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पाकिस्तान: लश्कर के अंदरूनी संघर्ष से उड़ी आईएसआई की नींद, कमांडर सलाफी की हत्या से मचा हड़कंप
Tue, 24 Mar 2026 04:50 AM IST
Devesh Tripathi
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली।
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 24 Mar 2026 04:50 AM IST
सार
सलाफी की हत्या कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आपसी गुटबाजी के कारण पाकिस्तान में आतंकियों की आपसी रंजिश में कई आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल मई में सिंध में लश्कर का मास्टरमाइंड सैफुल्ला खालिद मारा गया। इससे पहले मार्च 2024 में हाफिज सईद के करीबी अबू कतल का कत्ल कर दिया गया।
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लश्कर आतंकी को आतंकी संगठन के ही गाजी उबैदुल्लाह खान ने मारी गोली
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
विस्तार
पाकिस्तान के आतंकी संगठनों में वर्चस्व की जंग और आपसी फूट ने देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई की नींद उड़ा दी है। हाल ही में लश्कर ए तायबा के गढ़ मुरीदके में खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या कर दी गई। सलाफी लश्कर के मरकज से ईद की नमाज के बाद बाहर निकल रहा था।
पहले से सलाफी का इंतजार कर रहे लश्कर के वरिष्ठ आतंकी गाजी उबैदुल्लाह खान ने सलाफी पर तीन गोलियां दागीं, जबकि उसकी बीवी ने चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे सलाफी की मौके पर ही मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक सलाफी ने कुछ साल पहले उबैदुल्लाह खान के दामाद अबू बकर की हत्या कर दी थी। इस कत्ल के बावजूद सलाफी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह न सिर्फ आजाद घूमता रहा, बल्कि संगठन में उसका कद भी बढ़ता गया। जबकि पुराना वफादार होने के बावजूद उबैदुल्ला का कद नहीं बढ़ा। मालूम हो कि पाकिस्तान में आईएसआई हमेशा से ही आतंकी संगठनों की मददगार रही है।
लश्कर नेतृत्व में खलबली
सूत्रों का कहना है कि बिलाल आरिफ सलाफी की मौत के बाद कई बड़े आतंकी कमांडरों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है। आतंकी अब खुले में निकलने से कतरा रहे हैं और समय भूमिगत रहकर बिता रहे हैं।
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पहले भी हो चुकी हैं हत्याएं
सलाफी की हत्या कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आपसी गुटबाजी के कारण पाकिस्तान में आतंकियों की आपसी रंजिश में कई आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल मई में सिंध में लश्कर का मास्टरमाइंड सैफुल्ला खालिद मारा गया। इससे पहले मार्च 2024 में हाफिज सईद के करीबी अबू कतल का कत्ल कर दिया गया। वहीं इससे पहले जैश का रहीम उल्लाह तारिक भी इसी तरह के हमले का शिकार हुआ। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकियों में अब जिहाद की जगह जेब और जायदाद का युद्ध छिड़ा है।
क्यों बचा रहा सलाफी?
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक सलाफी को लश्कर के शीर्ष आतंकी जकी उर रहमान लखवी का सीधा संरक्षण था। सलाफी लश्कर के वित्तीय नेटवर्क का प्रमुख स्तंभ था। वह शेखूपुरा इलाके से सालाना लगभग 40 लाख पाकिस्तानी रुपए का चंदा जुटाता था। उसकी इस वित्तीय उपयोगिता ने उसे बचाए रखा।
उधर, उबैदुल्लाह लश्कर का पुराना वफादार था, जिसने 1993 से 2003 के बीच जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया था। वह इन दिनों मुरीदके में आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहा था। उसके दामाद की हत्या के बावजूद लश्कर ने उसका साथ देने के बजाय सलाफी जैसे फंड मैनेजर को तरजीह दी। यहां तक कि शेखूपुरा पुलिस ने भी लखवी के दबाव में सलाफी को क्लीन चिट दे डाली। जब लश्कर के भीतर ही इंसाफ नहीं मिला, तो उबैदुल्ला बागी हो गया और सलाफी की हत्या कर डाली।
अन्य वीडियो
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पहले से सलाफी का इंतजार कर रहे लश्कर के वरिष्ठ आतंकी गाजी उबैदुल्लाह खान ने सलाफी पर तीन गोलियां दागीं, जबकि उसकी बीवी ने चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे सलाफी की मौके पर ही मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक सलाफी ने कुछ साल पहले उबैदुल्लाह खान के दामाद अबू बकर की हत्या कर दी थी। इस कत्ल के बावजूद सलाफी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह न सिर्फ आजाद घूमता रहा, बल्कि संगठन में उसका कद भी बढ़ता गया। जबकि पुराना वफादार होने के बावजूद उबैदुल्ला का कद नहीं बढ़ा। मालूम हो कि पाकिस्तान में आईएसआई हमेशा से ही आतंकी संगठनों की मददगार रही है।
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लश्कर नेतृत्व में खलबली
सूत्रों का कहना है कि बिलाल आरिफ सलाफी की मौत के बाद कई बड़े आतंकी कमांडरों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है। आतंकी अब खुले में निकलने से कतरा रहे हैं और समय भूमिगत रहकर बिता रहे हैं।
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पहले भी हो चुकी हैं हत्याएं
सलाफी की हत्या कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आपसी गुटबाजी के कारण पाकिस्तान में आतंकियों की आपसी रंजिश में कई आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल मई में सिंध में लश्कर का मास्टरमाइंड सैफुल्ला खालिद मारा गया। इससे पहले मार्च 2024 में हाफिज सईद के करीबी अबू कतल का कत्ल कर दिया गया। वहीं इससे पहले जैश का रहीम उल्लाह तारिक भी इसी तरह के हमले का शिकार हुआ। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकियों में अब जिहाद की जगह जेब और जायदाद का युद्ध छिड़ा है।
क्यों बचा रहा सलाफी?
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक सलाफी को लश्कर के शीर्ष आतंकी जकी उर रहमान लखवी का सीधा संरक्षण था। सलाफी लश्कर के वित्तीय नेटवर्क का प्रमुख स्तंभ था। वह शेखूपुरा इलाके से सालाना लगभग 40 लाख पाकिस्तानी रुपए का चंदा जुटाता था। उसकी इस वित्तीय उपयोगिता ने उसे बचाए रखा।
उधर, उबैदुल्लाह लश्कर का पुराना वफादार था, जिसने 1993 से 2003 के बीच जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया था। वह इन दिनों मुरीदके में आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहा था। उसके दामाद की हत्या के बावजूद लश्कर ने उसका साथ देने के बजाय सलाफी जैसे फंड मैनेजर को तरजीह दी। यहां तक कि शेखूपुरा पुलिस ने भी लखवी के दबाव में सलाफी को क्लीन चिट दे डाली। जब लश्कर के भीतर ही इंसाफ नहीं मिला, तो उबैदुल्ला बागी हो गया और सलाफी की हत्या कर डाली।
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