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Operation Sindoor Outreach: विदेश से वापस लौटा सर्वदलीय सांसद प्रतिनिधिमंडल; हासिल बहुत कुछ हुआ, लेकिन क्या?

Wed, 11 Jun 2025 09:41 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 11 Jun 2025 09:41 PM IST
सार

पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का चयन सरकार ने बड़ी होशियारी से किया। इसमें पूरे भारत का प्रतिनिधित्व था। सांसद असदुद्दीन ओवैसी, गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद जैसे अल्पसंख्यक समेत तमाम चेहरे थे। इससे दुनिया में वतर्मान सरकार के अल्पसंख्यकों के प्रति रुख को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगैंडा को बड़ा झटका लगा है।

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Operation Sindoor All-party MP delegation returned from abroad; a lot was achieved, but what?
प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सात समंदर पार से लौट आया है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर उन्हें पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद और ऑपरेशन सिन्दूर के बाबत विश्व भ्रमण की जानकारी दी। बड़ा सवाल है कि आखिर इस पूरे अभियान में भारत को क्या हासिल हुआ? पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि सही मायने में समझने की जरूरत है। भारत ने मील का पत्थर तय किया है।
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जो हासिल हुआ उसे पाकिस्तान समझता है
पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का चयन सरकार ने बड़ी होशियारी से किया। इसमें पूरे भारत का प्रतिनिधित्व था। सांसद असदुद्दीन ओवैसी, गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद जैसे अल्पसंख्यक समेत तमाम चेहरे थे। इससे दुनिया में वतर्मान सरकार के अल्पसंख्यकों के प्रति रुख को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगैंडा को बड़ा झटका लगा है। शशांक कहते हैं कि अंदरूनी राजनीति पर भी इसका असर होगा। कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक दलों में फूट पड़ सकती है। इसका फायदा सत्तारूढ़ दल को होगा। विपक्ष कमजोर होगा। पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि तीसरा बड़ा फायदा आपरेशन सिन्दूर के दौरान सिन्धु नदी जल समझौते को रद्द करने का मिल रहा है। पाकिस्तान को आतंकवाद को सह देने की कीमत चुकानी पड़ रही है। अभी तक सरकारें 1965 और 1971 में भी इसका फैसला नहीं कर पाईं थीं। पिछली सरकारें डरती थी कि कहीं विश्व बैंक वित्तीय मदद न रोक दे। अमेरिका भारत के खिलाफ कदम न उठा ले, लेकिन मौजूदा सरकार ने राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है।
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सैन्य बलों ने कमियां पहचानी, बढ़ेगी ताकत
सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकार पूर्व एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अभी क्या हासिल हुआ, इसका आकलन करने का समय नहीं है। क्योंकि अभी ऑपरेशन सिन्दूर जारी है। अभी तो पाकिस्तान को अपनी जमीन से आतंकवाद को सह न देने की प्रतिबद्धता देनी है। भारत ने अभी उसे साफ संदेश दिया है कि पहलगाम जैसा कोई आतंकी हमला सहन नहीं किया जाएगा। रहा सवाल प्रतिनिधिमंडल को भेजने और इससे हासिल होने का तो इसे अभी समझ पाना थोड़ा मुश्किल है। एनबी सिंह कहते हैं कि संगरीला डायलॉग में हमारे सीडीएस जनरल चौहान ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक खामियों को पहचान कर इसे ठीक कर लिया गया है। एन बी सिंह कहते हैं कि यह साधारण बात नहीं है। आप देखेंगे कि अगले कुछ महीने में भारतीय सैन्य बल अपनी तमाम कमियां दूर करके आपरेशनल क्षमता को नई धार देंगे।
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सरकार बताए कि हमें हासिल क्या हुआ?
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार को सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजने का मामला बिल्कुल नहीं जम रहा है। वह कहते हैं कि यह प्रतिनिधिमंडल संघर्ष विराम के बाद भेजा गया। इसे पहलगाम हमले के तत्काल बाद भेजना चाहिए था। यह एक रणनीतिक चूक है। इस मामले में पाकिस्तान ने काफी आक्रामकता से कदम उठाया। दूसरे ऑपरेशन सिन्दूर ने पाकिस्तान के साथ कुछ देशों को लाकर खड़ा कर दिया। अमेरिका का पाकिस्तान का प्रेम उजागर हो गया। भारत को सही मायने में पता चल गया कि उसे अब आगे क्या करना है? रंजीत कहते हैं कि यह मानने में कोई हर्ज नहीं है कि हमारी चुनौतियां बढ़ी हैं। रंजीत कहते हैं कि भारत हमेशा से सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सामरिक क्षमता में पाकिस्तान से आगे रहा है। विदेश मंत्रालय के पूर्व अधिकारी एसके शर्मा कहते हैं कि इस बारे में सरकार को बताना चाहिए। उसे आपरेशन सिन्दूर के बारे में आधिकारिक वक्तव्य जारी करना चाहिए। शर्मा कहते हैं कि संसद के मानसून सत्र में इस बारे में सरकार संसद को जानकारी दे सकती है।

 
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