फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Padma Awards Padma Shri Unsung Heroes know contribution in society

पद्मश्री: 34 गुमनाम नायकों की कहानी, किसी ने बर्न पीड़ितों की फ्री सर्जरी की तो कोई हजारों किमी साइकिल से चला

Thu, 25 Jan 2024 11:46 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 25 Jan 2024 11:46 PM IST
सार

पद्म पुरस्कार से सम्मानित 34 गुमनायक ऐसे हैं जिन्होंने समाज में बदलाव लाने का काम किया है। पद्मश्री से सम्मानित इन गुमनायकों की कहानी काफी प्रेरक है। कोई जले हुए रोगियों का मुफ्त इलाज करने के लिए मशहूर है तो किसी ने हजारों किलोमीटर साइकिल चलाई।

विज्ञापन
Padma Awards Padma Shri Unsung Heroes know contribution in society
पद्मश्री से सम्मानित चार गुमनाम नायक - फोटो : social media

विस्तार

1. पार्बती बरुआ (सामाज सेवा, असम, उम्र- 67 साल)-
विज्ञापन

भारत की पहली महिला हाथी महावत, जिन्होंने रूढ़िवादिता से उबरने के लिए 14 साल की उम्र में जंगली हाथियों को वश में करना शुरू किया था। उन्हें सामाजिक कार्य (पशु कल्याण) के क्षेत्र में पद्म श्री के लिए चुना गया है।
2. जागेश्वर यादव (सामाजिक कार्य, छत्तीसगढ़, उम्र- 67 साल)-
जशपुर के आदिवासी कल्याण कार्यकर्ता जागेश्वर यादव को सामाजिक कार्य (आदिवासी पीवीटीजी) के क्षेत्र में पद्म श्री दिया जाएगा। उन्होंने हाशिये पर पड़े बिरहोर पहाड़ी कोरवा लोगों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
विज्ञापन

3. चामी मुर्मू (सामाजिक कार्य, झारखंड, उम्र- 52 साल)-
सरायकेला खरसावां की आदिवासी पर्यावरणविद् और महिला सशक्तिकरण चैंपियन चामी मुर्मू को सामाजिक कार्य (पर्यावरण वनीकरण) के क्षेत्र में पद्म श्री दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

