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600 से ज्यादा बाल देखभाल केंद्रों को मिला प्रति बच्चा छह लाख तक का विदेशी चंदा, फंड में अनियमितता की आशंका

Thu, 19 Nov 2020 02:17 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 19 Nov 2020 02:17 AM IST
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Over 600 NGO run child care homes received foreign funds up to 6 lakh per child
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

देश में 600 से ज्यादा गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ऐसे हैं, जिन्हें विदेशों से सालभर में हर बच्चे की देखरेख के लिए छह लाख तक रुपये मिले हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के पांच राज्यों के एनजीओ द्वारा संचालित 638 चाइल्ड केयर संस्थानों में रहने वाले 28,000 बच्चों की देखभाल के लिए 2018-19 में विदेशों से औसतन 2.12 लाख से लेकर 6.60 लाख रुपये मिले। आयोग को विदेश से प्रति बच्चे के हिसाब से मिलने वाली रकम में अनियमितता की आशंका है।

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आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा, बाल संरक्षण योजना के मुताबिक हर बच्चे पर 60,000 रुपये सालाना खर्च किया जाता है। ऐसे में बड़ी रकम एनजीओ द्वारा इकट्ठी की जा रही है। हम देशभर में इसके लिए अभियान चलाएंगे और उसी के मुताबिक जांच और कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्रालय के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम की वेबसाइट पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के इन संस्थानों से से 2018-19 के आंकडे़ जुटाए गए।
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इसके मुताबिक, आंध्र प्रदेश में 145 चाइल्ड केयर संस्थानों को 6,202 बच्चों के लिए 409 करोड़ मिले। जो हर बच्चे पर 6.6 लाख रुपये सालाना खर्च बैठता है। तेलंगाना में 67 ऐसे संस्थानों को 3,735 बच्चों के लिए 145 करोड़ रुपये मिले। हर बच्चे के हिसाब से 3.88 लाख रुपये खर्च आया। केरल में 107 संस्थानों को 4,242 बच्चों के लिए 85.39 करोड़ मिले। यह रकम प्रति बच्चे के हिसाब से सालाना खर्च 2.01 लाख रुपये आई। कर्नाटक में 45 संस्थानों को 3,111 बच्चों के लिए 66.62 करोड़ मिले। जो प्रति बच्चे के हिसाब से 2.14 लाख खर्च बैठता है। वहीं, तमिलनाडु में 247 ऐसे संस्थानों ने 1,1702 बच्चों के लिए 248 करोड़ रुपये मिले। यह रकम हर बच्चे के हिसाब से 2.12 लाख रुपये बैठती है।
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पांच राज्यों में संचालित हो रहे 638 ऐसे एनजीओ संचालित बाल देखभाल केंद्रों की सूचना के रैंडम विश्लेषण में एनसीपीसीआर ने पाया कि 2018-19 में उन्होंने जो औसत राशि प्राप्त की वह प्रति बच्चा 2.12 लाख  रुपये से 6.60 लाख रुपये के बीच थी। एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो के अनुसार यह जानकारी सामने आने के बाद अब आयोग ऐसे एनजीओ की विदेशी फंडिंग को लेकर पूरे देश में जांच की योजना बना रहा है।

आयोग ने कहा कि अब वह इन गैर-सरकारी संगठनों के विदेशी चंदे और खर्च का पता लगाने के लिये देशभर में कवायद शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कवायद के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय की विदेशी चंदा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। बाल संरक्षण योजना के अनुसार सभी आवर्ती खर्चों को मिलाकर हर बच्चे पर प्रतिवर्ष 60 हजार रुपये खर्च होने चाहिए।

कानूनगो ने कहा, 'एनजीओ द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में धन एकत्रित किए जाने से कोष के संभावित गबन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हम देशव्यापी कवायद शुरू करके उसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे।' आयोग के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाल देखभाल केंद्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।


किस राज्य में किस एनजीओ संचालित केंद्र को मिले कितने रुपये

  • आंध्र प्रदेश में एनजीओ संचालित 145 बाल गृहों को 6,202 बच्चों के लिए 409 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इस लिहाज से एक बच्चे पर प्रतिवर्ष 6.6 लाख रुपये खर्च होने चाहिए।
  • तेलंगाना में ऐसे 67 केंद्रों को 3,735 बच्चों के लिए 145 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसके तहत एक बच्चे पर 3.88 लाख रुपये खर्च होने चाहिए।
  • केरल में 107 केंद्रों को 4,242 बच्चों के लिए 85.39 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं, जिसका मतलब है कि एक बच्चे पर 2.01 लाख रुपये खर्च होने चाहिए।
  • कर्नाटक में 45 केंद्रों को 3,111 बच्चों के लिए 66.62 करोड़ रुपये मिले हैं। एक बच्चे पर 2.14 लाख रुपये खर्च होने चाहिए।
  • तमिलनाडु में 274 केंद्रों को 1,172 बच्चों के लिए 248 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसके अनुसार एक बच्चे पर 2.12 लाख रुपये खर्च होने चाहिए।
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