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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकार्पण कार्यक्रम: क्या कम होगी बेरोजगारों, कोरोना पीड़ित परिवारों की नाराजगी?

Thu, 15 Jul 2021 04:46 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 15 Jul 2021 04:46 PM IST
सार

वाराणसी से पूर्व कांग्रेस सांसद डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि चुनाव के अंतिम समय में इस तरह की योजनाओं का लोकार्पण कर पीएम और सीएम केवल अपनी सत्ता बचाने की कोशिश कर रहे हैं। शायद वे भूल गए हैं कि इसी वाराणसी में मात्र दो महीने पहले कोरोना काल में ‘मौत का तांडव’ हो रहा था, लोगों को अस्पताल में बेड, दवाएं और डॉक्टर तक नहीं मिल पा रहे थे...

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opposition questions on PM Modi varanasi visit before election, said PM and CM want to cover up the covid mismanagement
बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 15 जुलाई को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 1583 करोड़ रुपये की 200 से अधिक योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इसमें बहुचर्चित रूद्राक्ष सेंटर से लेकर सड़क और भवन निर्माण की कई योजनाएं शामिल रहीं। भाजपा समर्थक बता रहे हैं कि प्रदेश ने अनेक प्रधानमंत्री दिए, लेकिन उन्होंने प्रदेश को कुछ नहीं दिया। लिहाजा उत्तर प्रदेश और विशेषकर पूर्वांचल विकास की दौड़ में पिछड़ा रह गया। पहली बार कोई प्रधानमंत्री इस क्षेत्र के विकास पर ध्यान दे रहा है। जबकि, विपक्ष की राय इससे अलग है।

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वाराणसी से पूर्व कांग्रेस सांसद डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि चुनाव के अंतिम समय में इस तरह की योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करके पीएम और सीएम केवल अपनी सत्ता बचाने की कोशिश कर रहे हैं। शायद वे भूल गए हैं कि इसी वाराणसी में मात्र दो महीने पहले कोरोना काल में ‘मौत का तांडव’ हो रहा था, लोगों को अस्पताल में बेड, दवाएं और डॉक्टर तक नहीं मिल पा रहे थे। अगर प्रधानमंत्री को लगता है कि इस तरह की दिखावटी कोशिशों से जनता अपनों को खोने का दर्द भूल जाएगी तो यह उनकी गलतफहमी है।
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डॉ. मिश्रा के मुताबिक केंद्र सरकार की योजनाएं दिखावटी ज्यादा हैं। असलियत यह है कि वाराणसी के प्रारंभ बिंदु आदिकेश्वर घाट (जहां गंगा और वरुणा नदी का संगम होता है) में आज भी कोरोना पीड़ितों के शव और कफन सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। विकास के नाम पर भैंसासुर घाट, मणिकर्णिका घाट सहित कई प्रमुख जगहों पर तोड़-फोड़ की जा रही है। इससे एतिहासिक महत्व के मंदिर, घाट, पौराणिक वट वृक्ष नष्ट हो रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री केवल नाम के चक्कर में यह कार्य होने दे रहे हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सैकड़ों करोड़ का कार्यक्रम कर मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन को पहले बनारस रेलवे स्टेशन का नाम दिया गया, बाद में इसे दुबारा मंडुवाडीह किया गया और एक बार फिर अब इसे बनारस रेलवे स्टेशन किया जा रहा है। केवल नाम बदलने के लिए सैकड़ों करोड़ के कार्यक्रम कर सरकार क्या संदेश देना चाहती है, यह जनता की समझ से परे है। लोग सरकार की इस सोच पर हंस रहे हैं।

क्योतो देखने काशी नहीं आते

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री सात साल से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन अभी तक वे यह नहीं समझ पाए कि लोग काशी में क्योतो वाली विलासिता, फाइव स्टार होटल और भौतिक वैभव देखने नहीं आते। लोग यहां अध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते हैं। यह शांति और मोक्ष मां गंगा के प्राकृतिक बहाव और नैसर्गिक सौंदर्य में मिलता है।

लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार होटलों के विकास और इसके नाम पर फैल रही गंदगी को विकास समझ रही है। इससे गंगा का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है, जगह-जगह पानी रुक कर सड़ रहा है। बिना सोचे समझे किए जा रहे निर्माण से वाराणसी में गंगा का अर्धचंद्राकार स्वरूप नष्ट हो रहा है। इससे धर्माचार्य और पर्यावरणवादियों में गहरी चिंता है, लेकिन सरकार इसे विकास बता रही है। हालांकि, भाजपा समर्थक इससे सहमत नहीं हैं।

‘पहली बार विकास को भूमि पर उतरते देखा’

वाराणसी क्षेत्र में भाजपा समर्थकों द्वारा ‘मिशन मोदी अगेन पीएम’ नाम से एक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के भदोही जिला मीडिया प्रमुख सुशील राय ने अमर उजाला से कहा कि उत्तर प्रदेश ने जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान में नरेंद्र मोदी तक अनेक प्रधानमंत्री दिए हैं। शुरूआती दौर में प्रदेश के विकास को लेकर कुछ काम हुआ था, लेकिन बाद में यह पूरी तरह ठहर गया।

इस क्षेत्र की उपेक्षा का ही परिणाम हुआ कि पूरे देश में सबसे अच्छी कृषि योग्य भूमि और जलवायु होने के बाद भी यह क्षेत्र विकास में पिछड़ गया। गंगा-यमुना के दोआब के बीच बसा पूर्वांचल पिछड़ेपन और बेरोजगारी का पर्याय बन गया। यहां के युवा 10-15 हजार रुपये की नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई भटकते रहते हैं।

न्होंने कहा कि पर्यटन सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र माना जाता है। प्रयागराज और काशी में बिना किसी सरकार के प्रयास के एक से दो करोड़ लोग हर साल पहुंचते हैं। अगर इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर काम किया गया होता तो यह क्षेत्र विकास की एक नई पहचान बन सकता था, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। पहली बार कोई सरकार इस बात को समझ कर विकास कर रही है, इसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली बार पूर्वांचल के लोग विकास को महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र की जनता भाजपा के साथ खड़ी है।

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