{"_id":"5b59ff024f1c1b47748b6fab","slug":"pakistan-elections-former-foreign-secretary-salman-haider-says-wait-and-watch-time-for-india","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान चुनाव: भारत के लिए देखो और इंतजार करो का वक्त","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
पाकिस्तान चुनाव: भारत के लिए देखो और इंतजार करो का वक्त
सलमान हैदर, पूर्व विदेश सचिव
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:34 PM IST
विज्ञापन
पाकिस्तान चुनाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनाव प्रचार के आधार पर और किसी भी नई सरकार के गठन के शुरुआत में ही हमें अपना एक नजरिया नहीं बनाना चाहिए। प्रजातंत्र में चुनाव प्रचार के दौरान किसी सियासी दल की कही बातें और सरकार में आने के बाद तय होने वाली नीति हमेशा एक नहीं होती। हां, चुनाव परिणाम का एक सकारात्मक पक्ष चुनाव के माध्यम से अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में जुटे आतंकी संगठनों का औंधे मुंह गिरना है।
पाकिस्तान में हुए आम चुनाव के नतीजे अंतिम दौर में हैं। दो बड़ी सियासी ताकतों पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएलएन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बुरे प्रदर्शन के बाद तय हो गया है कि इस बार सरकार की कमान पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के मुखिया और मशहूर क्रिकेटर रहे इमरान खान के पास होगी। जहां तक इमरान के सरकार का मुखिया होने के कारण भारत पर पड़ने वाले असर की बात है तो इसके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना होगा। हां, चुनाव प्रचार के दौरान इमरान का भारत विरोधी रुख और सेना का उन्हें मिला परोक्ष समर्थन जरूर चिंता की बात है। फिलहाल भारत के लिए यह देखो और इंतजार करो का वक्त है।
मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि चुनाव प्रचार के आधार पर और किसी भी नई सरकार के गठन के शुरुआत में ही हमें अपना एक नजरिया नहीं बनाना चाहिए। प्रजातंत्र में चुनाव प्रचार के दौरान किसी सियासी दल की कही बातें और सरकार में आने के बाद तय होने वाली नीति हमेशा एक नहीं होती। हां, चुनाव परिणाम का एक सकारात्मक पक्ष चुनाव के माध्यम से अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में जुटे आतंकी संगठनों का औंधे मुंह गिरना है। पाकिस्तान की आवाम ने न तो किसी आतंकवादी को चुनाव जिताया है और न ही आतंकी संगठनों के सियासी दलों को ही घास डाली है। ऐसे में नई सरकार अगर अपने आवाम की नब्ज पकड़ेगी तो आतंकवाद पर उसका रुख नरम नहीं रहने वाला।
विज्ञापन
मेरे ख्याल से नई सरकार के गठन के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों की ओर से बातचीत की संभावना नए सिरे से टटोली जाएगी। इससे दोनों देशों के रिश्तों पर सालों से पड़ी बर्फ के पिघलने की हल्की सी उम्मीद भी जरूर रखी जानी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय रिश्ते और कूटनीति में सार्वजनिक तौर पर बातचीत के सभी दरवाजे बंद होने के बावजूद पीछे का दरवाजा हमेशा खुला रहता है। चूंकि अब वहां नई सरकार आई है। ऐसे में हमें उम्मीद करनी चाहिए कि जब दोनों देश बातचीत की संभावना तलाशेंगे तो किसी न किसी रूप में इसका रास्ता निकल सकता है।
जहां तक इमरान के सरकार की कमान संभालने और इस पर दोनों रिश्तों पर पड़ने वाले असर की बात है तो इस पर कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी। इमरान पहली बार सत्ता संभालेंगे। उनके राजनीतिक पहलू और नजरिये की साफ-साफ तस्वीर अभी आनी बाकी है। फिर भी इमरान के सेना से रिश्ते और आतंक पर नरम रुख गौर करने वाली बातें हैं। मगर सवाल यह है कि क्या इमरान सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भी अपना यही रवैया जारी रखेंगे? इमरान सेना के इशारे पर आगे बढ़ेंगे? अगर ऐसा ही हुआ तो निश्चित रूप से इससे परेशानी बढ़ेगी। (हिमांशु मिश्र से बातचीत के आधार पर)
इमरान खान सेना द्वारा तैयार की गई राजनीतिक फसल हैं। उनकी जीत से भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधरने की रही सही उम्मीदें भी ध्वस्त हो गई हैं। इमरान वही करेंगे जो सेना कहेगी और दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी सेना कभी भारत से बेहतर रिश्ते की पैरोकार नहीं रही है। -गौरशंकर राजहंस, पूर्व राजदूत
