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Hindi News ›   India News ›   Oscars 2023: Durga has a same story like 'Raghu' elephant from the Oscar-winning film the Elephant Whisperers

Oscars 2023: ऑस्कर विजेता फिल्म 'द एलिफेंट व्हिस्पर्स' के 'रघु' हाथी जैसी ही है दुधवा की 'दुर्गा' की कहानी

Mon, 13 Mar 2023 01:54 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 13 Mar 2023 01:54 PM IST
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सार
Oscars 2023: भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रमेश पांडे कहते हैं कि 2018 में नजीबाबाद के जंगलों में बहुत कम दिन का एक हाथी का बच्चा अपने झुंड से बिछड़ गया था। उसे तराई के जंगलों में लेकर आया गया। फिर यहां के एलीफेंट कैंप में पालने पोसने की जिम्मेदारी के साथ आगे की तैयारियां शुरू की गईं...
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Oscars 2023: Durga has a same story like 'Raghu' elephant from the Oscar-winning film the Elephant Whisperers
Oscars 2023- the elephant whisperers - फोटो : Agency

विस्तार

लॉस एंजिल्स के अकादमी अवार्ड कार्यक्रम में शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में अपने देश की 'द एलीफेंट व्हिस्पर्स' ने ऑस्कर जीत का पूरी दुनिया में धूम मचा दी। 'द एलीफेंट व्हिस्पर्स' में हाथी के झुंड से बिछड़े हुए एक हाथी के बच्चे 'रघु' की एक महावत के साथ मानवीय संवेदनाओं की कहानी है। ठीक इसी तरह की एक कहानी तराई के जंगलों में बसे दुधवा नेशनल पार्क में दुर्गा हाथी की भी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से चलाए जाने वाले 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' के आंकड़ों में भी ऐसी कई मानवीय पहलुओं से सराबोर हाथी, जंगल और महावतों की कहानियां हैं। हाथियों और महावतों की मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने गज गौरव अवार्ड भी शुरू किया है। इसके अलावा महावतों को प्रशिक्षण देने के लिए कई तरह के कोर्स भी शुरू किए गए हैं।

महावतों की बड़ी जिम्मेदारी

ऑस्कर अवार्ड जीतने वाली द एलीफेंट व्हिस्पर्स जैसी कहानी उत्तर प्रदेश के तराई में स्थित लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क की भी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से चलाए जाने वाले प्रोजेक्ट एलीफेंट के चीफ और भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रमेश पांडे कहते हैं कि 2018 में नजीबाबाद के जंगलों में बहुत कम दिन का एक हाथी का बच्चा अपने झुंड से बिछड़ गया था। उसे तराई के जंगलों में लेकर आया गया। फिर यहां के एलीफेंट कैंप में पालने पोसने की जिम्मेदारी के साथ आगे की तैयारियां शुरू की गईं। रमेश पांडे कहते हैं कि वह उस वक्त दुधवा नेशनल पार्क में निदेशक के तौर पर तैनात थे। उनकी पूरी टीम और महावत ने दुर्गा हाथी के बच्चे को पालना पोसना शुरू किया। वह कहते हैं कि जब हाथी का बच्चा झुंड से अलग हो जाता है, तो उसको सब कुछ एक मां की तरह सिखाना पड़ता है। दुर्गा को भी एक हथिनी के साथ रखा गया ताकि वह खाने से लेकर अपनी दूसरी एक्टिविटीज को बेहतर तरीके से समझ सके। इस पूरी प्रक्रिया में महावतों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। वह कहते हैं कि आज दुर्गा पांच साल की है। वह दुधवा के कैंप में सबसे शरारती है और बहुत एक्टिव रहती है।

