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विपक्ष के निशाने पर भोपाल जेलकांड की मुठभेड़, उठाए गंभीर सवाल

Tue, 01 Nov 2016 04:12 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Tue, 01 Nov 2016 04:12 AM IST
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 Opposition counters Bhopal prison scandal
आईजी और गृह मंत्री के बयानों में विरोधाभास को देखते हुए कांग्रेस और माकपा ने मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच कराने की अपील की है। 
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कांग्रेस नेता कमलनाथ ने जहां कैदियों के भागने के कुछ ही घंटे बाद उनके एक साथ मारे जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया वहीं कांग्रेस के ही मनीष तिवारी ने कहा कि अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। हम विस्तृत रिपोर्ट तक इंतजार करेंगे। 
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भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कांग्रेस पर सिम्मी के आतंकियों की तरफदारी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने का काम कर रही है। जिस तरह उसने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़े किए थे, उसी तरह अब वोट बैंक की राजनीति के लिए यह सब कर रही है। मुठभेड़ का राजनीतिकरण करना अच्छी बात नहीं है लेकिन कांग्रेस लंबे समय से ऐसा करती आ रही है। 
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किसने क्या कहा?

 Opposition counters Bhopal prison scandal
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ - फोटो : AmarUjala
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने कहा, 'सिमी के आतंकी उच्च सुरक्षा वाली जेल से फरार हो गए और कुछ ही घंटों में पुलिस ने उन्हें ढूंढ़ निकाला और मार गिराया। अब उनसे पूछताछ भी नहीं हो सकती, कोई सबूत नहीं बचा है, उनके बयान भी दर्ज नहीं हो सकते।'

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मैं न्यायिक जांच की मांग कर रहा हूं क्योंकि सरकार को भी जानना चाहिए कि किस परिस्थिति में वे जेल से भाग निकले।'

आप नेता, अलका लांबा ने कहा, 'भागे/भगाया, एनकाउंटर हुआ, सभी मारे गए, अच्छा हुआ। रख-खिलाकर मोटा करने से अच्छा होगा कि छह महीने में सुनवाई खत्म कर इन्हें फांसी पर लटका दिया जाए।'

माकपा नेता, बृंदा करात ने कहा, 'पुलिस और सरकार के बयानों में विरोधाभास है। इसलिए सच जानने के लिए हाईकोर्ट के जज की निगरानी में एक निश्चित समयसीमा के अंदर स्वतंत्र जांच कराई जाए। मारे गए सभी कैदी विचाराधीन थे और उन्हें आतंकी कहना कानून का उल्लंघन है।'

एआईएमआईएम नेता, असद्दुदीन ओवैसी ने कहा, 'सरकार कहती है कि इन कैदियों के हाथ में चम्मच से बने हथियार थे। ऐसा था तो एटीएस उन पर आसानी से काबू पा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा। इन विचाराधीन कैदियों ने घड़ियां, जूते और बेल्ट पहन रखे थे जबकि विचाराधीन कैदियों को ये चीजें रखने की इजाजत नहीं है।'
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