पाक सेना प्रमुख का 240 घंटे में 'एलओसी' का तीसरा दौरा: क्या चीन का झूठ बढ़ा रहा है खतरा? चौंका देंगे ये कारण
कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि पाकिस्तान में सब कुछ सामान्य नहीं है। पाकिस्तान अपनी अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। नई सरकार का गठन हुआ है। नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर के कई इलाके पूरी तरह अशांत हैं। बलूचिस्तान में भी सरकार की जोरदार खिलाफत हो रही है। चीन, जिसकी पहुंच से आज पाकिस्तान का कोई भी इलाका अछूता नहीं है, इस बात ने वहां के लोगों को पाक हुक्मरानों के खिलाफ लामबंद कर दिया है...
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पाकिस्तानी सेना प्रमुख, जनरल कमर जावेद बाजवा ने पाक अधिकृत कश्मीर में 'एलओसी' का 240 घंटे के दौरान तीसरा दौरा किया है। बाजवा के इस दौरे से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पीओके में ऐसा क्या हो गया है कि बाजवा को दस दिन में तीन दौरे करने पड़ गए। राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) के मुताबिक इस दौरे के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। मुख्य तौर से पीओके में चीन की 'दगा', बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों की लूट और अफगानिस्तान का अब पाकिस्तान का 'बच्चा' न बने रहना, आदि कारण सामने आए हैं। पीओके में पाकिस्तान की सेना और सरकार के प्रति लोगों में भारी रोष व्याप्त है। दूसरी तरफ पाकिस्तान, वहां पर चीन की मदद से एयर क्राफ्ट सिस्टम, मिसाइल या रडार लगाने की योजना बना रहा है। इन सबके चलते पाकिस्तानी सेना प्रमुख, जनरल कमर जावेद बाजवा के 'पीओके' में तीन दौरे चौंकाने वाले हैं।
गत वर्ष बाजवा को मारने की रची गई थी साजिश
जून 2021 में सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को मारने की साजिश रची गई थी। पीओके के एक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा ने यह दावा किया था। अपने एक वीडियो संदेश में मिर्जा का कहना था कि बाजवा पर हमले की रणनीति तय करने के लिए सेना के अफसरों की मदद ली गई। लीकेज के चलते पाकिस्तानी सेना के करीब एक दर्जन अफसर, 20 से अधिक कमांडो और सेना के अन्य 30 जवानों को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाजवा के कार्यकाल में डेढ़ हजार से अधिक फौजियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी गई थी। इन फौजियों की पेंशन रद्द करने के अलावा उन्हें दी गई जमीन भी वापस ले ली थी। साजिश में शामिल अफसरों में मिलिट्री इंटेलिजेंस के दो अधिकारी, आईएसआई अफसर, तीन ले. कर्नल, दो ब्रिगेडियर व चार मेजर जन. स्तर के अधिकारियों पर भी गाज गिरी थी। सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने बुधवार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) का दौरा किया था। उन्होंने अपने सैनिकों की युद्ध तत्परता और उच्च मनोबल की सराहना की। नियंत्रण रेखा के चकोठी सेक्टर में तैनात सैनिकों के साथ सेना प्रमुख बाजवा बातचीत करते हुए नजर आए थे।
पाकिस्तान में सब कुछ सामान्य नहीं है: कैप्टन गौर
कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि पाकिस्तान में सब कुछ सामान्य नहीं है। पाकिस्तान अपनी अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। नई सरकार का गठन हुआ है। नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर के कई इलाके पूरी तरह अशांत हैं। बलूचिस्तान में भी सरकार की जोरदार खिलाफत हो रही है। चीन, जिसकी पहुंच से आज पाकिस्तान का कोई भी इलाका अछूता नहीं है, इस बात ने वहां के लोगों को पाक हुक्मरानों के खिलाफ लामबंद कर दिया है। सीपीईसी (चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) प्रोजेक्ट ने पाकिस्तान के लोगों को नाराज कर दिया है। खासतौर पर पीओके के लोग उग्र होते जा रहे हैं। क्षेत्र की नीलम-झेलम नदी पर चीन के सहयोग से बांध बनाया जाना, स्थानीय लोगों को मंजूर नहीं है। कई वर्षों से पीओके के मुजफ्फराबाद और दूसरे इलाकों में इस बाबत लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। लोगों के विरोध के बावजूद चीनी कंपनियां, नीलम-झेलम नदी पर मेगा डैम प्रोजेक्ट आगे बढ़ा रही हैं। पहले कहा गया था कि 'चीन-पाक' कॉरिडोर का फायदा पाकिस्तान को होगा, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। डैम से पानी मिलने की सच्चाई झूठ का पुलिंदा निकली। यहां का पानी और बिजली, दोनों ही पंजाब में जा रहे हैं। पीओके में रोजगार नहीं है। अधिकांश प्रोजेक्ट चीन की मदद से चल रहे हैं। साइट पर काम करने वाली लेबर चीन से आई है। ऐसे में पाकिस्तान के स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला।
