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Pahalgam Tension: 13 दिन से लगातार सीमा पर गोलीबारी कर रहा पाकिस्तान, भारत जबरदस्त पलटवार की कर रहा तैयारी
सार
Pahalgam Tension: भारत और पाकिस्तान 22 अप्रैल को बायसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद जबरदस्त तरीके से तैयारी कर रहे हैं। वहीं इस घटना के बाद से पाकिस्तान हर दिन सीमा पर संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है।
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Pahalgam Terror Attack
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारत को पहलगाम में बायसरन घाटी में हुए आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की कोई जल्दी नहीं है। भारत ने पाकिस्तान के गले में फंदा डाल दिया है और एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की तरह पड़ोसी देश से ठोस आश्वासन लेने की कोशिश जारी है। ऐसे में बड़े सवाल दो हैं। पहला भारत आगे क्या करने वाला है और दूसरा 11 दिन से लगातार 2003 में हुए संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करके पाकिस्तान क्या चाहता है?
विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि दोनों देश 22 अप्रैल को बायसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद जबरदस्त तरीके से तैयारी कर रहे हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस हमले के बाद भारत की तरफ से लगाए जाने वाले आरोप को बेबुनियाद बता रहा है। भारत की कोशिशों को उकसावे की कार्रवाई बता रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ लगातार कूटनीतिक प्रयासों को जारी रख रहे हैं। उसके विदेश मंत्री अमेरिका समेत कई देशों के संपर्क में हैं।
भारत ने भी पाकिस्तान की घेराबंदी तेज कर रखी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने अमेरिका के समकक्ष और रूस के समकक्ष सर्गेई लावरोव से भी बात की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बात हुई है। भारतीय प्रशासन अमेरिका, रूस, इस्राइल समेत दुनिया के तमाम सहयोगी देशों के संपर्क में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष आलोक जोशी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लगातार तैयारियों का जयजा ले रहे हैं और रणनीतिक चर्चा तेज है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद तीनों सेनाओं के अध्यक्षों से ताजा हालात का अपडेट ले रहे हैं। इसके साथ-साथ भारत पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चा, द्विपक्षीय रिश्ता और कूटनीतिक संबंध के मामले में सख्त संदेश देने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहा है।
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यह भी पढ़ें - Pahalgam Attack: पाकिस्तान की कमर तोड़ने के लिए भारत ने की घेराबंदी, इटली और ADB से फंडिंग रोकने की मांग की
भारत ने पाकिस्तान के गले में लंबा फंदा डाल दिया है
कारगिल और संसद पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान घुटने के बल आया था। 2003 में भारत के साथ संघर्ष विराम का समझौता हुआ था और दोनों देशों ने सीमा पर एक दूसरे के विरुद्ध उकसावे की कारवाई को न करने की वचन बद्धता दोहराई थी। भारत की कूटनीति रंग लाई थी और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारत को भरोसा दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच में बनी इस सहमति का असर पिछले 20 साल तक अच्छी तरह दिखाई दिया और नियंत्ररेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम समझौते की करीब-करीब अनुपालना ने शांति और स्थायित्व को काफी बल दिया।
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार भी मानते हैं कि भारत ने पाकिस्तान के गले में एक बार फिर फंदा डाला है। वायुसेना के पूर्व एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह इस समय लिस्बन में हैं। फोन पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही समय पर और सही तरीके से पाकिस्तान के गले में फंदा डाला है। एनबी सिंह कहते हैं कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ पहलगाम हमले को लेकर कार्रवाई की बहुत जल्दी नहीं है। नई दिल्ली की कोशिश आतंकवाद के खिलाफ ठोस समाधान की है। सेना के एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल का भी कहना है कि भारत सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बनाने का दबाव बढ़ाता जा रहा है। भारत का साफ कहना है कि आतंकवाद नासूर है। भारत के विरुद्ध आतंकवाद और घुसपैठ को पाकिस्तान की जमीन से संरक्षण मिलता है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत लगातार इसको लेकर आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई का दबाव बना रहा है।
11 दिन से संघर्ष विराम का उल्लंघन करके पाकिस्तान चाहता क्या है?
