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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट : सिर्फ 4000 हिम तेंदुए बचे, इनके 77 प्रतिशत ठिकानों तक का नहीं पता 

Tue, 18 May 2021 06:27 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 18 May 2021 06:27 AM IST
सार

  • रिपोर्ट के अनुसार, 1904 से अब तक भी केवल 23 प्रतिशत आवासीय क्षेत्र पर ही कोई शोध हुआ, बाकी भाग छूटे रहे
  • हिम तेंदुओं के 35 प्रतिशत आवास ही 2070 तक सुरक्षित रहेंगे
  • इसके आवास का विस्तृत अध्ययन नहीं होने से आज भी पूरी तस्वीर दुनिया के सामने नहीं आ सकी है

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Only 4000 snow leopards survived, 77 percent of their locations are not known according to WWF report
हिम तेंदुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनियाभर में हिम तेंदुओं की संख्या 4,000 से भी कम रह गई है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि वैज्ञानिक आज तक उनके 77 फीसदी ठिकानों का पता नहीं कर पाए हैं। विश्व वन्यजीव संगठन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने हिम तेंदुओं पर पिछले 100 साल में हुए अध्ययनों पर जारी रिपोर्ट में कहा है कि इनकी आवास को लेकर जानकारी और डेटा की कमी से संरक्षण प्रयासों को नुकसान हो रहा है।

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संरक्षण के लिए इस रहस्यमयी जीव और उसके आवास को समझना जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, 1904 से अब तक भी केवल 23 प्रतिशत आवासीय क्षेत्र पर ही कोई शोध हुआ, बाकी भाग छूटे रहे। रिपोर्ट के प्रमुख लेखकों में शामिल ऋषि कुमार शर्मा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के ग्लोबल स्नो लेपर्ड के प्रमुख भी हैं। उन्होंने बताया कि हिम तेंदुए दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं। इन्हें पृथ्वी के सबसे कठोर हालात वाले क्षेत्र भी कह सकते हैं।
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यह एक वजह है कि इन क्षेत्रों में अध्ययन नहीं हो पाए। यह जीव खुद भी छुपकर और दुर्गम क्षेत्रों में रहना पसंद करता है। इसके आवास का विस्तृत अध्ययन नहीं होने से आज भी पूरी तस्वीर दुनिया के सामने नहीं आ सकी है।
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आवासीय क्षेत्र 17 लाख वर्ग किलोमीटर पहाड़ 

  • 17 लाख वर्ग किलोमीटर एशियाई पहाड़ी क्षेत्र हैं घर। यहां से निकली 20 नदियां 200 करोड़ की प्यास बुझाती है। 
  • भारत, नेपाल, चीन, पाकिस्तान और मंगोलिया के सीमित पहाड़ी क्षेत्रों में होने से अस्तित्व खतरे में।
  • गैरकानूनी शिकार, जंगलों का खात्मा और पहाड़ी क्षेत्रों में मानव गतिविधियां बढ़ने से संघर्ष के बड़े खतरे हैं

भविष्य
माना जा रहा है कि इनके केवल 35 प्रतिशत आवास ही 2070 तक सुरक्षित रहेंगे।

23 प्रतिशत खत्म हो जाएंगे बचे क्षेत्रों से 
14 से 19 प्रतिशत क्षेत्र ही संरक्षित। ये बेहद छोटे। 

हर साल 450 हिम तेंदुए मारे जा रहे
2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 221 से 450 हिम तेंदुए मारे जा रहे हैं। शिकार के अलावा 55 प्रतिशत संख्या मवेशियों को बचाने के लिए हिम तेंदुओं की हत्या होती है।



भारत में 500 से भी कम बचे हैं हिम तेंदुए
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में पाए जाने वाले हिम तेंदुए की आबादी 500 से भी कम है। इसके फर, हड्डियों और मांस के लिए अवैध शिकार होता है, जिससे इसकी संख्या तेजी से घट रही है। केंद्र इनकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट्स स्नो लेपर्ड के तहत वित्तीय अनुदान शुरू किया है।

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