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रेलवे: कश्मीर के सेब-केसर का देश के बड़े बाजारों तक पहुंचना होगा आसान, इस प्लान से कारोबारियों को होगा फायदा
Tue, 20 Oct 2026 06:07 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 20 Oct 2026 06:07 PM IST
सार
अनंतनाग, पंपोर और बड़ी ब्राह्मणा में प्रस्तावित इन तीनों परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में भंडारण और माल ढुलाई का ढांचा मजबूत होगा। इससे कृषि उत्पादों को उत्पादन केंद्रों से रेलवे नेटवर्क के जरिये बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकेगा।
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श्रीनगर रेल यात्रा
- फोटो : Instagram
विस्तार
कश्मीर में सेब और केसर के भंडारण और ढुलाई की सुविधा बेहतर करने के लिए भारतीय रेलवे अहम कदम उठाने जा रहा है। उत्तर रेलवे ने अनंतनाग और पंपोर रेलवे स्टेशनों के पास वेयरहाउस बनाने के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही, माल की लोडिंग और अनलोडिंग का खर्च घटाने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक, जम्मू रेलवे मंडल ने रेलवे की कार्गो रिलेटेड फैसिलिटी (सीआरएफ) नीति के तहत इन वेयरहाउस को विकसित करने और उनका संचालन करने के लिए निजी निवेशकों से आवेदन मांगे हैं। इन्हें 25 साल की लीज पर दिया जाएगा। टेंडर भारतीय रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (आईआरईपीएस) पोर्टल पर उपलब्ध हैं।प्रस्तावित वेयरहाउस से कश्मीर के बागवानी और कृषि कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
रेलवे के इस कदम से सेब उत्पादकों और केसर कारोबारियों को रेलवे स्टेशन के पास भंडारण की सुविधा मिलेगी। इससे खेतों से उपज को गोदाम तक और वहां से मालगाड़ियों तक पहुंचाने में लगने वाला समय और खर्च कम हो सकता है। बेहतर भंडारण और माल संभालने की सुविधा से जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
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जम्मू के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल के मुताबिक, इस पहल से माल ढुलाई मजबूत होगी और जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के भंडारण की सुविधा बेहतर होगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जम्मू रेलवे मंडल ने 13 अक्टूबर को जम्मू शहर के पास बड़ी ब्राह्मणा में आधुनिक वेयरहाउस और भंडारण सुविधा विकसित करने के लिए भी टेंडर आमंत्रित किए थे। अधिकारियों के मुताबिक, मंडल में सीआरएफ नीति के तहत यह अपनी तरह की पहली परियोजना थी। अनंतनाग, पंपोर और बड़ी ब्राह्मणा में प्रस्तावित इन तीनों परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में भंडारण और माल ढुलाई का ढांचा मजबूत होगा। इससे कृषि उत्पादों को उत्पादन केंद्रों से रेलवे नेटवर्क के जरिये बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकेगा। रेलवे से जुड़ी भंडारण सुविधाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देकर उत्तरी रेलवे क्षेत्र की माल ढुलाई व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहता है।
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जानकारी के मुताबिक, जम्मू रेलवे मंडल ने रेलवे की कार्गो रिलेटेड फैसिलिटी (सीआरएफ) नीति के तहत इन वेयरहाउस को विकसित करने और उनका संचालन करने के लिए निजी निवेशकों से आवेदन मांगे हैं। इन्हें 25 साल की लीज पर दिया जाएगा। टेंडर भारतीय रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (आईआरईपीएस) पोर्टल पर उपलब्ध हैं।प्रस्तावित वेयरहाउस से कश्मीर के बागवानी और कृषि कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
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रेलवे के इस कदम से सेब उत्पादकों और केसर कारोबारियों को रेलवे स्टेशन के पास भंडारण की सुविधा मिलेगी। इससे खेतों से उपज को गोदाम तक और वहां से मालगाड़ियों तक पहुंचाने में लगने वाला समय और खर्च कम हो सकता है। बेहतर भंडारण और माल संभालने की सुविधा से जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
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जम्मू के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल के मुताबिक, इस पहल से माल ढुलाई मजबूत होगी और जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के भंडारण की सुविधा बेहतर होगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जम्मू रेलवे मंडल ने 13 अक्टूबर को जम्मू शहर के पास बड़ी ब्राह्मणा में आधुनिक वेयरहाउस और भंडारण सुविधा विकसित करने के लिए भी टेंडर आमंत्रित किए थे। अधिकारियों के मुताबिक, मंडल में सीआरएफ नीति के तहत यह अपनी तरह की पहली परियोजना थी। अनंतनाग, पंपोर और बड़ी ब्राह्मणा में प्रस्तावित इन तीनों परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में भंडारण और माल ढुलाई का ढांचा मजबूत होगा। इससे कृषि उत्पादों को उत्पादन केंद्रों से रेलवे नेटवर्क के जरिये बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकेगा। रेलवे से जुड़ी भंडारण सुविधाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देकर उत्तरी रेलवे क्षेत्र की माल ढुलाई व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहता है।