यह एक बड़ा सवाल है। सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकार एसके शर्मा कहते हैं कि पाकिस्तान की तरफ से 11 दिन से सीमा पर गोलीबारी जारी है। भारत के सैनिक इसका जवाब दे रहे हैं। वह ऐसा करके 2003 में हुए संघर्ष विराम समझौते का लगातार उल्लंघन कर रहा है। दूसरे पाकिस्तान ने 1971 में हुए शिमला समझौते को निलंबित करने की धमकी दी है और कश्मीर के मामले को हवा दे रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाए कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच मुख्य विवाद का विषय मानकर इसे सुलझाने में हस्तक्षेप करें। पाकिस्तान में अपनी सेवाएं दे चुके भारत के विदेश सेवा के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान इस तरह की कोशिश हमेशा करता रहा है। उसे सफलता नहीं मिली है। सूत्र का कहना है कि 11 दिन से पड़ोसी देश ने संघर्ष विराम का उल्लंघन ही नहीं किया है, बल्कि उसके हैकर भारत की रक्षा-सुरक्षा और विदेश मंत्रालय की साइटों पर लगातार साइबर हमला कर रहे हैं। पिछले दो दिनों में पड़ोसी देश ने दो मिसाइल का परीक्षण करके विश्व समुदाय को तनाव चरम पर होने का संदेश दिया है।
क्या दोनों देश टकराएंगे या फिर घुटने के बल आएगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान के हुक्मरान बार-बार परमाणु हथियार संपन्न होने की धमकी देते हैं। इस मामले में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर भी पीछे नहीं हैं। भारत इस मामले में जिम्मेदार रवैय्या अपना रहा है।हमारे सेनाध्यक्ष पाकिस्तान के जनरल की तरह नहीं हैं। संयम, गंभीरता बनाए रखते हैं। संवेदनशील मामला होने के कारण सामरिक, रणनीतिक मामले के भारतीय विशेषज्ञ इस मामले में कोई निर्णायक टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन अधिकांश का मानना है कि भारत सबक सिखाएगा, लेकिन दोनों देशों के बीच में सैन्य टकराव की नौबत आने की संभावना बहुत कम है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आतंकियों को सबक सिखाने के लिए सीमित कार्रवाई कर सकता है।
यह भी पढ़ें - MHA: केंद्रीय गृह मंत्रालय का कई राज्यों को मॉक ड्रिल का निर्देश, छात्रों-नागरिकों को प्रशिक्षण देने को कहा
भारत पकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 2016 में औरफिर आपरेशन बालाकोट जैसी दो सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका है।विशेषज्ञों का कहना हैकि इलिए तीसरी कार्रवाई थोड़ा अलग होगी। रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को आत्मरक्षा में आतंकवाद केखिलाफ लड़ाई में पूर्ण समर्थन दिया है। पुतिन का यह समर्थन विदेश मंत्री एस जयशंकर की प्रतिक्रिया के बाद आया। एस जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री लावरोव से बातचीत के बाद सहयोगी देशों को नसीहत न देने का सुझाव देदिया था। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री माइक रुबियो भारत का समर्थन करते हुए वैकल्पिक उपाय पर जोर दे रहे हैं। यूरोप आतंकवाद की भर्त्सना कर रहा है। आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के पक्ष में है, लेकिन दोनों देशों के बीच में टकराव नहीं चाहता। भारत के पड़ोसी देश चीन के लिए पाक अधिकृत कश्मीर महत्वपूर्ण है। सीपीईसी को लेकर संवेदनशील है और पाकिस्तान से उसके समीकरण अभी ठीक हैं।
भारत की मंशा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध ठोस भरोसा दे। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर बायसरन घाटी में हुए हमले की निष्पक्ष जांच में सहयोग की बात कर रहा है। भारत का कहना है कि कारगिल के बाद से पाकिस्तान की जमीन से भारत पर कई बड़े आतंकी हमले हुए। इनके सूत्रधारों की पाकिस्तान में होने की पुष्टि भी हुई, लेकिन पाकिस्तान ने न तो पारदर्शी तरीके से जांच में सहयोग दिया और न ही आतंकी हमले के सूत्रधारों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें न्याय के कठघरे में लाने की प्रतिबद्धता दिखाई। माना जा रहा है कि इस बार भारत की प्रतिबद्ध है। वह पाकिस्तान से ठोस भरोसा चाहता है कि पड़ोसी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के विरुद्ध आतंकवाद और अन्य गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। सीमा और नियंत्रण रेखा पर सीमा पार की घुसपैठ रोकने में पाकिस्तान की जिम्मेदारी चाहता है।
