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पद्मावती: स्मृति की चुटकी पर आपस में भिड़े थरूर-सिंधिया, इतिहास पढ़ने की दी नसीहत

Fri, 17 Nov 2017 10:11 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली 
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Fri, 17 Nov 2017 10:11 PM IST
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Padmavati: Shashi Tharoor should study history says Jyotiraditya Scindia
Jyotiraditya Scindia

पद्मावती फिल्म पर उपजे विवाद मामले में सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी की ओर से ली गई एक चुटकी पर कांग्रेस के दो दिग्गज नेता शशि थरूर और ज्योरतिरादित्य सिंधिया आमने-सामने आ गए। 

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थरूर की ब्रिटिश काल में राजाओं-महाराजाओं पर की गई टिप्पणी सिंधिया को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने थरूर को न सिर्फ इतिहास पढ़ने की नसीहत दी, बल्कि बेवजह विवाद खड़ा न करने के प्रति भी आगाह किया। 
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दरअसल पद्मावती के विरोध पर थरूर ने ब्रिटिश काल के राजाओं-महाराजाओं पर तीखा व्यंग्य किया था। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि एक फिल्म के कारण निर्देशक और कलाकारों के पीछे हाथ धोकर पड़ने वालों को उस समय अपने मान सम्मान की कोई चिंता नहीं थी। 
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ब्रिटिश इनके मान सम्मान को पैरों तले रौंद रहे थे और वे खुद को बचाने के लिए भाग खड़े हुए थे। इस पर स्मृति ने ट्वीट करके पूछा कि क्या सभी महाराजाओं ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेके थे। इस पर ज्योतिरादित्य, दिग्विजय सिंह और अमरिंदर सिंह को अपनी राय देनी चाहिए। गौरतलब है कि इन सभी के पूर्वज ब्रिटिश काल में अलग-अलग प्रांत के राजा थे। 

स्मृति के इस ट्वीट के बाद सिंधिया भड़क गए। उन्होंने कहा कि थरूर को इतिहास की जानकारी नहीं है। उन्हें यह जानने के लिए इतिहास पढ़ना चाहिए कि ब्रिटिश काल में महाराजाओं की क्या भूमिका थी। उन्हें बेवजह की बयानबाजी के सहारे विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए। 


गौरतलब है कि इस फिल्म के विरोध में सरकार के कई मंत्री भी निर्देशक के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने इस फिल्म के जरिए लोगों की भावनाओं और आस्था को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था। जबकि उमा भारती ने निर्देशक और पटकथा लेखक को विवाद की जड़ बताते हुए सेंसर बोर्ड को लोगों की भावनाओं का ख्याल रखने की नसीहत दी थी।

 

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