राज्यसभा में मोदी सरकार को लगा झटका, विपक्ष का संशोधन पारित
- राज्यसभा में केंद्र सरकार को गहरा झटका झेलना पड़ा
- पी जे कुरियन ने संशोधन में किसी राज्य का जिक्र नहीं होने के आधार पर अनुमति दे दी
- कांग्रेस को सपा, जदयू और माकपा का साथ मिला
- संविधान का अनुच्छेद 243 एफ राज्यों को चुनाव में शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार देता
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धारदार भाषण के तुरंत बाद राज्यसभा में केंद्र सरकार को गहरा झटका झेलना पड़ा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष का संशोधन भारी बहुमत से पारित हो गया और सरकार को करारी हार झेलनी पड़ी। कांग्रेस इसे अपनी राजनीतिक जीत बता रही है।
इस संशोधन के पारित होने से हरियाणा और राजस्थान में पंचायत और नगरपालिका चुनावों में प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने के फैसले को भी झटका लगा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अभिभाषण में एक पंक्ति जोड़ने का संशोधन पेश किया था। इसमें कहा गया है कि यह सरकार सभी नागरिकों के हर स्तर पर चुनाव लड़ने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
संशोधन पारित होने के बाद यह पंक्ति राष्ट्रपति के अभिभाषण में जोड़ दिया जाएगा। धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के उत्तर के बाद संशोधनों पर चर्चा के दौरान मतदान में सरकार को 61 और विपक्ष को 94 मत मिले। संशोधन 33 मतों से पारित हो गया।
संशोधन में हरियाणा और राजस्थान का जिक्र नहीं है। सदन के नेता अरुण जेटली और संसदीय कार्य मंत्री वैंकेया नायडू ने उप सभापति से अपील करते हुए कहा कि यह राज्य का मामला है। इसलिए इस संशोधन को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उप सभापति पी जे कुरियन ने संशोधन में किसी राज्य का जिक्र नहीं होने के आधार पर अनुमति दे दी। मत विभाजन के निर्णय के बाद सरकार को हार का सामना करना पड़ा। सदन के 155 सदस्यों ने इसमें भाग लिया। कांग्रेस को सपा, जदयू और माकपा का साथ मिला। इस मतदान के दौरान बसपा सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान पहले गुलाम नबी आजाद ने केंद्र से संविधान संशोधन विधेयक लाने की मांग की थी जिसके तहत राज्यों को स्थानीय निकायों के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार दिया गया है। बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में आजाद ने कहा कि शैक्षणिक योग्यता तय किए जाने से हरियाणा और राजस्थान में पचास प्रतिशत दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ने से वंचित हो गईं हैं। उनका अधिकार छीन लिया गया है। इसलिए यह संशोधन लाया गया था।
आजाद ने बसपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि जो लोग दलितों का हितैषी होने का महज दिखावा करते हैं , वे मतदान के दौरान मौजूद नहीं थे। जयराम रमेश ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 243 एफ राज्यों को चुनाव में शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार देता है। कांग्रेस इसके लिए संशोधन विधेयक लाने की मांग करेगी।