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विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि दोनों देश 22 अप्रैल को बायसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद जबरदस्त तरीके से तैयारी कर रहे हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस हमले के बाद भारत की तरफ से लगाए जाने वाले आरोप को बेबुनियाद बता रहा है। भारत की कोशिशों को उकसावे की कार्रवाई बता रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ लगातार कूटनीतिक प्रयासों को जारी रख रहे हैं। उसके विदेश मंत्री अमेरिका समेत कई देशों के संपर्क में हैं।
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भारत ने भी पाकिस्तान की घेराबंदी तेज कर रखी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने अमेरिका के समकक्ष और रूस के समकक्ष सर्गेई लावरोव से भी बात की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बात हुई है। भारतीय प्रशासन अमेरिका, रूस, इस्राइल समेत दुनिया के तमाम सहयोगी देशों के संपर्क में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष आलोक जोशी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लगातार तैयारियों का जयजा ले रहे हैं और रणनीतिक चर्चा तेज है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद तीनों सेनाओं के अध्यक्षों से ताजा हालात का अपडेट ले रहे हैं। इसके साथ-साथ भारत पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चा, द्विपक्षीय रिश्ता और कूटनीतिक संबंध के मामले में सख्त संदेश देने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहा है।
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भारत ने पाकिस्तान के गले में लंबा फंदा डाल दिया है
कारगिल और संसद पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान घुटने के बल आया था। 2003 में भारत के साथ संघर्ष विराम का समझौता हुआ था और दोनों देशों ने सीमा पर एक दूसरे के विरुद्ध उकसावे की कारवाई को न करने की वचन बद्धता दोहराई थी। भारत की कूटनीति रंग लाई थी और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारत को भरोसा दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच में बनी इस सहमति का असर पिछले 20 साल तक अच्छी तरह दिखाई दिया और नियंत्ररेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम समझौते की करीब-करीब अनुपालना ने शांति और स्थायित्व को काफी बल दिया।
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार भी मानते हैं कि भारत ने पाकिस्तान के गले में एक बार फिर फंदा डाला है। वायुसेना के पूर्व एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह इस समय लिस्बन में हैं। फोन पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही समय पर और सही तरीके से पाकिस्तान के गले में फंदा डाला है। एनबी सिंह कहते हैं कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ पहलगाम हमले को लेकर कार्रवाई की बहुत जल्दी नहीं है। नई दिल्ली की कोशिश आतंकवाद के खिलाफ ठोस समाधान की है। सेना के एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल का भी कहना है कि भारत सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बनाने का दबाव बढ़ाता जा रहा है। भारत का साफ कहना है कि आतंकवाद नासूर है। भारत के विरुद्ध आतंकवाद और घुसपैठ को पाकिस्तान की जमीन से संरक्षण मिलता है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत लगातार इसको लेकर आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई का दबाव बना रहा है।
11 दिन से संघर्ष विराम का उल्लंघन करके पाकिस्तान चाहता क्या है?