पीओके में पानी का संकट और खेतीबाड़ी भी नहीं बची
'चीन-पाक' कॉरिडोर का फायदा पाकिस्तान को नहीं मिल पा रहा है। इस कॉरिडोर के लिए जितनी जमीन ली गई, उसके आसपास की खेतीबाड़ी भी तबाह हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि चीन को खुश करने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने उसकी मर्जी से जमीन को चिन्हित किया है। जहां पर भूमि उपजाऊ थी, वहीं से कॉरिडोर निकाल दिया गया। अब लोगों के पास न तो जमीन रही और न ही रोजगार। यहां की नदियों में जो पानी आता था, वह भी बांध के चलते अब बंद हो गया है। इससे लोगों में आक्रोश है। नदी पर चीनी कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे बांध के कारण इलाके की प्रमुख नदियां, नीलम और झेलम, नाले का आकार लेती जा रही हैं। प्राकृतिक संसाधन बर्बाद हो रहे हैं। चीनी इंजीनियरों और पाक सेना पर हमलों की एक बड़ी वजह यही है।
अफगानिस्तान, अब पाकिस्तान का बच्चा नहीं रहा
बतौर कैप्टन अनिल गौर, पाकिस्तान यह मानता था कि अफगानिस्तान तो उसका बच्चा है। तालिबान, उसकी बात को कभी नहीं टालेगा। अफगानिस्तान से जैसे ही नाटो सेना वापस गई और वहां पर तालिबान का कब्जा हुआ तो पाकिस्तान को आंखें दिखाना शुरू हो गया। अफगानिस्तान में 'तहरीए ए तालिबान' पाकिस्तान ने ही जंग शुरू कर दी है। उनकी मंशा है कि पाकिस्तान में भी तालिबान का राज हो। पीओके में पाक आर्मी के जवानों पर हमले बढ़ रहे हैं। सीमा रेखा, डूरंड लाइन को तालिबान मानने के लिए तैयार नहीं है। वहां पर पाकिस्तान को अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करनी पड़ी है। पीओके में कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर पाकिस्तान की सेना के सभी संसाधन मौजूद नहीं हैं। यह पाकिस्तान की एक बड़ी समस्या है। रडार में अनेक ब्लाइंड स्पॉट हैं।
उसे कवर करने के लिए चीन के सलाहकार दौरा कर चुके हैं। चीन की मदद से अब पाकिस्तान वहां पर एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम या रडार लगाने की योजना पर काम कर रहा है। चीन-पाक कॉरिडोर भी यहीं से गुजरता है। आने वाले दिनों में वहां आर्मी पर हमले बढ़ सकते हैं। भले ही पाकिस्तान यह दावा करता रहा है कि उसने अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता पर काबिज होने में मदद की है, लेकिन अब स्थिति विपरित हो रही है। तालिबान ने पाकिस्तान पर ही बम बरसाना शुरू कर दिया है। जब आतंकी गुटों द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी जाती है, तो 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। तालिबान प्रशासन ने इसके लिए साफ मना कर दिया है।
बीएलए ने किया पाकिस्तान को परेशान
पाकिस्तान में गत दिनों कराची यूनिवर्सिटी में हुए आत्मघाती हमले ने सरकार को चौंका दिया था। इसमें चीन के तीन नागरिक और एक पाकिस्तानी ड्राइवर मारा गया। कई लोग घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी, 'बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी' बीएलए ने ली थी। इस आर्मी के निशाने पर वहां काम करने वाले चीनी नागरिक थे। माजिद ब्रिगेड की पहली महिला फिदायीन शारी बलूच ने चीनी नागरिकों की वैन के निकट जाकर खुद को उड़ा लिया था। इस हमले के बाद बीएलए ने शारी बलूच का फोटो लगाकर एक बैनर तैयार किया था। उस पर लिखा था, 'जब हमारे दुश्मन मारते वक्त पुरुष और महिलाओं में भेदभाव नहीं करते हैं, तो हम अपने प्रतिरोध के लिए लोगों को चुनने में लिंग भेदभाव क्यों करें? बता दें कि बलूच लोगों पर पाकिस्तानी सेना लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी के चलते अब पाकिस्तानी सेना पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। जन. बाजवा, नवंबर में अपने रिटायरमेंट से पहले विद्रोहियों पर नकेल कसना चाहते हैं। ये अलग बात है कि मौजूदा सरकार, उनका कार्यकाल बढ़ाने से मना कर चुकी है।