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Padma Awards 2026: आजादी के बाद इन 10 जिलों से लोगों को पहली बार पद्म पुरस्कार, 84 जिलों का होगा प्रतिनिधित्व

Sun, 25 Jan 2026 09:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 25 Jan 2026 09:47 PM IST
सार

Padma Awards 2026:  देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें देश के हर हिस्से से असाधारण योगदान देने वाले लोगों को चुना गया और आजादी के बाद पहली बार 10 जिलों के लोगों को इन पुरस्कारों के लिए चुना गया। 

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Padma awards: 10 districts of winners featuring for first time
पद्म पुरस्कार - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। इन पुरस्कारों के लिए देश के हर कोने से विजेताओं को चुना गया है। आजादी के बाद पहली बार दस ऐसे जिलों के लोगों के लिए पद्म पुरस्कार की घोषणा की गई है, जिनका नाम पहले कभी इस सूची में नहीं आया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 
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39 हजार नामांकन, 131 का चयन
उन्होंने बताया कि सरकार ने 39 हजार से अधिक नामांकनों में से 131 का पद्म पुरस्कारों के लिए चयन किया है, जिनका मूल्यांकन कई दौर की गहन, सख्त और वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। इस प्रक्रिया में व्यापक परामर्श और जांच पड़ताल शामिल थी। 
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10 जिलों को पहली बार सम्मान
  • 2026 के पद्म पुरस्कार में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों का प्रतिनिधित्व शामिल किया गया।
  • 10 जिलों के लोगों को आजादी के बाद पहली बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
  • इन जिलों में मांड्या (कर्नाटक), बैतूल (मध्य प्रदेश), परभणी (महाराष्ट्र), बागेश्वर (उत्तराखंड), रंगा रेड्डी (तेलंगाना), दक्षिण दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल), नुआपड़ा (ओडिशा), दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), एलुरु (आंध्र प्रदेश) और डीग (राजस्थान) शामिल हैं।
  • पद्म पुरस्कार अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गोलपाड़ा, इंफाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, नुआपड़ा, पूर्व बर्धमान और श्रीगंगानगर जैसे जिलों तक पहुंच रहे हैं।

दलगत राजनीति की सीमाओं से ऊपर उठकर नेतृत्व का सम्मान
अधिकारी ने कहा कि वरिष्ठ वाम नेता वीएस अच्युतानंदन को पद्म विभूषण और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिया जाना यह दिखाता है कि मोदी सरकार राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर नेतृत्व को सम्मान देने की नीति पर काम कर रही है। बीते 12 वर्षों में 18 से अधिक राजनीतिक दलों और 22 राज्यों के नेताओं को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं।


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उन्होंने बताया कि 'अष्टलक्ष्मी' कहे जाने वाले पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भी अभूतपूर्व सम्मान मिला है। पिछले 12 वर्षों में दिए गए कुल पद्म पुरस्कारों में से 40 प्रतिशत से अधिक इन्हीं राज्यों को मिले हैं। पुरस्कार पाने वालों में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं, जिनमें दलित और वंचित समुदायों से आने वाले लोग भी हैं। यह  'सबका साथ, सबका विकास' की भावना को दर्शाता है। 

गुमनाम नायकों और प्रेरणादायी महिलाओं को भी पद्म सम्मान
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आम भारतीयों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस साल के पद्म पुरस्कारों में देशभर के गुमनाम नायकों को जगह दी गई है। इस वर्ष प्रेरणादायी 19 महिलाओं को भी पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इनमें तेजाब हमले की पीड़िता से संगीत विदुषी बनीं और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाली मंगला कपूर और लगभग 50 वर्षों तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देने वाली नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ अर्मिडा फर्नांडिस शामिल हैं, जिन्होंने एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित किया।



 
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