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Govt Review: देश के 80 फीसदी गांव खुले में शौच से मुक्त, 54% गांव ही हासिल कर पाए 'ओडीएफ प्लस मॉडल' का दर्जा

Wed, 02 Jul 2025 10:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 02 Jul 2025 10:18 PM IST
सार

Govt Review: देश के 80 फीसदी गांव खुले में शौच से मुक्त, 54% गांव ही हासिल कर पाए 'ओडीएफ प्लस मॉडल' का दर्जा 

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Only 54% of verified villages achieve 'ODF plus model' status despite 80% coverage: Govt review
स्वच्छ भारत मिशन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के तहत जिन गांवों को लक्षित किया गया था, उनमें से 80 फीसदी गांव खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) और ठोस व तरल कचरे के प्रबंधन की सुविधाओं से लैस हैं। हालांकि, केवल 54 फीसदी गांवों को ही औपचारिक रूप से ‘ओडीएफ प्लस मॉडल’ का दर्जा मिला है। सरकार की ओर से की गई हालिया समीक्षा में यह जानकारी दी गई है। 

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यह आंकड़े बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यशाला' में पेश किए गए। सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर गंदे पानी (ग्रे वॉटर) के प्रबंधन का कवरेज 95 फीसदी गांवों  तक पहुंच चुका है। जिसमें 20 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कवरेज 95 फीसदी से भी आगे बढ़ चुका है। इसके अलावा, ठोस कचरा प्रबंधन का कवरेज 87 फीसदी गांवों तक पहुंच चुका है। वहीं, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में ब्लॉक स्तर की 70 फीसदी कवरेज हासिल की गई है। 
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 80 फीसदी लक्षित गांवों ने ओडीएफ प्लस मॉडल की स्थिति हासिल की है, लेकिन केवल 54 फीसदी की ही औपचारिक रूप से पुष्टि हो सकी है। एक ओडीएफ प्लस मॉडल गांव वह होता है, जहां खुले में शौच की आदत पूरी तरह खत्म हो चुकी हो, ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन हो, साफ-सफाई का स्तर अच्छा हो, सार्वजनिक जगहों पर कचरा और पानी जमा न हो और ओडीएफ से जुड़ी सूचनाएं प्रदर्शित की जाती हों।

जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) और यूनिसेफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के मिशन निदेशक, सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ और विकास साझेदार शामिल हुए। 


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पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने कहा कि स्वच्छता केवल ढांचागत सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरिमा, समानता और स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के अगले चरण को पिछले दशक की सामूहिक उपलब्धियों पर आगे बढ़ना चाहिए। 

इस दौरान दो तकनीकी दस्तावेज भी लॉन्च किए गए, एक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और दूसरा जलवायु-संवेदनशील स्वच्छता डिजाइन और सेवाओं के विकास के लिए प्रोटोकॉल।



 

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