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क्या मानसून सत्र में पारित होगा संशोधन विधेयक?: चिदंबरम ने बताया BJP का प्लान, इंडिया गुट से है कनेक्शन
Wed, 15 Jul 2026 12:49 AM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:49 AM IST
सार
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने दावा किया है कि भाजपा 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए एनसीपी (एसपी) और द्रमुक का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दोनों दलों से राज्यों के अधिकारों के लिए इस विधेयक का विरोध करने को कहा।
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पी. चिदंबरम, नेता कांग्रेस
- फोटो : ANI
विस्तार
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने मंगलवार को दावा किया कि भाजपा आगामी मानसून सत्र में 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए भाजपा एनसीपी (एसपी) और द्रमुक (DMK) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। चिदंबरम ने इन दोनों क्षेत्रीय दलों से इस विधेयक का समर्थन न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस विफल विधेयक के नए संस्करण का समर्थन करना इन दलों के अपने विवेक के साथ विश्वासघात होगा।
विधेयक का असली उद्देश्य
चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा उस 131वें संविधान संशोधन विधेयक को वापस लाने की योजना बना रही है जो अप्रैल 2026 में संसद के पिछले सत्र में विफल हो गया था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना बताया गया था। लेकिन इसका असली उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और संभावित रूप से उनके अनुचित बदलाव (गेरीमैंडरिंग) का रास्ता साफ करना है।
नए विधेयक की जरूरत नहीं
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान में 106वें संशोधन अधिनियम के तहत पहले ही लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान किया जा चुका है। इसलिए महिलाओं को आरक्षण देने के लिए किसी नए विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी को विभाजित करने के बाद अब भाजपा इस विफल विधेयक के नए संस्करण के लिए एनसीपी (एसपी) और द्रमुक को लुभाने में जुटी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनसीपी (एसपी) और द्रमुक इस विफल विधेयक के वास्तविक उद्देश्य को अच्छी तरह समझते हैं और वे भविष्य में भी अपने रुख पर अडिग रहेंगे।
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ये भी पढ़ें: मुंबई में FDA की कार्रवाई: खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर तीन होटलों के लाइसेंस निलंबित, जांच में मिली क्या खामियां?
राज्यों के अधिकारों पर खतरा
चिदंबरम ने चेतावनी दी कि वर्तमान फॉर्मूले के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन उन राज्यों के अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय करेगा जिन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का ईमानदारी से पालन किया और अपनी जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया। उन्होंने कहा कि आक्रामक भाजपा के खिलाफ राज्यों के अधिकारों की मजबूती से रक्षा की जानी चाहिए। सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक को लाने की तैयारी में है। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन शुरू करने का प्रस्ताव है।
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विधेयक का असली उद्देश्य
चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा उस 131वें संविधान संशोधन विधेयक को वापस लाने की योजना बना रही है जो अप्रैल 2026 में संसद के पिछले सत्र में विफल हो गया था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना बताया गया था। लेकिन इसका असली उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और संभावित रूप से उनके अनुचित बदलाव (गेरीमैंडरिंग) का रास्ता साफ करना है।
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नए विधेयक की जरूरत नहीं
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान में 106वें संशोधन अधिनियम के तहत पहले ही लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान किया जा चुका है। इसलिए महिलाओं को आरक्षण देने के लिए किसी नए विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी को विभाजित करने के बाद अब भाजपा इस विफल विधेयक के नए संस्करण के लिए एनसीपी (एसपी) और द्रमुक को लुभाने में जुटी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनसीपी (एसपी) और द्रमुक इस विफल विधेयक के वास्तविक उद्देश्य को अच्छी तरह समझते हैं और वे भविष्य में भी अपने रुख पर अडिग रहेंगे।
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राज्यों के अधिकारों पर खतरा
चिदंबरम ने चेतावनी दी कि वर्तमान फॉर्मूले के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन उन राज्यों के अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय करेगा जिन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का ईमानदारी से पालन किया और अपनी जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया। उन्होंने कहा कि आक्रामक भाजपा के खिलाफ राज्यों के अधिकारों की मजबूती से रक्षा की जानी चाहिए। सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक को लाने की तैयारी में है। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन शुरू करने का प्रस्ताव है।