भारत-पाकिस्तान के बीच कड़वाहट बढ़ने के आसार हैं। इमरान खान की ताजपोशी से पाकिस्तानी सेना को अपने हिसाब से नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। चुनी हुई सरकारों के माध्यम से रिश्ते सुधारने की भारत की उम्मीदों को झटका लगेगा। जिस प्रकार सेना के साथ इमरान आतंकियों के परोक्ष समर्थक हैं। यह स्थिति भारत के लिए चिंता पैदा करने वाली है। -ब्रह्म चेलानी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ
विज्ञापन
पाकिस्तान में हुए आम चुनाव के नतीजे अंतिम दौर में हैं। दो बड़ी सियासी ताकतों पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएलएन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बुरे प्रदर्शन के बाद तय हो गया है कि इस बार सरकार की कमान पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के मुखिया और मशहूर क्रिकेटर रहे इमरान खान के पास होगी। जहां तक इमरान के सरकार का मुखिया होने के कारण भारत पर पड़ने वाले असर की बात है तो इसके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना होगा। हां, चुनाव प्रचार के दौरान इमरान का भारत विरोधी रुख और सेना का उन्हें मिला परोक्ष समर्थन जरूर चिंता की बात है। फिलहाल भारत के लिए यह देखो और इंतजार करो का वक्त है।
विज्ञापन
मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि चुनाव प्रचार के आधार पर और किसी भी नई सरकार के गठन के शुरुआत में ही हमें अपना एक नजरिया नहीं बनाना चाहिए। प्रजातंत्र में चुनाव प्रचार के दौरान किसी सियासी दल की कही बातें और सरकार में आने के बाद तय होने वाली नीति हमेशा एक नहीं होती। हां, चुनाव परिणाम का एक सकारात्मक पक्ष चुनाव के माध्यम से अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में जुटे आतंकी संगठनों का औंधे मुंह गिरना है। पाकिस्तान की आवाम ने न तो किसी आतंकवादी को चुनाव जिताया है और न ही आतंकी संगठनों के सियासी दलों को ही घास डाली है। ऐसे में नई सरकार अगर अपने आवाम की नब्ज पकड़ेगी तो आतंकवाद पर उसका रुख नरम नहीं रहने वाला।
विज्ञापन
मेरे ख्याल से नई सरकार के गठन के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों की ओर से बातचीत की संभावना नए सिरे से टटोली जाएगी। इससे दोनों देशों के रिश्तों पर सालों से पड़ी बर्फ के पिघलने की हल्की सी उम्मीद भी जरूर रखी जानी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय रिश्ते और कूटनीति में सार्वजनिक तौर पर बातचीत के सभी दरवाजे बंद होने के बावजूद पीछे का दरवाजा हमेशा खुला रहता है। चूंकि अब वहां नई सरकार आई है। ऐसे में हमें उम्मीद करनी चाहिए कि जब दोनों देश बातचीत की संभावना तलाशेंगे तो किसी न किसी रूप में इसका रास्ता निकल सकता है।
जहां तक इमरान के सरकार की कमान संभालने और इस पर दोनों रिश्तों पर पड़ने वाले असर की बात है तो इस पर कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी। इमरान पहली बार सत्ता संभालेंगे। उनके राजनीतिक पहलू और नजरिये की साफ-साफ तस्वीर अभी आनी बाकी है। फिर भी इमरान के सेना से रिश्ते और आतंक पर नरम रुख गौर करने वाली बातें हैं। मगर सवाल यह है कि क्या इमरान सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भी अपना यही रवैया जारी रखेंगे? इमरान सेना के इशारे पर आगे बढ़ेंगे? अगर ऐसा ही हुआ तो निश्चित रूप से इससे परेशानी बढ़ेगी। (हिमांशु मिश्र से बातचीत के आधार पर)
इमरान खान सेना द्वारा तैयार की गई राजनीतिक फसल हैं। उनकी जीत से भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधरने की रही सही उम्मीदें भी ध्वस्त हो गई हैं। इमरान वही करेंगे जो सेना कहेगी और दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी सेना कभी भारत से बेहतर रिश्ते की पैरोकार नहीं रही है। -गौरशंकर राजहंस, पूर्व राजदूत
भारत-पाकिस्तान के बीच कड़वाहट बढ़ने के आसार हैं। इमरान खान की ताजपोशी से पाकिस्तानी सेना को अपने हिसाब से नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। चुनी हुई सरकारों के माध्यम से रिश्ते सुधारने की भारत की उम्मीदों को झटका लगेगा। जिस प्रकार सेना के साथ इमरान आतंकियों के परोक्ष समर्थक हैं। यह स्थिति भारत के लिए चिंता पैदा करने वाली है। -ब्रह्म चेलानी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