फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Over 57,000 ha degraded forest land identified for Green Credit Programme In India News In Hindi

Green Credit: भारत के ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से बढ़ेगा वन क्षेत्र,17 राज्यों में 57,700 हेक्टेयर भूमि चिह्नित

Wed, 12 Feb 2025 04:26 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 12 Feb 2025 04:26 PM IST
सार

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के माध्यम से केंद्र सरकार भारत में वन क्षेत्र को बढ़ाने पर जोर दे रही है। हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ो की माने तो अब तक 17 राज्यों ने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के तहत 57,700 हेक्टेयर से अधिक बंजर वन भूमि पर वृक्षारोपण के लिए जमीन चिह्नित की है।

विज्ञापन
Over 57,000 ha degraded forest land identified for Green Credit Programme In India News In Hindi
ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम - फोटो : iStock

विस्तार

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 17 राज्यों ने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के तहत 57,700 हेक्टेयर से अधिक बंजर वन भूमि पर वृक्षारोपण के लिए जमीन चिह्नित की है। यह कार्यक्रम स्वैच्छिक रूप से पर्यावरणीय कार्य करने वालों को पुरस्कृत करता है, जिसमें व्यक्ति, समुदाय और निजी क्षेत्र भी शामिल हैं। 
विज्ञापन


मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा जमीन
देश में सबसे बडा वन क्षेत्र वाला राज्य मध्यप्रदेश ने दो फरवरी तक 15,200 हेक्टेयर से अधिक बंजर वन भूमि चिह्नित की है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। इसके बाद आंध्र प्रदेश ने 11,361 हेक्टेयर, गुजरात ने 6,760 हेक्टेयर, झारखंड ने 5,648 हेक्टेयर, तमिलनाडु ने 4,708 हेक्टेयर और बिहार ने 4,108 हेक्टेयर भूमि पंजीकृत की है।
विज्ञापन


2023 में शुरू किया गया था ये कार्यक्रम
बता दें कि यह ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम अक्तूबर 2023 में शुरू किया गया था। इसके तहत सिर्फ दुर्लभ वन भूमि की पारिस्थितिकी को फिर से बहाल करने के लिए वृक्षारोपण किया जा रहा है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था क्षरित भूमि, जैसे खुले जंगल, झाड़ीदार भूमि, बंजर भूमि और जलग्रहण क्षेत्र पर वृक्षारोपण कर सकती है और ग्रीन क्रेडिट कमा सकती है, जिसे व्यापार किया जा सकता है या फिर कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआई) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यावरण विशेषज्ञ कर रहे विरोध
साथ ही यह ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम वन भूमि के डायवर्जन के मामले में वृक्षारोपन के अनुपालन को पूरा करने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि, कुछ पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस योजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह वृक्षारोपण प्राथमिक वन आवरण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का सही प्रतिस्थापन नहीं हो सकता, जो वन्यजीवों, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

शुरुआत में पर्यावरण मंत्रालय का तर्क
गौरतलब है कि इसकी शुरुआत में पर्यावरण मंत्रालय ने कहा था कि 'कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए एक चरणबद्ध और पुनरावृत्ति दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। शुरुआती (चरण) में सेक्टरों से दो से तीन गतिविधियां जैसे कार्यक्रम को डिजाइन और पायलट करने पर विचार किया जाएगा और फिर बाद के चरणों में चयनित क्षेत्रों से और अधिक गतिविधियों को जोड़ा जाएगा।



साथ ही अधिसूचना में कहा गया था कि ग्रीन क्रेडिट कई क्षेत्रों और संस्थाओं से उत्पन्न होंगे, जिनमें आम लोगों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों, वानिकी उद्यमों और टिकाऊ कृषि उद्यमों से लेकर शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों, निजी क्षेत्रों, उद्योगों और संगठनों को जोड़ा जा रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed