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पक्षी प्रेमियों की पहली पसंद चंबल को ईको टूरिज्म के रूप में किया जाएगा विकसित

Sun, 04 Dec 2016 01:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 04 Dec 2016 01:36 AM IST
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overment formulates plan to devlope chamabal safari bird as eco tourism
देश के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय बर्ड फेस्टिवल के दूसरे दिन चंबल सफारी जरार में संकट में पड़ी तमाम चिड़ियों की चंबल में मौजूदगी को सुखद बताते हुए उनके संरक्षण पर मंथन किया गया। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि चिड़ियों के संकट में पड़ने के कारण जानने के साथ ही उन्हें बचाने के उपाय खोजने होंगे। दुनिया भर के बर्ड वाचर के लिए पहली पसंद बनी चंबल को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जायेगा। 
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यूपी के प्रबंध वन निदेशक एसके उपाध्याय ने बताया कि बर्ड वाचर और विशेषज्ञों ने चंबल में दिलचस्पी दिखायी है। अब चंबल को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जायेगा। आगरा का ताजमहल और इटावा की लायन सफारी आने वाले पर्यटक यूपी के ग्रीन पथ के जरिए चंबल की चिड़ियों, घड़ियालों मगरमच्छों और डाल्फिन को देखने आएंगे। इसके लिए संसाधन जुटाए जाएंगे। 
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चंबल अपने आप में पर्यटकों की पहली पसंद बन गयी है

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वहीं प्रमुख वन संरक्षक उमेन्द्र शर्मा ने बताया कि बर्ड वाचर की दिलचस्पी से चंबल अपने आप में पर्यटकों की पहली पसंद बन गयी है। अब यहां ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर फोकस रहेगा। वहीं, शनिवार को भी बर्ड फेस्टिवल में दुनिया में संकट में पड़ी चिड़ियों के संरक्षण पर मंथन जारी रहा। श्रीलंका से आये लंदन बर्ड क्लब के सचिव जेहान डिसिल्वा ने कहा कि उन्होंने इंडोनेशिया, अफ्रीका, सूडान में चिड़ियों पर शोध किया है। चंबल की वादियां चिड़ियों के लिए मुफीद है। 

म्यांमार से आये थ्री दाम्वी अंग और नुओनुओ अंग ने बताया कि संकटग्रस्त पक्षियों के संरक्षण के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों को काम करना होगा। बर्ड फेस्टिवल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इंग्लैंड के टिम कारोल ने कहा कि सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत चंबल चिड़ियों से संबद्ध है। यह देखकर अच्छा लगा। निखिल दिवासर ने बताया कि पक्षियों के संरक्षण और उनके संकट में पड़ने की वजह और बचाने के उपायों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध रखे हैं। उनके सुझावों पर अमल के लिए कार्ययोजना बनेगी।

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