4. गुरविंदर सिंह (सामाजिक कार्य, हरियाणा, उम्र- 53 साल)-
बेघर, निराश्रितों, महिलाओं, अनाथों और दिव्यांगजनों की भलाई के लिए काम करने वाले सिरसा के दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह को सामाजिक कार्य (दिव्यांगजन) के क्षेत्र में पद्मश्री प्राप्त होगा।
5. सत्यनारायण बेलेरी (अन्य, केरल, उम्र-50 साल)-
सरगोड के चावल किसान सत्यनारायण बेलेरी को अन्य (कृषि अनाज चावल) के क्षेत्र में पद्म श्री के लिए चुना गया। उन्होंने 650 से अधिक पारंपरिक चावल किस्मों को संरक्षित करके धान की फसलों के संरक्षक के रूप में सामने आए।
6. दुखू माझी (सामाजिक कार्य, पश्चिम बंगाल, उम्र- 78 साल)-
पुरुलिया के सिंदरी गांव के आदिवासी पर्यावरणविद् दुखू माझी को सामाजिक कार्य (पर्यावरण वनीकरण) के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जाएगा। उन्होंने हर दिन अपनी साइकिल पर नए गंतव्यों की यात्रा करते हुए बंजर भूमि पर 5,000 से अधिक बरगद, आम और ब्लैकबेरी के पेड़ लगाए।
7. के चेल्लम्मल (अन्य, अंडमान व निकोबार, उम्र- 69 साल)-
क्षिण अंडमान के जैविक किसान के. चेल्लम्मल (नारियल अम्मा) को अन्य (कृषि जैविक) के क्षेत्र में पद्मश्री मिला। उन्होंने 10 एकड़ का जैविक फार्म सफलतापूर्वक विकसित किया।
8. संगथंकिमा (सामाजिक कार्य, मिजोरम, उम्र- 63 साल)-
मिजोरम के सबसे बड़े अनाथालय 'थुतक नुनपुइटु टीम' चलाने वाले आइजोल के एक सामाजिक कार्यकर्ता संगथंकिमा को सामाजिक कार्य (बाल) के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जाएगा।
9. हेमचंद मांझी (चिकित्सा, छत्तीसगढ़, उम्र- 70 साल)-
नारायणपुर के पारंपरिक औषधीय चिकित्सक हेमचंद मांझी को चिकित्सा (आयुष पारंपरिक चिकित्सा) के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जाएगा। उन्होंने पांच दशकों से अधिक समय से ग्रामीणों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने 15 साल की उम्र से जरूरतमंदों की सेवा शुरू कर दी थी। 
10. यानुंग जमोह लेगो (अन्य, अरुणाचल प्रदेश, उम्र- 58 साल)-
यानुंग जमोह लेगो पूर्वी सियांग स्थित हर्बल चिकित्सा विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 10,000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा देखभाल की है। एक लाख व्यक्तियों को औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में शिक्षित किया है। एसएचजी को प्रशिक्षित किया है। उन्हें अन्य (कृषि औषधीय पौधों) के क्षेत्र में पद्मश्री के लिए चुना गया है।
11. सोमन्ना (सामाजिक कार्य, कर्नाटक, उम्र- 66 साल)-
सामाजिक कार्य (आदिवासी पीवीटीजी) के क्षेत्र में पद्मश्री के लिए मैसूरु के एक जनजातीय कल्याण कार्यकर्ता सोमन्ना को चुना गया है। उन्होंने जेनु कुरुबा जनजाति के उत्थान के लिए चार दशकों से अधिक समय से अथक प्रयास कर रहे हैं।
12. सर्बेस्वर बासुमतारी (कृषि, असम, उम्र- 61 साल)-
असम के सर्बेस्वर बासुमतारी को खेती में योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा जाएगा। 61 साल के सर्बेस्वर एक आदिवासी किसान हैं। इन्होंने मिक्स एकीकृत खेती (Mixed integrated farming) करते हुए नारियल, संतरा, धान, मक्का और लीची की कई वेराइटी डेवलप  की है। कभी दिहाड़ी मजदूरी करने वाले गुमनाम सर्बेस्वर आज हजारों किसानों की प्रेरणा है।
13. प्रेमा धनराज (चिकित्सा, कर्नाटक, उम्र- 72 साल)-
प्रेमा धनराज प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जले हुए पीड़ितों की देखभाल और पुनर्वास के लिए काम करती हैं। उनकी विरासत आगे बढ़ रही है। रोकथाम, जागरूकता और नीति सुधार के लिए अथक परिश्रम कर रही हैं। उन्हें मेडिसिन (स्वदेशी बर्न्स) के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जाएगा।
14. उदय विश्वनाथ देशपांडे (खेल, महाराष्ट्र, उम्र- 70 साल)-
मलखम्ब की दुनिया में पितामह के नाम से मशहूर उदय विश्वनाथ देशपांडे को देश-दुनिया में मल्लखंभ का ध्वजवाहक माना जाता है। और वैश्विक मानचित्र पर खेल को लाने का श्रेय दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मलखम्ब कोच देशपांडे ने वैश्विक स्तर पर इस खेल को पुनर्जीवित करने और लोकप्रिय बनाने के लिए अथक प्रयास किया। देशपांडे ने 50 देशों के 5,000 से अधिक लोगों को व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित किया। 
