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ऑपरेशन फायरवॉल: एच-1बी वीजा के बहाने ट्रंप के निशाने पर भारत, लेकिन अमेरिकी कंपनियों के लिए भी होगी मुश्किल

Sun, 21 Sep 2025 06:41 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 21 Sep 2025 06:41 AM IST
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Operation Firewall: Trump targets India over H-1B visas, but US companies will also face difficulties
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई

अमेरिका के श्रम विभाग ने फायरवॉल के नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो एच-1बी वीजा को लक्षित करता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट की नीति से प्रेरित इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी के अवसरों की रक्षा करना है। लेकिन, हाल कि दिनों में ट्रंप ने भारत को लक्षित कर जिस तरह से कुछ कदम उठाए हैं उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रोजेक्ट भी अमेरिका में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को लक्षित करता है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में सबसे अधिक 71 फीसदी भारतीय एच-1बी वीजा पर काम करते हैं।

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दरअसल, ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का दावा किया था। पाकिस्तान ने उनके दावे की पुष्टि की थी। ट्रंप चाहते थे कि भारत भी उनकी बात मान ले। लेकिन भारत ने उनके दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उसके बाद से ही ट्रंप का रवैया भारत विरोधी हो गया। पहले उन्होंने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया। यूरोपीय देशों पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया। अब ऐसा लगता है कि एच-1बी वीजा के नए नियम उनके इसी हथकंडे की अगली कड़ी है।
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उल्लंघन पर दंड का प्रावधान
अमेरिकी श्रम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन फायरवॉल एच-1बी वीजा के दुरुपयोग को रोकेगा और ऐसा करने वालों को दंडित करेगा। श्रम विभाग की यह पहल उन अमेरिकी कंपनियों की जांच करने का अधिकार देता है जो विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्हें प्रभावित कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान करना पड़ेगा। एक निश्चित समय के लिए उन्हें एच-1बी वीजा से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
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अमेरिकी कंपनियों के लिए भी होगा मुश्किल
ट्रंप प्रशासन अपनी इस पहल को अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों के लिए कवच के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन कुशल और प्रतिभाशाली कर्मचारियों के लिए एच-1बी वीजा पर निर्भर अमेरिकी कंपनियों को इससे नुकसान उठाना पड़ेगा। भारतीय कर्मचारियों को नियुक्त करना उनके लिए महंगा हो जाएगा, जो खासकर आईटी सेक्टर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। वहीं, अमेरिकी विश्वविद्यालय मांग के अनुपात में पर्याप्त कुशल कर्मचारी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी कंपनियों के प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे।

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