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आईएफएस रमेश पांडे कहते हैं कि द एलीफेंट व्हिस्पर्स को ऑस्कर अवार्ड मिलने के साथ देश में हाथियों और महावतों के बीच आपसी मोहब्बत और बॉन्डिंग की असल कहानी पूरी दुनिया के सामने आई है। वह कहते हैं कि दरअसल लोगों को यही दिखता है कि महावत हाथी के ऊपर वार करता है और चैन से बांधकर रखता है। जबकि हकीकत का एक दूसरा पहलू भी है जो इस फिल्म के माध्यम से सामने आया है। वह कहते हैं कि महावत और हाथियों के बीच जो रिश्ता होता है वह एक परिवार की तरह होता है। इसी रिश्ते को मजबूत करते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने गज गौरव अवार्ड भी शुरू किया है। रमेश पांडे कहते हैं कि पहला गज गौरव अवॉर्ड महावत और उनकी कम्युनिटी को ही मिला है। केरल के महावत के अलावा आसाम की महावत कम्युनिटी समेत अन्नामलाई की महावत कम्युनिटी को भी यह अवार्ड दिया गया है।

वाइल्ड एलीफेंट की संख्या 30 हजार के करीब

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त पूरे देश में वाइल्ड एलीफेंट की संख्या 30 हजार के करीब है। देश के अलग-अलग जंगलों और एलीफेंट रिजर्व फॉरेस्ट एरियाज में मौजूद है। जबकि वन विभाग, मंदिरों और व्यक्तिगत लोगों के अलावा ट्रस्ट समेत अन्य जगहों पर भी 27 हजार हाथी हैं। इनमें से 40 फ़ीसदी हाथी वन विभाग के पास हैं। इन हाथियों से वन विभाग अपने अलग-अलग घने जंगलों वाले क्षेत्रों में पेट्रोलिंग करते हैं। जबकि कुछ हाथी रेस्क्यू सेंटर के अलावा वन विभाग के कैंप में भी होते। प्रोजेक्ट एलीफेंट के चीफ रमेश पांडे कहते हैं कि जो हाथी वन विभाग के साथ हैं उनकी एक तरह से सरकारी तौर पर सेवाएं ली जाती हैं। इन हाथियों को 60 साल की या अधिक बुजुर्ग होने पर रिटायर कर दिया जाता है। प्रोजेक्ट एलिफेंट के माध्यम से इन्हीं हाथियों के परिवार को न सिर्फ बचाने बल्कि बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रमेश पांडे कहते हैं कि प्रोजेक्ट एलीफेंट के माध्यम से हाथी और इंसानों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनकी कोशिश यही है कि लोग जानवरों से बुरा बर्ताव ना करें।

हाल में ही दुधवा टाइगर रिजर्व को एलीफेंट टाइगर रिजर्व का भी दर्जा मिला है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश में एलीफेंट टाइगर रिजर्व को और बढ़ाया जाएगा। ताकि हाथियों के कुनबे को प्रोटेक्ट करने के साथ-साथ बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के सफल प्रयास किए जा सकें। इसी कड़ी में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों की देखरेख करने वाले महावतों की एक विशेष ट्रेनिंग भी शुरू की है। ताकि जो रिश्ता हाथी और महावत के बीच का बना है, उसे पुराने तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से भी आगे बढ़ाया जा सके। वन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक महावत कम्युनिटी को हर तरीके से आगे बढ़ाने और हाथियों की देखरेख करने के लिए पारंगत किया जा रहा है।

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इस वक्त देश के 30 हजार जंगली हाथियों को छोड़ दिया जाए, तो 27 हजार हाथी ऐसे हैं जिनके साथ एक-एक महावत जुड़ा हुआ है। यानी कि 27000 महावत इस वक्त हाथियों की देखरेख में लगे हुए हैं। वन विभाग के अधिकारी अरुणेश सिंह बताते हैं कि जानवरों को पालने वालों के साथ जानवरों के भावनात्मक तौर पर रिश्ते जुड़ जाते हैं। उनका कहना है कि दक्षिण के रघु और नॉर्थ की दुर्गा जैसे हाथियों की कहानियों से हमारे देश के जंगल भरे पड़े हैं। सिर्फ हाथी की नहीं बल्कि और जानवर जो अपने परिवारों से बिछड़ जाते हैं या किसी तरह से परेशान होते हैं, तो उन्हें पालने पोसने का काम वन विभाग और उनके कर्मचारी लगातार करते हैं। सिंह के मुताबिक देश के जितने भी रिजर्व फॉरेस्ट हैं, सब जगह इस तरीके के कैंप बने हुए हैं। जहां पर जानवरों की ऐसी ही अनोखी कहानियां ढूंढे मिल जाएंगी।

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