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बंगलूरू: इंदिरा कैंटीन से भूखे लौट रहे लोग, विपक्ष बोला- ये भ्रष्टाचार की रेसिपी

Fri, 13 Oct 2017 09:31 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम Updated Fri, 13 Oct 2017 09:31 AM IST
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Opposition says, Karnataka governments Indira Canteen made recipe for corruption

बंगलूरू में इंदिरा कैंटीन की घोषणा ने लोगों में खुशी की लहर बिखेर दी, लगा कि सब्सिडी के खाने की वजह से अब शहर में कोई भूखा नहीं रहेगा। लेकिन दो महीने बाद ही कर्नाटक सरकार की ये स्कीम निराश करने लगी है। शहर के 1.8 लाख लोगों का इंदिरा कैंटीन पेट जरूर भर रही है, लेकिन अभी भी लाइनों में लगकर मायूस लौटने को मजबूर हैं।

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एक अंग्रेजी अखबार की पड़ताल में इंदिरा कैंटीन नंबर 111 की हालत इस योजना की असलियत दिखाती नजर आती है। यहां लंच की तैयारी हो रही थी लेकिन लंच के तय वक्त पर नहीं था। कैंटीन चलाने वाले इस मशक्कत में लगे हुए थे कि लंच को सही समय पर शुरू किया जा सके। लोग लंच पाने के लिए लाइनों में लगे थे, क्योंकि इंदिरा कैंटीन राज्य सरकार की लोकप्रिय स्कीम्स में से एक है।
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पढ़ें: इंदिरा कैंटीन से भूखे लौटे लोग, उमड़ी भीड़ का संभाल नहीं पाया स्टाफ
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30 साल के मेलरप्पा कहते हैं कि वो 6 साल से कैटरिंग के व्यवसाय में हैं। उन्हे शहर में इंदिरा कैंटीन को चलाने का ठेका मिला है। वो ब्रेकफास्ट और लंच में रोजाना चार-चार सौ प्लेट सर्व करते हैं, लेकिन डिनर के वक्त उनकी सौ प्लेट खाना बिना बिके रह जाता है। ऐसे में उसे फेंकना ही आखिरी विकल्प उनके पास बचता है।

रोजाना 800 से 1000 रुपये के नुकसान में हूं

Opposition says, Karnataka governments Indira Canteen made recipe for corruption

मेलरप्पा कहते हैं कि मैं रोजाना 800 से 1000 रुपये के नुकसान में हूं क्योंकि डिनर बिक नहीं पाता है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि इस नुकसान से कैसे बचा जा सके। मैं इसकी एक डायरी मेंटेन करने की कोशिश कर रहा हूं कि रोजाना कितनी प्लेट खाना बच रहा है।

रिक्शा ड्राइवर्स का एक ग्रुप खाने के लिए लाइन में लगा था। वो यहां लंच के लिए रुके थे। एक ऑटो ड्राइवर सादिक अपनी पत्नी और बच्चों को डॉक्टर को दिखाने को ले जाने वाले थे लेकिन वो लंच के लिए इंदिरा कैंटीन में रुक गए। उन्होंने लंच के लिए जल्दी से कूपन लिया, क्योंकि कई बार कैंटीन में खाना खत्म हो जाता है और लोगों को भूखे ही वहां से लौटना पड़ता है।

बंगलूरू में इंदिरा कैंटीन रोजाना टैक्सपेयर्स के पैसे से 3 लाख लोगों को खाना खिला रही है। सिद्धारमैया सरकार के लिए इंदिरा कैंटीन चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकती है लेकिन गलत तरीके से इसे लागू करने का आरोप लगाकर विपक्ष इस पर उंगलियां उठा रहा है।

250 प्लेट्स करप्शन की भेंट चढ़ रही हैं

Opposition says, Karnataka governments Indira Canteen made recipe for corruption

कर्नाटक में बीजेपी विपक्ष में है, वो कहते हैं कि इंदिरा कैंटीन की शुरुआत गरीबों को खाना देने के लिए की गई थी, लेकिन अब ये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है। बीजेपी के प्रवक्ता एस प्रकाश कहते हैं कि कैंटीन को चलाने में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। इनका दावा है कि इन कैंटीन्स में रोजाना 500 लोगों के लिए खाना पकाया जाता है, लेकिन सिर्फ 250 लोगों को ही ये खाना परोसा जा रहा है। 250 प्लेट्स करप्शन की भेंट चढ़ रही हैं।

इंदिरा कैंटीन नंबर 148 विवेकनगर में है। यहां 12.30 तक लंच परोसे जाने का वक्त है लेकिन लोग यहां भी खाने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कैंटीन अभी भी बंद है। पास में ही प्राइवेट कंपनी में ऑफिस ब्यॉय का काम करने वाले संतोष बताते हैं कि वो 15 मिनट से इंतजार कर रहे हैं और उनका लंच ब्रेक सिर्फ 30 मिनट का है। अगर मैं इस वक्त खाना नहीं खा पाया तो मुझें भूखा रहना पड़ेगा।

बंगलूरू के हडसन सर्किल पर कैंटीन चलाने वाले राजकुमार कहते हैं कि आज हमने लगभग 380 प्लेट्स खाना सर्व किया, लेकिन खाना खत्म होने की वजह से कई लोग फिर भी भूखे रह गए। यहां  खाने की कमी है और डिमांड ज्यादा है।

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