फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Opposition likely to unite in House against draft Electricity (Amendment) Bill against central govt

विद्युत विधेयक पर रार के आसार, विपक्ष के एकजुट होने की संभावना

Tue, 09 Jun 2020 01:25 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 09 Jun 2020 01:25 PM IST
विज्ञापन
Opposition likely to unite in House against draft Electricity (Amendment) Bill against central govt
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक सरकार और विपक्ष के बीच विवाद का अगला कारण हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के एकजुट होने की पूरी संभावना है। दरअसल, इस विधेयक को लेकर कई राज्यों का कहना है कि यह भारत के संघीय ढांचे को कमजोर करता है। 

विज्ञापन


कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ-साथ वामपंथी दलों ने भी इस विधेयक की आलोचना की है। साथ ही आरोप लगाया है कि यह किसानों और गरीबों के हित में नहीं है। कोरोना महामारी के बीच जब भी अगला संसदीय सत्र शुरू होगा, इस पर घमासान मचने के पूरे आसार हैं। 
विज्ञापन


17 अप्रैल को केंद्र सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 के संशोधन के लिए विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020 के रूप में एक मसौदा प्रस्ताव जारी किया था। इसके बाद से ही इसपर सियासी विवाद चल रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मसौदा विधेयक में एक विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके पास विद्युत उत्पादन कंपनियों (गेनोस) और वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के बीच विवादों को निपटाने के लिए एक सिविल कोर्ट की शक्ति होगी। मसौदे के अनुसार, ईसीईए के पास बिजली की खरीद या बिक्री से संबंधित अनुबंधों के विशिष्ट प्रदर्शन से संबंधित मामलों को स्थगित करने का एकमात्र अधिकार होगा।

तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों ने आरोप लगाया है कि संशोधन राज्य के स्वामित्व वाली डिस्कॉम और राज्य बिजली नियामकों की स्वायत्तता को छीन लेगा। मसौदा विधेयक में उपभोक्ताओं और विशेषकर कृषि और घरेलू क्षेत्रों को प्रदान की जाने वाली सब्सिडी का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) का भी प्रावधान है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह किसानों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के हित के खिलाफ काम करेगा और इस बात पर जोर दिया कि भुगतान का तरीका राज्य सरकारों को तय करने के लिए छोड़ देना चाहिए।

विधेयक का उद्देश्य ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों से बिजली की एक न्यूनतम खरीद सुनिश्चित करना और अधिनियम में प्रावधानों के अनुपालन के लिए कड़े दंडात्मक उपायों को लागू करना है।


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को विधेयक का विरोध करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री आरके सिंह को एक पत्र लिखा। उन्होंने सरकार से कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इस कदम को छोड़ने का आग्रह किया और कहा कि इसे कानून बनाने से पहले राज्यों से परामर्श किया जाना चाहिए। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed