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संघ ने भी किया पद्मावत का विरोध, कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इतिहास से खिलवाड़ गलत

Mon, 22 Jan 2018 09:02 PM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 22 Jan 2018 09:02 PM IST
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Padmaavat Controversy: It's wrong to play with history on the name of freedom of expression says RSS

पद्मावती के जरिए गुजरात की सियासी फसल काटने के बाद भगवा परिवार की रणनीति अब उत्तर भारत के अहम राज्यों में भी पद्मावत का विरोध कर राजनीतिक रोटी सेकने की है। यही वजह है कि संघ भी अब खुलकर पद्मावत के विरोध में सामने आ गया है। संघ ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इतिहास के साथ खिलवाड़ गलत है।

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राजस्थान संघ के प्रांत संघचालक रमेश अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा है कि संघ का स्पष्ट अभिमत है कि ऐतिहासिक संदर्भों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में, इतिहास सम्मत एवं जनभावना के अनुरूप ही अभिव्यक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य सृजन में ऐतिहासिक घटना को रोचक बनाने के लिए कल्पना की छूट स्वाभाविक है। मगर कल्पना की उड़ान पात्र की गरिमा व इतिहास तथा जनभावनाओं के अनुकूल होनी चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इतिहास के साथ खिलवाड़ गलत है। मलिक मुहम्मद जायसी ने ऐतिहासिक कथानक को ही कल्पना विस्तार दिया है। 
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 पद्मावत को लेकर चल रहे विवाद पर संघ ने सरकार को नसीहत देते हुए फिल्म के विरोध में चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है। अपने बयान में संघ ने कहा है कि सरकार को इस प्रकार की घटनाओं पर जनभावना का ध्यान रखते हुए नियंत्रण रखना चाहिए। समाज भी जनतांत्रिक तरीके से किसी भी प्रकार की ऐतिहासिक छेड़छाड़ के विरूद्ध आंदोलन एवं जन जागरण के लिए स्वतंत्र है। 

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पद्मावत विरोधियों को मिला संघ का साथ 

Padmaavat Controversy: It's wrong to play with history on the name of freedom of expression says RSS
PADMAAVAT

विवाद थामने के लिए सेंसर बोर्ड की पहल और सर्वोच्च न्यायालय के फरमान के बाद तमाम राज्य सरकारों के पद्मावत विरोध की स्थिति से निपटने के लिए हाथ-पांव फूल रहे हैं। तो संघ ने पद्मावत विरोधियों के साथ की बात कही है। राजस्थान क्षेत्र के एक अन्य संघचालक डॉ. भगवती प्रकाश ने कहा है कि अपने उद्दात्त, प्रेरक इतिहास के प्रति संघ सदैव आग्रही रहा है और इसलिए संघ के स्वयंसेवक सहज ही ऐसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर समाज के साथ सहभागी होकर अग्रसर होते ही हैं। उनके इस बयान को पद्मावत विरोधियों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। 

राजपूत मतों पर है भगवा परिवार की नजर 
दरअसल पद्मावत का विरोध कर भगवा परिवार राजपूत बिरादरी के मतों को नाराज करने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि रणनीति के तहत जहां भाजपा शासित राज्यों ने पद्मावत के विरोध को देखते हुए अपने-अपने राज्यों में फिल्म बैन किया था। मगर सर्वोच्च न्यायालय ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। अब भी राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा सरीखे राज्यों ने सर्वोच्च न्यायालय समेत तमाम माध्यमों से कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।

 उत्तर भारत के राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर भाजपा के खिलाफ बताई जा रही है। तो निकाय चुनाव के नतीजे मध्यप्रदेश में भी भाजपा के लिए सुखद नहीं प्रतित हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ ने भी पद्मावत के विरोध में कदम रखा है। ताकि इसके जरिए संगठन के कार्यकर्ताओं में जुनून पैदा किया जा सके। फिल्म को वे समाज और संस्कृति के विरूद्ध साजिश के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। 

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