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High Court: छात्रा की मौत मामले में 10 लाख रुपये का मुआवजा दे सरकार, ओडिशा हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Thu, 11 Aug 2022 11:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 11 Aug 2022 11:16 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में न्यायमूर्ति आर के पटनायक भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि छोटी बच्ची की मौत पूरी तरह से अनावश्यक और टाली जा सकने वाली थी। मौत की जिम्मेदारी निश्चित रूप से राज्य की है।

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Orissa High Court orders Odisha govt to pay rupees 10-lakh compensation for schoolgirl death
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

ओडिशा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए सात साल की बच्ची की मौत के मामले में निर्देश दिया कि वह उसके पिता को 10 लाख रुपये का मुआवजा दे। अदालत ने कहा कि नौ साल पहले क्योंझर जिले में स्कूल की दीवार गिरने से हुई उसकी मौत को टाला जा सकता था। अदालत ने ये भी कहा है कि मुआवजे की राशि बच्ची के पिता को आठ सप्ताह के भीतर दी जाए। 

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अदालत ने की टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि लड़की की मौत की जिम्मेदारी निश्चित रूप से राज्य सरकार की है। अदालत ने कहा कि स्कूल परिसर में रसोई बनाने के लिए गलत सामग्री का प्रयोग किया जाना, अधिकारियों की लापरवाही थी। जोकि जांच के दौरान पहले ही तय हो चुका है। अदालत ने इस मामले में नौ पेज में अपना फैसला सुनाया है। 
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मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में न्यायमूर्ति आर के पटनायक भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि छोटी बच्ची की मौत पूरी तरह से अनावश्यक और टाली जा सकने वाली थी। मौत की जिम्मेदारी निश्चित रूप से राज्य की है। मुआवजे का आदेश देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा पहले ही सोरेन को दी गई राशि में कटौती की जा सकती है और शेष राशि उन्हें आठ सप्ताह के भीतर दी जानी चाहिए।
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क्या था मामला
जानकारी के मुताबिक, मृतक गरायमती सोरेन कटक से करीब 100 किलोमीटर दूर घासीपुरा प्रखंड के कोल्हाबेड़ा आश्रम स्कूल छात्रावास की रहने वाली थीं। 3 अक्टूबर 2013 को एक नवनिर्मित किचन शेड की दीवार गिर गई। जिसमें कक्षा I की छात्रा गरायमती सोरेन मलबे के नीचे दब गई और उसकी मौत हो गई। बाद में जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि दीवार का निर्माण बिना उचित नींव के अवैध रूप से किया गया था।

बाद में मृतक बच्ची के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनको पहले 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि के अलावा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी फंड से 10,000 रुपये प्रदान किए गए थे। सोरेन के पिता की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि अगर सभी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन किया जाता तो मौत नहीं होती।

साथ ही अदालत ने जिला कलेक्टरों को बच्चों के साथ होने वाली घातक दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। 


वकील को भारी पड़ गया याचिका डालना
तमिलनाडु के एक वकील को मास्क के खिलाफ याचिका दाखिल करने पर अदालत ने जुर्माना लगा दिया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के आदेश के खिलाफ डाली गई एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज करते हुए यह कार्रवाई की है। एडवोकेट एसवी राममूर्ति ने अपनी याचिका में कहा था कि मास्क पहनने से गलत प्रभाव पड़ता है और लोग आक्सीजन ठीक से नहीं ले पाते हैं। मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति एन. माला ने गुरुवार को वकील के खिलाफ 1000 रुपये का जुर्माना लगा दिया है। 

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