यह एक बड़ा सवाल है। सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकार एसके शर्मा कहते हैं कि पाकिस्तान की तरफ से 11 दिन से सीमा पर गोलीबारी जारी है। भारत के सैनिक इसका जवाब दे रहे हैं। वह ऐसा करके 2003 में हुए संघर्ष विराम समझौते का लगातार उल्लंघन कर रहा है। दूसरे पाकिस्तान ने 1971 में हुए शिमला समझौते को निलंबित करने की धमकी दी है और कश्मीर के मामले को हवा दे रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाए कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच मुख्य विवाद का विषय मानकर इसे सुलझाने में हस्तक्षेप करें। पाकिस्तान में अपनी सेवाएं दे चुके भारत के विदेश सेवा के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान इस तरह की कोशिश हमेशा करता रहा है। उसे सफलता नहीं मिली है। सूत्र का कहना है कि 11 दिन से पड़ोसी देश ने संघर्ष विराम का उल्लंघन ही नहीं किया है, बल्कि उसके हैकर भारत की रक्षा-सुरक्षा और विदेश मंत्रालय की साइटों पर लगातार साइबर हमला कर रहे हैं। पिछले दो दिनों में पड़ोसी देश ने दो मिसाइल का परीक्षण करके विश्व समुदाय को तनाव चरम पर होने का संदेश दिया है।
क्या दोनों देश टकराएंगे या फिर घुटने के बल आएगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान के हुक्मरान बार-बार परमाणु हथियार संपन्न होने की धमकी देते हैं। इस मामले में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर भी पीछे नहीं हैं। भारत इस मामले में जिम्मेदार रवैय्या अपना रहा है।हमारे सेनाध्यक्ष पाकिस्तान के जनरल की तरह नहीं हैं। संयम, गंभीरता बनाए रखते हैं। संवेदनशील मामला होने के कारण सामरिक, रणनीतिक मामले के भारतीय विशेषज्ञ इस मामले में कोई निर्णायक टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन अधिकांश का मानना है कि भारत सबक सिखाएगा, लेकिन दोनों देशों के बीच में सैन्य टकराव की नौबत आने की संभावना बहुत कम है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आतंकियों को सबक सिखाने के लिए सीमित कार्रवाई कर सकता है।
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भारत पकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 2016 में औरफिर आपरेशन बालाकोट जैसी दो सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका है।विशेषज्ञों का कहना हैकि इलिए तीसरी कार्रवाई थोड़ा अलग होगी। रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को आत्मरक्षा में आतंकवाद केखिलाफ लड़ाई में पूर्ण समर्थन दिया है। पुतिन का यह समर्थन विदेश मंत्री एस जयशंकर की प्रतिक्रिया के बाद आया। एस जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री लावरोव से बातचीत के बाद सहयोगी देशों को नसीहत न देने का सुझाव देदिया था। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री माइक रुबियो भारत का समर्थन करते हुए वैकल्पिक उपाय पर जोर दे रहे हैं। यूरोप आतंकवाद की भर्त्सना कर रहा है। आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के पक्ष में है, लेकिन दोनों देशों के बीच में टकराव नहीं चाहता। भारत के पड़ोसी देश चीन के लिए पाक अधिकृत कश्मीर महत्वपूर्ण है। सीपीईसी को लेकर संवेदनशील है और पाकिस्तान से उसके समीकरण अभी ठीक हैं।
भारत की मंशा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध ठोस भरोसा दे। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर बायसरन घाटी में हुए हमले की निष्पक्ष जांच में सहयोग की बात कर रहा है। भारत का कहना है कि कारगिल के बाद से पाकिस्तान की जमीन से भारत पर कई बड़े आतंकी हमले हुए। इनके सूत्रधारों की पाकिस्तान में होने की पुष्टि भी हुई, लेकिन पाकिस्तान ने न तो पारदर्शी तरीके से जांच में सहयोग दिया और न ही आतंकी हमले के सूत्रधारों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें न्याय के कठघरे में लाने की प्रतिबद्धता दिखाई। माना जा रहा है कि इस बार भारत की प्रतिबद्ध है। वह पाकिस्तान से ठोस भरोसा चाहता है कि पड़ोसी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के विरुद्ध आतंकवाद और अन्य गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। सीमा और नियंत्रण रेखा पर सीमा पार की घुसपैठ रोकने में पाकिस्तान की जिम्मेदारी चाहता है।
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