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अध्ययन: इंडोनेशिया में औषधीय पौधे से ऑरंगउटान ने तीन दिन में ठीक की चोट, वैज्ञानिकों ने निगरानी कर लगाया पता

Sun, 05 May 2024 06:22 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 05 May 2024 06:22 AM IST
सार

वन्यजीव अक्सर चोटिल होने के बाद कुछ ऐसे औषधीय पौधों का सेवन करते हैं जो उनके लिए एक खास तरह के एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करते हैं। पहली बार अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक घायल ऑरंगउटान की निगरानी की, जिसने औषधीय पौधे से तीन दिन में ही अपना घाव ठीक कर लिया। 

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Orangutan in Indonesia healed injury in three days with medicinal plant, scientists found out by monitoring
ऑरंगउटान - फोटो : एएनआई

विस्तार

वन्यजीव अक्सर चोटिल होने के बाद कुछ ऐसे औषधीय पौधों का सेवन करते हैं जो उनके लिए एक खास तरह के एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करते हैं। पहली बार अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक घायल ऑरंगउटान की निगरानी की, जिसने औषधीय पौधे से तीन दिन में ही अपना घाव ठीक कर लिया। 

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यह अध्ययन इंडोनेशिया में सुआक बालिंबिंग अनुसंधान स्थल पर किया गया, जहां एक नर सुमात्राण ऑरंगउटान को चोटिल होने के बाद एक खास किस्म के पर्वतारोही पौधे को बार-बार चबाते देखा गया। इस पौधे से निकलने वाला रस उसके चेहरे पर लगी चोट के लिए मरहम का कार्य कर रहा था। बता दें कि सुमात्राण ऑरंगउटान नरवानर हैं, जिन्हें लुप्त प्रजाति में रखा गया है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बिहेवियर (एमपीआई-एबी) की प्रोफेसर इसाबेल लॉमर के मुताबिक, धरती पर मौजूद हजारों प्रजाति के औषधीय पौधों के गुण विज्ञान के पास हैं, लेकिन अभी भी ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिनके बारे में बहुत जानकारियां एकत्रित की जा सकती हैं।  

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प्रो. लॉमर ने बताया कि इस अध्ययन के लिए इंडोनेशिया को इसलिए चुना गया क्योंकि वहां का यह अनुसंधान स्थल एक संरक्षित वर्षावन क्षेत्र है जो लगभग 150 सुमात्राण ऑरंगउटान का घर है। वहीं, दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाए जाने वाले पौधे दर्द निवारक के रूप में जाने जाते हैं। इनमें घाव भरने, सूजन रोकने की क्षमता भी है। 

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ठीक होने के लिए ज्यादा नींद भी ली 
साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन की मुख्य लेखक प्रो. लॉमर ने बताया कि पौधों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में मलेरिया, पेचिश और मधुमेह जैसी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन ऑरंगुटान भी अपने घाव इनसे ठीक कर रहे हैं, वो भी बिना किसी संक्रमण के। दिलचस्प बात यह है कि घायल होने पर जीव ने भी सामान्य से अधिक आराम किया। नींद घाव भरने पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, क्योंकि नींद के दौरान हार्मोन रिलीज, प्रोटीन संश्लेषण और कोशिका विभाजन बढ़ जाता है। 

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