{"_id":"64c01f2cf30b721cea067277","slug":"over-five-crore-mgnrega-job-cards-deleted-in-2022-23-govt-reply-in-lok-sabha-parl-monsoon-session-2023-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Parliament: एक साल में रद्द किए गए पांच करोड़ से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड, पीएम-किसान के लाभार्थी हुए 8.11 करोड़","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Parliament: एक साल में रद्द किए गए पांच करोड़ से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड, पीएम-किसान के लाभार्थी हुए 8.11 करोड़
Wed, 26 Jul 2023 01:10 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Wed, 26 Jul 2023 01:10 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि फर्जीवाड़ा, डुप्लिकेट जॉब कार्ड, काम करने की इच्छा नहीं होना, परिवार के ग्राम पंचायत से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाने या मृत्यु जैसे कारणों से नाम हटाए गए हैं।
विज्ञापन
मनरेगा (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
वित्त वर्ष 2022-23 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत पांच करोड़ से अधिक जॉब कार्ड रद्द कर दिए गए, जो 2021-22 की तुलना से 247 प्रतिशत अधिक है। एक लिखित जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में यह जानकारी दी।
विज्ञापन
गिरिराज सिंह ने कहा कि फर्जीवाड़ा, डुप्लिकेट जॉब कार्ड, काम करने की इच्छा नहीं होना, परिवार के ग्राम पंचायत से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाने या मृत्यु जैसे कारणों से नाम हटाए गए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में 1,49,51,247 श्रमिकों के मनरेगा जॉब कार्ड रद्द किए गए थे, जबकि 2022-23 में यह संख्या 5,18,91,168 थी। सबसे अधिक कार्ड पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से रद्द किए गए।
विज्ञापन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में पश्चिम बंगाल में 1,57,309 मनरेगा जॉब कार्ड रद्द किए गए, जबकि वर्ष 2022-23 में 83,36,115 जॉब कार्ड रद्द किए गए। वहीं, आंध्र प्रदेश में 2021-22 में 6,25,514 जॉब कार्ड और 2022-23 में 78,05,569 मनरेगा कार्ड रद्द किए गए। इसी तरह, तेलंगाना में 2021-22 में 61,278 जॉब कार्ड रद्द किए गए, जबकि 2022-23 में 17,32,936 कार्ड डिलीट किए गए। गुजरात ने 2021-22 में 1,43,202 मनरेगा जॉब कार्ड और 2022-23 में 4,30,404 जॉब कार्ड रद्द किए।
विज्ञापन
पीएम-किसान के लाभार्थी हुए 8.11 करोड़, 2019 में 3.16 करोड़ थे
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में मार्च 2023 तक लाभार्थियों की संख्या 8.11 करोड़ हो चुकी थी। दिसंबर 2018 से मार्च 2019 के इस योजना के पहले चरण में 3.16 करोड़ किसान लाभार्थी थे। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि योजना में पात्र किसानों को सालाना 3 किस्तों में 6 हजार रुपए दिए जाते हैं।
8.75 लाख से अधिक एचयूएफ ने दाखिल किया आयकर रिटर्न: वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि 2022-23 में 8.75 लाख से अधिक हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) ने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते हुए 3,803 करोड़ रुपये की कटौती का दावा किया। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक जवाब में पिछले पांच वर्षों के दौरान कर लाभ (आयकर अधिनियम के तहत कटौती के रूप में) का लाभ उठाने वाले हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) की संख्या का विवरण दिया। इस सवाल पर कि क्या सरकार ने देश में एचयूएफ को कर लाभ पर समान नागरिक संहिता के प्रभाव का आकलन किया है, मंत्री ने कहा कि ऐसा कोई आकलन नहीं किया गया है क्योंकि वर्तमान में ऐसी कोई संहिता लागू नहीं है।
379 दवाएं मिलीं नकली, 2.5 हजार घटिया स्तर की
देश में अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक हुई जांच में 379 दवाएं नकली मिली हैं। वहीं 2,545 हजार दवाएं घटिया स्तर की पाई गई हैं। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि इस जांच में 88,844 दवाओं के सैंपल लिए गए थे। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि इसी अवधि में नकली व घटिया स्तर की दवाएं बनाने और वितरित व विक्रय करने वालों पर 592 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने विभिन्न राज्यों के औषधि नियंत्रकों से ली गई जानकारी के आधार पर बताया कि 2020-21 में 84,874 दवाओं के नमूनों की जांच हुई थी।
घटिया कफ सिरप मामले में तीन कंपनियों के लाइसेंस रद्द
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार ने संसद में कहा कि भारत से निर्यात की गई घटिया कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही क्यूपी फार्माकेम, मैडेन फार्मा और मैरियन बायोटेक के दवा निर्माण लाइसेंस को भी रद्द किया गया है।
सीवर व सेप्टिक टैंक साफ करते हुए पांच साल में 339 लोगों की मौत
देश में पिछले 5 साल में सीवर-सेप्टिक टैंक साफ करते 339 लोगों की मौत हुई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने लोकसभा में बताया कि 2023 में 9, 2022 में 66, 2021 में 58, 2020 में 22, 2019 में 117 और 2018 में 67 लोगों की मौत हुई।