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Padma Awardees: वॉर वेटरन से लेकर सांप पकड़ने वाले तक, जानें इस साल पद्म पुरस्कार पाने वालों के बारे में

Thu, 26 Jan 2023 11:00 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 26 Jan 2023 11:00 PM IST
सार

106 विशिष्ट व्यक्तित्वों की सूची में छह पद्म विभूषण, नौ पद्म भूषण और 91 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इसमें एक कृषि वैज्ञानिक का नाम भी शामिल है, जो 'मिलेट मैन ऑफ इंडिया' के नाम से भी जाने जाते हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एक डॉक्टर, जिन्होंने जारवा जनजाति को बचाया विलुप्त होने से बचाया, को भी सम्मान के लिए चुना गया है।

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Padma Awards 2023 War veteran doctor snake catchers Rasna creator among Padma awardees Latest News Update
पद्म पुरस्कार 2020 - फोटो : self

विस्तार

इस साल के पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में पांच दशकों से जरूरतमंद लोगों का इलाज कर रहे युद्ध का हिस्सा रह चुके (वॉर वेटरन) अनुभवी डॉक्टर, दो विशेषज्ञ सांप पकड़ने वाले और संस्कृत में रेशम पर भगवद गीता बुनने वाली 67 वर्षीय एक महिला का नाम देखने को मिला है। अधिकारियों का कहना है कि सम्मान के लिए चुने जाने वालों में कई गुमनाम चेहरे हैं, जो चुपचाप समाज और लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आने के बाद से ऐसे कई नायकों को सम्मानित कर रही है।

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छह पद्म विभूषण, नौ पद्म भूषण और 91 पद्म श्री
106 विशिष्ट व्यक्तित्वों की सूची में छह पद्म विभूषण, नौ पद्म भूषण और 91 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इसमें एक कृषि वैज्ञानिक का नाम भी शामिल है, जो 'मिलेट मैन ऑफ इंडिया' के नाम से भी जाने जाते हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एक डॉक्टर, जिन्होंने जारवा जनजाति को बचाया विलुप्त होने से बचाया, को भी सम्मान के लिए चुना गया है। इसके साथ ही भारत के पसंदीदा पेय में से एक 'रसना' को बनाने वाले व्यक्ति को भी पद्म सम्मान के लिए चुना गया है।
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कन्नड़ लेखक एसएल भैरप्पा को पद्म भूषण
व्यापक रूप से प्रशंसित कन्नड़ लेखक एसएल भैरप्पा को पद्म भूषण के लिए नामित किया गया है, जिनके काम का 14 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है।  तमिलनाडु की प्रसिद्ध गायिका वाणी जयराम को 18 भाषाओं में 20,000 से अधिक गीतों का श्रेय प्राप्त है। कर्नाटक के एक वैदिक विद्वान और आध्यात्मिक नेता स्वामी चिन्ना जीयर और भारतीय व्याकरणिक सिद्धांतों और मॉडलों पर अपनी पुस्तकों के लिए जाने जाने वाले दिल्ली के एक प्रोफेसर कपिल कपूर को भी पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।
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मुनीश्वर चंद डावर को पद्मश्री
हरियाणा के एक आर्य समाज आध्यात्मिक नेता सुकमा आचार्य, जो लड़कियों को वैदिक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं; एक सेवानिवृत्त सेना चिकित्सक और 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दिग्गज मुनीश्वर चंद डावर, जो पिछले 50 वर्षों से जबलपुर में वंचित लोगों का इलाज कर रहे हैं और तमिलनाडु के दो इरुला विशेषज्ञ सांप पकड़ने वाले वदिवेल गोपाल और मासी सदाइयां, जिन्हें दुनिया भर में अपने कौशल और प्रशिक्षण का प्रसार करने के लिए पहचाना गया था, को पद्मश्री दिया गया।

'भारत के मिलेट मैन' को पद्मश्री
असम के एक प्रसिद्ध बुनकर हेमप्रभा चुटिया, जो संस्कृत में रेशम पर भगवद गीता की बुनाई के लिए जाने जाते हैं; सुभद्रा देवी, बिहार की 87 वर्षीय मधुबनी पपीयर माचे कलाकार, जो पिछले छह दशकों से विश्व स्तर पर कला को बढ़ावा दे रही हैं और कर्नाटक के खादर वल्ली दुदेकुला, जो 'भारत के मिलेट मैन' के रूप में प्रसिद्ध हैं और पांच प्रकार के गायब हो रहे बाजरा को पुनर्जीवित करने के लिए जाने जाते हैं, को पद्मश्री दिया जाएगा।

