुशर्रफ ने किया था तख्तापलट
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि जब पाकिस्तान में तानाशाह परवेज मुशर्रफ का शासन था तब भी इमरान खान ने उन्हें परवेज मुशर्रफ की कई मंचों पर जमकर तारीफ की थी। इमरान खान ने परवेज मुशर्रफ के पक्ष में देश में बेहतर हुए माहौल का जिक्र भी किया था। जबकि पूरी दुनिया को पता है कि पाकिस्तान में परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट अमेरिका की शह पर ही किया था। यही नहीं परवेज मुशर्रफ ने अमेरिका को बाकायदा पाकिस्तानी कबायली इलाकों में अमेरिकी ड्रोन हमले की मंजूरी तक दी थी। तब इमरान का परवेज मुशर्रफ के पक्ष में दिया गया बयान चर्चा का विषय रहा था कि किस तरीके से अमेरिकी शह पर इमरान खान अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
रूस जाना पड़ा भारी
इमरान खान का अमेरिका के लिए उमड़ा प्रेम सिर्फ इन्हीं दो मामलों में नहीं दिखा। एशिया मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर अभिषेक सिंह बताते हैं कि बताते हैं कि जब 2013 में जब नवाज शरीफ चीन के प्रति प्रेम बढ़ना शुरू हुआ, तो आरोप लगे कि अमेरिका ने कनाडाई मुस्लिम धर्मगुरु के माध्यम से पाकिस्तान की सड़कों पर प्रदर्शन शुरू करा दिया। इसमें स्थानीय सेना के साथ-साथ पाकिस्तान के विपक्षी राजनीतिक दलों को भी शामिल किया गया। जिसमें इमरान खान और उनकी पार्टी भी एक थी। यह वही दौर था जब पाकिस्तान की अमेरिका से दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थीं। नवाज शरीफ ने चीन के साथ अपने सबसे बड़ा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का समझौता किया था। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि जिस आर्थिक गलियारे में घोटाले और भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर इमरान खान पाकिस्तान की सड़कों पर उतर रहे थे, वही सत्ता मिलने के बाद चीन को अपना सबसे बड़ा हिमायती बताने लगे। साथ ही रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने वाले दिन इमरान का रूस जाना और फिर रूस, चीन और पाकिस्तान का ट्राएंगल बनाना उनके लिए मुसीबत का सबब बनता रहा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सेना की जीत!
रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल डीएस मिश्रा कहते हैं कि जिस तरीके से पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है उससे इमरान खान और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। वह कहते हैं कि अगर आप इस फैसले को डिप्लोमैटिक नजर से देखें तो पाएंगे कि इसमें सेना की जीत हुई है। सेना बिल्कुल नहीं चाहती थी कि इमरान खान इस तरीके से सरकार को भंग करके दोबारा चुनाव में पहुंचे। दरअसल पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा लगातार इस पक्ष में थे कि इमरान खान को सत्ता से बेदखल कर दिया जाए। मिश्रा कहते हैं जिस तरीके से चर्चाएं और कयास हमेशा से लगते रहे हैं कि पाकिस्तान की सेना में अमेरिका का अच्छा खासा दखल है। तो यह फैसला इस ओर इशारा करता है पाकिस्तान में अमेरिका का दखल कामयाब रहा। उनका कहना है कि जिस तरीके से इमरान खान कभी अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान के सड़कों पर आंदोलन कर सत्ता की राह तलाशने थे, आज चीन के गले में बाहें डाल कर अपनी राजनैतिक राह को आसान करने की जुगत में लगे हुए हैं। लेकिन पाकिस्तान में बाजी पलट चुकी है और ऐसा दिख रहा है कि इमरान खान की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।