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Pakistan: निर्वाचन आयोग ने चुनाव में देरी का किया बचाव, संसद में सच्चे प्रतिनिधि के लिए परिसीमन को अहम बताया
Sat, 19 Aug 2023 11:46 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 19 Aug 2023 11:46 AM IST
सार
ईसीपी के कार्यक्रम से पता चलता है कि नए सिरे से परिसीमन में लगभग चार महीने लगेंगे, जिसका अर्थ है कि देश में आम चुनाव प्रांतीय और राष्ट्रीय असेंबली के विघटन के 90 दिनों के भीतर नहीं हो सकते हैं।
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पाकिस्तान चुनाव आयोग (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
पाकिस्तान के शीर्ष चुनावी निकाय ने निर्धारित 90 दिनों की अवधि से परे चुनाव स्थगित करने के अपने कदम का बचाव करते हुए कहा है कि निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन के बिना मतदाताओं को संसद में सच्चा प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। नौ अगस्त को नेशनल असेंबली भंग होने के बाद पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) मुश्किल स्थिति में फंस गया है।
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संवैधानिक प्रावधान को पूरा करने के लिए ईसीपी को अगले आम चुनाव नौ नवंबर तक कराने होंगे। चुनाव आयोग को एक और संवैधानिक दायित्व भी पूरा करना होगा, जो देश भर में होने वाली किसी भी जनगणना के परिणाम को आधिकारिक तौर पर समर्थन दिए जाने के बाद नए सिरे से परिसीमन करने के लिए बाध्य करता है। सातवीं जनगणना मार्च और अप्रैल में हुई थी और पिछली सरकार ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से कुछ दिन पहले ही जनगणना के नतीजे को मंजूरी दी थी।
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ईसीपी दोनों संवैधानिक दायित्वों को एक साथ पूरा नहीं कर सकता है और दूसरे की खातिर एक का उल्लंघन करना पड़ेगा, यह वही है जो वह करना चाहता है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को इस महीने की शुरुआत में काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट (सीसीआई) द्वारा अनुमोदित नई जनगणना के अनुसार किए जाने वाले नए परिसीमन के कार्यक्रम की घोषणा की। तय कार्यक्रम के मुताबिक, देशभर में निर्वाचन क्षेत्रों का नया परिसीमन इस साल दिसंबर में अधिसूचित किया जाएगा।
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ईसीपी के कार्यक्रम से पता चलता है कि नए सिरे से परिसीमन में लगभग चार महीने लगेंगे, जिसका अर्थ है कि देश में आम चुनाव प्रांतीय और राष्ट्रीय असेंबली के विघटन के 90 दिनों के भीतर नहीं हो सकते हैं। जमात-ए-इस्लामी जैसे राजनीतिक दलों और वकीलों का प्रतिनिधित्व करने वाले पाकिस्तान बार काउंसिल जैसे समूहों ने चुनाव में देरी के कदम की आलोचना की, जिससे चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
चुनाव आयोग ने चुनाव में देरी करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि चुनाव कराने के लिए यह प्रक्रिया एक संवैधानिक आवश्यकता थी और निर्वाचन क्षेत्रों के नए परिसीमन और अपडेटेड मतदाता सूची के बिना मतदाताओं को संसद में सच्चा प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
चुनाव आयोग ने कहा, निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन और अपडेटेड मतदाता सूची के बिना निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों में से किसी को भी संसद और प्रांतीय विधानसभाओं में सच्चा प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, जो संविधान द्वारा परिकल्पित संवैधानिक लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।
पाक मीडिया ने बताया कि जनगणना परिणामों की आधिकारिक अधिसूचना के बाद परिसीमन के सवाल पर एक लिखित आदेश में कहा गया कि संविधान के तहत कर्तव्य की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का ताजा परिसीमन आवश्यक था। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव ईमानदारी, न्यायपूर्ण और निष्पक्ष रूप से आयोजित किए जाएं, यह कदम आवश्यक था।
ईसीपी की विस्तृत प्रतिक्रिया से पता चलता है कि चुनाव में देरी करने का उसका निर्णय तब तक अंतिम है जब तक कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जाती। सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले के माध्यम से चुनाव निकाय को समय पर चुनाव कराने के लिए मजबूर किया है।