हिन्दी फिल्में नहीं दिखाएंगे पाकिस्तान के सिनेमाघर, ‘पिंक’ का प्रदर्शन रोका
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कराची के सिनेमाघरों ने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पिंक’ का प्रदर्शन रोक दिया है। लाहौर के सुपर सिनेमा ने तय किया है कि आइंदा हिन्दुस्तानी फिल्में नहीं दिखाएगा। पाकिस्तान की सेना और कलाकारों के प्रति एकजुटता दिखाने के इरादे से हिन्दुस्तानी फिल्मों और कलाकारों के बायकॉट का फैसला भी किया है। कई कलाकारों ने भी ट्वीट करके कहा है कि पाकिस्तान की प्रतिभाओं को हिन्दुस्तान जाना ही नहीं चाहिए।
इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की ओर से पाकिस्तानी अभिनेताओं, गायकों और तकनीशियनों पर प्रतिबंध की पाकिस्तान में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। कराची के न्यूप्लेक्स और एट्रियम सिनेमाघरों से ‘पिंक’ हटा ली गई है। न्यूप्लेक्स के फेसबुक पेज पर कल रात की एक पोस्ट में भारतीय फिल्मों पर तत्काल प्रभाव से रोक के प्रंबधन के फैसले की जानकारी दी गई है।
इस पोस्ट को पढ़ने वाले 16 हजार लोगों में से 4301 लोगों ने इसे साझा किया और 1700 से ज्यादा लोगों ने कमेंट किया है। कमेंट करने वाले ज्यादातर लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है हालांकि इसे गलत बताने और इसकी कटु आलोचना करने वाले भी इसमें शरीक हैं।
फिल्मों की सीडी-डीवीडी बेचने पर भी रोक की अपील
पाकिस्तान के बड़े सिनेमाघर संचालकों में से एक सुपर सिनेमा की फेसबुक पोस्ट भी इसी तरह की है। भारतीय फिल्मों के बायकॉट के अपने फैसले की जानकारी देने के साथ ही पाकिस्तान के टीवी चैनल और केबिल ऑपरेटरों से भी भारतीय फिल्मों और धारावाहिकों का प्रसारण बंद करने की अपील की गई है। फिल्मों की सीडी-डीवीडी बेचने पर भी रोक की अपील की है।
अभिनेता हम्जा अली अब्बासी ने फेसबुक पर लिखा कि समय आ गया है, जब पाकिस्तानी कलाकारों को बॉलीवुड का बहिष्कार करना चाहिए और पाकिस्तान के लोगों को मनोरंजन के हिन्दुस्तानी कंटेंट का। अतिका ओधो और अज़फर रहमान ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण ठहराते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने हमेशा उसके यहां से आए कलाकारों-प्रतिभाओं की कद्र की है। कलाकारों को राजनीति के दुश्चक्र से अलग ही रहना चाहिए।