15. वाईएम इटालिया (चिकित्सा, गुजरात, उम्र- 72 साल)-
सिकल सेल के इलाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले मशहूर माइक्रोबायोलॉजिस्ट याज्दी मानेकशा इटालिया को सम्मानित किया जाएगा। सिकल सेल अनीमिया कंट्रोल प्रोग्राम (SCACP) में इन्होंने अहम भूमिका निभाई है। आईसीएमआर के करीबी सहयोग में काम करने वाले इटालिया ने दो लाख आदिवासी लोगों की जांच कराई है। गुजरात में 95 लाख लोगों की जांच की गई है।
16. शांति देवी पासवान और शिवन पासवान (कला, बिहार, युगल)- दुसाध समुदाय से आने वाले पति-पत्नी ने सामजिक विषमताओं का सामने करते हुए गोदना पेंटिंग में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। इन्होंने अमेंरिका, जापान, हांगकांग सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसके अलावा शांति देवी और शिवन पासवान ने 20 हजार से अधिक महिलाओं को कला की इस विधा में प्रशिक्षित किया। कभी शांति देवी को उनकी जाति की वजह से उनके गांव में पीने का पानी लेने से भी रोक दिया गया था। उन्होंने भारत में आयोजित जी-20 जैसे वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। तमाम आर्थिक तंगी के बावजूद शिवन पासवान ने अपनी कला को न सिर्फ जारी, बल्कि प्रशिक्षण के माध्य से उसे आगे बढ़ाया।
17. रतन कहार (कला- लोक गायिकी, पश्चिम बंगाल, उम्र 88 साल)-
पश्चिम बंगाल के बीरभूम में भाडू लोक गायिकी की दुनिया में मशहूर रतन कहार जात्रा फोक थियेटर में सराहनीय भूमिका के लिए जाने जाते हैं। टुसू, झूमर और अलकाब गाते हैं।
18. अशोक कुमार बिस्वा, टिकुली के भीष्म पितामह (कला, बिहार, उम्र- 67 साल)-
टिकुली पेंटर बिस्वा पिछले पांच दशक से मौर्य युग की इस कला को नई ऊंचाई देने में लगे हैं। इन्हें वास्तविक रूप में इस कला के पुनरुद्धार का श्रेय दिया जाता है। बिस्वा ने हजारों डिजाइन तैयार किए और असंख्य टिकुली पेंटिंग का निर्यात किया। निशुल्क प्रशिक्षण देते हुए बिस्वा ने आठ हजार से अधिक कलाकारों को प्रशिक्षित किया।
19. बालाकृष्णन एसपी विटील (कला, नृत्य, केरल, 79 साल)- 
ख्यातिलब्ध कल्लुवाझी कथकली नृतक के रूप में बालकृष्ण सदनम का कॅरिअर छह दशक से भी अधिक लंबा है। इन्होंने वैश्विक ख्याति अर्जित की और भारतीय संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाया। आपने 25 से अधिक देशों में प्रदर्शन किया
20. उमा महेश्वरी डी (कला, कथावाचन; हरिकथा, आंध्र प्रदेश, उम्र- 63 साल)
पहली महिला हरिकथा गायिका हैं। संस्कृत भाषा में पाठ करने वाली उमा कई रागों में कथाएं सुनाती हैं। भैरवी, शुभपंतुवरलि, केदारम और कल्याणी जैसे रागों में हरिकथा को लोकप्रिय बनाने वाली उमा के योगदान ने कई युवाओं को प्रोत्साहित किया है।
21. गोपीनाथ स्वैन (कला, वोकल, भजन, उड़िया, 105 साल)-
गंजम के कृष्ण लीला गायक ने परंपरा को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। कृष्ण लीला कलाकारों के परिवार से आने के कारण उन्होंने पांच साल की छोटी उम्र से अपनी संगीत यात्रा शुरू की। उन्होंने अखाड़ों (पारंपरिक गांव के स्कूल) की स्थापना की और सैकड़ों शिष्यों को अपना ज्ञान प्रदान किया।
22. स्मृति रेखा चकमा (टेक्सटाइल कला, त्रिपुरा, 63 साल)-
चकमा लुइनलूम शॉल बुनने में त्रिपुरा की इस महिला को महारत हासिल है। इकोफ्रेंडली दागों से शॉल बनाती हैं। सामाजिक सांस्कृतिक संगठन उजेइया जाढा (Ujeia Jadha) बनाया है। इसमें ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है।
23. ओम प्रकाश शर्मा (कला, थियेटर, मध्य प्रदेश, 85 साल)-
माच थिएटर कलाकार ने मालवा क्षेत्र के इस 200 साल पुराने पारंपरिक नृत्य नाटक को बढ़ावा देने के लिए अपने जीवन के सात दशक समर्पित किए हैं। माच थिएटर प्रस्तुतियों के लिए स्क्रिप्ट लिखी और संस्कृत नाटकों को माच शैली में दोबारा तैयार किया। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण, उन्होंने अपने पिता से उस्ताद कालूराम माच अखाड़े के तहत कला सीखी थी।
24. नारायण ईपी (नृत्य, केरल, 67 साल)- थय्यम की परंपरा को दोबारा जिंदा करने का श्रेय दिया जाता है। 67 साल की आयु में इन्होंने थय्यम लोक नर्तक के रूप में अलग मुकाम पाया है।
25. भगबत पधान (लोक नृत्य, ओडिशा, उम्र- 85 साल)-
