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SIR: 'वोट चोरी' विवाद में एकजुट दिखा विपक्ष, भाजपा ने पूछा- बिहार में ताकत क्यों नहीं दिखाते राहुल?

Mon, 11 Aug 2025 08:37 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 11 Aug 2025 08:37 PM IST
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Opposition appears united in 'vote theft' controversy, BJP asks  why doesn't Rahul show strength in Bihar
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी। - फोटो : पीटीआई

'वोट चोरी' का मुद्दा कितना जमीनी है, इस पर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आना शेष है, लेकिन इस मुद्दे पर एकजुट हुआ विपक्ष अपना असर छोड़ने में कामयाब रहा है। आज चुनाव आयोग की भूमिका केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय नहीं रह गया है। इस पर आम लोग चर्चा करने लगे हैं। सीधे तौर पर यह विपक्ष की कामयाबी ही मानी जाएगी। इसने विपक्ष के हौंसलों को बुलंद करने का काम किया है। वहीं, भाजपा ने यह सवाल खड़ा किया है कि राहुल गांधी बिहार में अब तक फर्जी वोट का एक भी मामला सामने लाने में क्यों असफल रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर केवल भ्रम पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाने के लिए हंगामा करने का आरोप लगाया। 

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चुनाव आयोग की भूमिका पर राहुल गांधी ने जिस तरह लगातार हमला बोला और उसे चर्चा का विषय बनाने के लिए लगातार प्रयास किया, उसी का परिणाम है कि आज यह मुद्दा इतना बड़ा बन चुका है जिसे सीधे तौर पर सत्ता पक्ष भी खारिज नहीं कर पा रहा। राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस तरह लगभग समूचे विपक्ष ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया है, उसने कहीं न कहीं यह संदेश अवश्य दे दिया है कि विपक्ष के पास आज भी राष्ट्रीय स्तर की बहस खड़ी करने के मामले में राहुल गांधी के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। 
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'वोट चोरी होती तो विपक्ष को क्यों मिलती इतनी सीटें'
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि विपक्ष ने अपने आंदोलन से इतना विमर्श खड़ा करने में सफलता अवश्य पाई है कि चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में वोट चोरी होने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बताना चाहिए कि यदि वोट की चोरी होती तो कांग्रेस 99 सीटों तक कैसे पहुंचती। यदि वोट चोरी होती तो भाजपा तमिलनाडु-केरल में अब तक इतना संघर्ष क्यों करती। 
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उन्होंने कहा कि यदि वोटों की चोरी होती तो भाजपा यूपी के अपने गढ़ में अचानक इतनी कमजोर कैसे हो जाती। हिमाचल प्रदेश में एक प्रतिशत से भी कम वोटों के अंतर से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बताना चाहिए कि यदि वोटों की चोरी होती तो भाजपा केवल इतने कम वोटों के अंतर से हिमाचल प्रदेश का चुनाव क्यों हारती।  

'ईवीएम और मतदाता सूची दोनों पर एक साथ सवाल सही कैसे' 
राजनीतिक विश्लेषक विवेक सिंह ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस एक साथ ईवीएम पर भी सवाल उठाती है, और मतदाता सूची पर भी। उसे बताना चाहिए कि यदि ईवीएम हैक हो सकता तो मतदाता सूची में छेड़छाड़ की आवश्यकता क्यों होती। और यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी है तो ईवीएम को अब तक गलत क्यों कहा जा रहा था। 

विवेक सिंह ने कहा कि मतदाता सूची में थोड़ी बहुत गड़बड़ी हमेशा से दर्ज की जाती रही है। सभी राजनीतिक दल अपने मतदाताओँ के नाम जुड़वाने और दूसरे दलों के मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए कोशिश करते रहे हैं। इस बात से भी कोई इनकार नहीं कर सकता कि यूपी-बिहार के लोग बाहर जाकर नौकरी करते हैं, लेकिन गांव में उनका वोट बना रहता है, जबकि इसी दौरान दिल्ली-मुंबई में भी वे मतदाता बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।  

बिहार में अपनी ताकत क्यों नहीं दिखाते राहुल गांधी- भाजपा
चुनाव आयोग के विरुद्ध सोमवार को विपक्ष के प्रदर्शन के सामने भाजपा ने अपना सबसे सौम्य चेहरा सामने उतारा। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्ष केवल हंगामा खड़ा करने के लिए यह प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष को यह कहकर कटघरे में खड़ा किया कि राहुल गांधी अब तक बिहार में एक भी ऐसे व्यक्ति को सामने लाने में क्यों असफल रहे जो सामने आकर कहे कि बिहार का निवासी होने के बाद भी उसका वोट काट दिया गया। बिहार की मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी होने के दस दिन बाद भी विपक्ष एक भी ऐसे व्यक्ति को सामने नहीं ला पाता है तो इससे वोट पर उसकी लड़ाई पर सवाल उठते हैं। 

राहुल और कांग्रेस का नेतृत्व विपक्ष को स्वीकार?
राहुल गांधी का यह कद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के सबसे बड़े नेता के तौर पर स्थापित करने वाला है। यह बात इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण है कि कुछ ही दिन पहले तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित अनेक दल राहुल गांधी या कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। विपक्षी दलों का गठबंधन इंडिया भी जब आकार में आया था, तब भी राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर विपक्षी दल सहज नहीं थे। 


यहां तक कि लालू प्रसाद यादव ने भी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व पर कांग्रेस पर सवाल उठाकर यही बताया था कि विपक्ष के नेतृत्व के सर्वमान्य नेता के तौर पर स्थापित होने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस को अभी और संघर्ष करना पड़ेगा। संभवतः वोट के इस मुद्दे ने कांग्रेस को वह अवसर उपलब्ध करा दिया है।   

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