जारवा जनजातियों को विलुप्त होने से बचाने वाले को पद्मश्री
रतन चंद्र कर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एक सेवानिवृत्त सरकारी चिकित्सक, जिन्होंने 1999 की खसरा महामारी के दौरान जारवा जनजातियों को विलुप्त होने के कगार से वापस लाया; गुजरात के आरिज खंबाटा (मरणोपरांत) जिन्होंने भारत के पसंदीदा पेय 'रसना' का निर्माण किया और हेम चंद्र गोस्वामी, जो असम की सदियों पुरानी औपचारिक मुखौटा बनाने की संस्कृति को संरक्षित कर रहे हैं, को पद्मश्री के लिए नामित किया गया है।

उत्तर प्रदेश के वयोवृद्ध गणितज्ञ पद्मश्री
पश्चिम बंगाल की एक कांथा कढ़ाई कलाकार प्रितिकाना गोस्वामी, जो पांच दशकों से अधिक समय से ग्रामीण महिलाओं को कला में प्रशिक्षण और सशक्त बना रही हैं; राधा चरण गुप्ता, उत्तर प्रदेश के एक 87 वर्षीय वयोवृद्ध गणितज्ञ, जिन्हें भारत में गणित के इतिहास पर अपने शोध के लिए श्रेय दिया जाता है, विशेष रूप से त्रिकोणमिति को पद्मश्री के लिए चुना गया।

जयपुर की एक प्रसिद्ध गजल गायक जोड़ी को पद्मश्री
अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन, जयपुर की एक प्रसिद्ध गजल गायक जोड़ी, जो पांच दशकों से अधिक समय से प्रस्तुति दे रही है और सिखा रही है; उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के पीतल नकाशी काम के एक मास्टर शिल्पकार दिलशाद हुसैन और त्रिपुरा के एक सामाजिक कार्यकर्ता बिक्रम बहादुर जमातिया, जिन्होंने जमातिया समुदाय के संरक्षण और उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया है, को पद्मश्री के लिए चुना गया।

एक नगा सामाजिक कार्यकर्ता को सम्मान
रामकुईवांगबे जेने, एक नगा सामाजिक कार्यकर्ता जो पांच दशकों से स्वदेशी हेराका धर्म और संस्कृति का संरक्षण और प्रचार कर रहे हैं, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के एक अभिनेता परशुराम कोमाजी खुने, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गुमराह युवाओं के पुनर्वास के साधन के रूप में रंगमंच का उपयोग कर रहे हैं; ओडिशा के क्योंझर के 85 वर्षीय रॉड कठपुतली कलाकार मगुनी चरण कुंअर और बिहार के आनंद कुमार, जो वंचित बच्चों को राष्ट्रीय परीक्षा पास करने के लिए मुफ्त कोचिंग प्रदान कर रहे हैं, को भी इस पुरस्कार के लिए चुना गया।

नाट्य नाच कलाकार का भी नाम
छत्तीसगढ़ के एक नाट्य नाच कलाकार डोमर सिंह कुंवर, जो 13 बोलियों में प्रदर्शन कर रहे हैं; गजानन जगन्नाथ माने, महाराष्ट्र के एक पूर्व सैनिक सामाजिक कार्यकर्ता, जो दशकों से कुष्ठ रोग प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं और गुजरात के महेंद्र पाल, पशु चिकित्सा माइकोलॉजी के अग्रणी हैं, जो विभिन्न जानवरों को प्रभावित करने वाली बीमारियों में कवक की भूमिका पर अपने पांच दशकों के लंबे शोध के लिए जाने जाते हैं और उत्तर प्रदेश के बांदा के एक जल संरक्षणवादी उमा शंकर पांडे, जिन्होंने पानी की कमी से लड़ने और गांवों को जल अधिशेष बनाने के लिए जखनी मॉडल गांव की अवधारणा तैयार की, को पद्म श्री के लिए चुना गया।


99 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी को भी पद्म सम्मान
पुडुचेरी स्थित बाल रोग विशेषज्ञ नलिनी पार्थसारथी, जो हीमोफिलिया पर अपने काम के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं; तेलंगाना के हनुमंत राव पसुपुलेटी जो पिछले चार दशकों से दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं; केरल के 99 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी वीपी अप्पुकुट्टन पोडुवल, जो वंचित समुदायों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं, उनका नाम भ्ज्ञी पद्म श्री के लिए चुना गया है। गन्ने की नई किस्मों के विकास में योगदान के लिए जाने जाने वाले हरियाणा के बख्शी राम और केरल के वायनाड में चावल की 50 से अधिक देशी किस्मों को संरक्षित करने वाले आदिवासी चावल किसान चेरुवयाल के रमन को भी पद्मश्री के लिए चुना गया है।

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