1960 के दशक में आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन कभी हार नहीं मानी उन्होंने लोक नृत्य के अपने जुनून को कायम रखा। बरगढ़ के सबदा नृत्य लोक नृत्य के प्रतिपादक, जिन्होंने नृत्य शैली को मंदिरों से परे ले लिया है। अपने जीवन के पांच दशक से अधिक समय नृत्य के संरक्षण के लिए समर्पित किया। इन्होंने 'महादेव का नृत्य' कला को लोकप्रिय बनाया। 
26. सनातन रूद्र पाल (मूर्तिकला, पश्चिम बंगाल, उम्र- 68 साल)-
पारंपरिक कला रूप को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के पांच दशकों से अधिक के अनुभव वाले मूर्तिकार सनातन रुद्र पाल साबेकी दुर्गा मूर्तियों को तैयार करने में माहिर हैं।  अपनी मूर्तियों के लिए यूनेस्को से मान्यता प्राप्त की। साथ ही  1500  से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया।
27. बदरप्पन एम( लोक नृत्य, तमिलनाडु, उम्र- 50 वर्ष)-
कोयंबटूर के वल्ली ओयिल कुम्मी लोक नृत्य के प्रतिपादक - गीत और नृत्य प्रदर्शन का एक मिश्रित रूप, जो देवताओं 'मुरुगन' और 'वल्ली' की कहानियों को दर्शाता है। मुख्य रूप से पुरुष प्रधान कला होने के बावजूद बदरप्पन महिला सशक्तीकरण में विश्वास करते हैं और इस तरह उन्होंने महिला कलाकारों को प्रशिक्षित किया।
28. जॉर्डन लेप्चा ( शिल्पकला, सिक्किम, उम्र- 87 साल)-
मंगन के बांस शिल्पकार जॉर्डन लेप्चा, जो लेप्चा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को संजो रहे हैं। पिछले 25 वर्षों से पारंपरिक लेप्चा टोपी बुनाई और बांस शिल्प की प्राचीन कला को संरक्षित किया है। वह एक सीमांत किसान और बढ़ई भी हैं। साथ ही उन्होंने 150 से अधिक युवाओं को इस कला की जानकारी प्रदान  की।
29. मचिहान सासा (शिल्पकला, मणिपुर, उम्र-73 वर्ष)-
उखरुल के लोंगपी कुम्हार जिन्होंने इस प्राचीन मणिपुरी को संरक्षित करने के लिए पांच दशक समर्पित किए।पारंपरिक मिट्टी के बर्तन जिनकी जड़ें नवपाषाण काल (10,000 ईसा पूर्व) से जुड़ी हैं।  खाना पकाने के बर्तन, चाय के कप आदि जैसे लोंगपी मिट्टी के बर्तनों के उत्पादों की किस्मों का निर्माण, विपणन और प्रदर्शन - मणिपुरी लोक कला से प्रेरित नए डिजाइनों का समावेश किया। उन्होंने 300 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया।
30. गद्दाम सम्मैय्या (लोकनृत्य, तेलंगाना, उम्र-67 साल)-  
जनगांव के प्रख्यात चिंदु यक्षगानम थिएटर कलाकार पांच दशकों से अधिक समय से 19,000 से अधिक शो में इस समृद्ध विरासत कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले गद्दाम सम्मैय्या कृषि मजदूर के रूप में काम किया। उन्होंने यह कला अपने माता-पिता से सीखी थी।
31. जानकीलाल (लोक रंगमंच ,राजस्थान,उम्र-81 साल)-  
भीलवाड़ा के बहरूपिया कलाकार जानकीलाल, लुप्त होती कला शैली में महारत हासिल कर रहे हैं और छह दशकों से अधिक समय से वैश्विक दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में इस स्थानीय कला को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। वित्तीय कठिनाई और सीमित संस्थागत समर्थन का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी कला के प्रति अपना जुनून और प्रतिबद्धता जारी रखी।
32. दसारी कोंडप्पा ( संगीत कला, तेलंगाना, उम्र-63 वर्ष)-
नारायणपेट के दामरागिड्डा गांव के तीसरी पीढ़ी के बुर्रा वीणा वादक के रूप में जाने जाते हैं।  बुर्रा वीणा के को विलुप्त होने से बचाया है। बुर्रा वीणा बांस, लौकी के खोल और धातु के तारों का उपयोग करके बनाया गया एक स्वदेशी तार वाला वाद्य यंत्र है।  तेलुगु, कन्नड़ में 'तत्वलु' सामाजिक-धार्मिक नैतिक रचनाएं और आध्यात्मिक दार्शनिक प्रस्तुतियां गाते हैं।
33. बाबू राम यादव(शिल्पकाल, उत्तर प्रदेश, उम्र-74 साल)-
पारंपरिक शिल्पकला तकनीकों का उपयोग करके जटिल पीतल की कलाकृतियां बनाने में छह दशकों से अधिक के अनुभव वाले पीतल मरोरी शिल्पकार हैं। उन्होंने आर्टिसन लाइट की स्थापना की, जिसका उद्देश्य कारीगर समुदायों को आर्थिक कल्याण और सहायता प्रदान करना है।

34. नेपाल चंद्र सूत्रधार, (कला, पश्चिम बंगाल, आयु- 82 साल)-
छऊ डांस के लिए मास्क बनाने वाले नेपाल चंद्र सूत्रधार तीसरी पीढ़ी में इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। 70 से अधिक डांस समूहों को इन्होंने प्रशिक्षित किया है। केवल आठ साल की आयु में पिता से मास्क बनाने सीखा। नवंबर 2023 में इनका निधन हो गया। अब इनके परिजनों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed