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ऑनलाइन चीटिंग: अपराध का नया अड्डा बन रहा फेसबुक, वीडियो दिखाकर फंसा रहे जाल में

Mon, 17 May 2021 10:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 17 May 2021 10:24 PM IST
सार

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर भी धंधेबाज गिरोह सक्रिय हैं। ये तमाम उल्टे-सीधे धंधों की आड़ में लोगों को फंसा लेते हैं और फिर पुलिस केस का भय दिखाकर वसूलते हैं मोटी रकम। अमर उजाला पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। 
 

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Online Cheating: Facebook is becoming the new hangout spot of crime, caught in the trap by seeing videos
फेसबुक क्राइम - फोटो : demo pics

विस्तार

कोरोना काल में ऑनलाइन अपराध भी जमकर बढ़े हैं। फेसबुक भी ऑनलाइन क्राइम का बड़ा माध्यम बनने लगा है। मामला बनारस के एक मशहूर वकील साहब का है। वह भी झांसे में आ गए और पिछले 20 दिन में अपराधियों ने उन्हें जमकर ब्लैकमेल किया। 
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बात बनारस की ही नहीं है। ऑनलाइन अपराधियों के जाल में एक आईटी इंजीनियर भी फंस गए हैं। फरवरी महीने से वह पुलिस का चक्कर काट रहे थे। इन दिनों कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण अभी तक उनके मामले का निबटारा नहीं हो पाया है।
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विनय कुमार दुबे (बदला हुआ नाम) को अपराधियों ने चालबाजी से फंसा लिया है। पेशे से पूर्वी उ.प्र. की एक जिला अदालत में रेवेन्यू वकील विनय दुबे से अपराधी कोरोना काल में 75 हजार रूपये की वसूली कर चुके हैं। अभी भी पैसे की रंगदारी का दबाव बना हुआ है। 
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अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि विनय दुबे बदनामी के डर से पुलिस के पास नहीं जाना चाहते। 61 साल के विनय दुबे के नाती-पोते हैं। उनकी इस कमजोर नस को पकड़कर ब्लैकमेलिंग में लगे अपराधियों ने उनका जीना हराम कर रखा है।

लड़कियों की प्रोफाइल के जरिए फंसाते हैं
अपराधियों का मुर्गा फांसने और उन्हें फंसाने का तरीका बड़ा दिलचस्प है। विनय दुबे, बनारस के वकील साहब और दिल्ली में रहने वाले मुजफ्फरपुर मूल के आईटी इंजीनियर की आपबीती को आधार बनाकर पड़ताल की गई। 

ऐसे जाल बुनते हैं गिरोह के लोग
पड़ताल में इस तरह की तीन-चार प्रोफाइल मिल गई। इन्हें खंगालने पर जो सच सामने आया, आप भी सुनिए। यह गिरोह पहले सुंदर लड़कियों की फोटो लगाकर लड़कियों के नाम की प्रोफाइल बनाता है। उस प्रोफाइल से पहले ग्राहक की पोस्ट पर लाइक किया जाता है। इसके बाद ग्राहक की टाइमलाइन पर उसकी तारीफ की जाती है। इसके बाद फ्रेंडशिप की रिक्वेस्ट भेजी जाती है। रिक्वेस्ट स्वीकार होते ही मैसेंजर के जरिए संपर्क करने का प्रयास हो जाता है।

 

व्हाट्सअप नंबर देते ही ब्लैकमेलिंग चालू

यह भी सामने आया कि फेसबुक रिक्वेस्ट स्वीकार होने के बाद मैसेंजर पर फेक नाम वाली युवती आ जाती है। वह ग्राहक से पहले उसका व्हाट्सअप नंबर मांगती है। व्हाट्स नंबर देने का अर्थ है कि अब इस गिरोह के पंजे में फंसने की शुुरुआत हो चुकी है। फेसबुक पर महिलाओं के नाम की कई फर्जी प्रोफाइल मौजूद हैं। 

इसी में से एक ने विनय दुबे को भी मैसेंजर से व्हाट्स नंबर लेकर कॉल किया। वह बताते हैं कि काल में आवाज एक लड़की की थी। थोड़ी ही देर में विनय लड़की के प्रभाव में आ गए। इसके बाद उसने वीडियो कॉल की और इस वीडियों कॉल में वह न्यूड होती गई। अपनी इस प्रक्रिया के दौरान उसने विनय से भी वर्चुअली आगे बढने के लिए कहा। थोड़ा-सा आगे बढ़ते ही फोन कॉल डिस्कनेक्ट हो गया और ब्लैकमेलिंग का धंधा शुरू हो गया।

दिल्ली पुलिस साइबर सेल का नुमांइदा बनकर वसूले हजारों

विनय दुबे के साथ यह घटना 22 अप्रैल 2021 को हुई थी। विनय बताते हैं कि वीडियो कॉल की घटना के दो दिन बाद उनके पास एक नंबर से फोन आया। बताने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस साइबर सेल का एसआई बताया और उनके व्हाट्सअप पर रिकार्डेड वीडियो भेजकर जांच में सहयोग करने की अपील शुरू कर दी। 

साइबर सेल का जांच अधिकारी बना शख्स विनय को अश्लील कारोबार समेत तमाम अनैतिक गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर दबाव बनाता है। दूसरी तरफ एक अन्य नंबर से किसी और नाम के आदमी ने यूट्यूब पर वीडियो लोड करने की धमकी देकर पैसे मांगने शुरू कर दिए। बात यहीं खत्म नहीं हुई।  विनय को कॉल करने वाली युवती ने पुलिस में न जाने, गूगल फोन पे के जरिए 15,000 हजार रुपये तुरंत देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। फेसबुक पर लोग प्रोफाइल में परिवार की फोटो या परिचय डाल देते हैं। इस गिरोह ने ऐसे फोटो अपलोड करके उसे वीडियो के साथ जोड़ रखा है। यह विनय दुबे को परेशान करने के लिए काफी था। लिहाजा अपराधियों ने अब तक हजारों वसूल लिए हैं।

आईटी एक्सपर्ट के सहारे चल रहा है चीटिंग, फ्रॉड, वसूली का धंधा

पिछले एक सप्ताह में इसकी पड़ताल में कई सच सामने आए। यवतमाल से एसआई धीरेन्द्र राजपूत ऐसी ही एक पड़ताल के सिलसिले में फोन पर आए। बताते हैं कि अपराधी किस्म के लोग गरीब मजदूरों, रिक्शा वालों या ऐसे लोगों से उनके मोबाइल का सिम कुछ पैसे का लालच देकर लेते हैं। यह सिम स्मार्ट और बेसिक फोन के सहारे लोगों की ब्लैकमेलिंग के काम आती है। 

व्हाट्स एप को बनाया बड़ा जरिया

कॉल करने के लिए अपराधियों ने व्हाट्सअप को बड़ा जरिया बना रखा है। फेसबुक उनके लिए काफी मददगार हो रहा है। दिल्ली पुलिस के एसआई कल्याण पाटिल कहते हैं कि कई मोबाइल नंबर तो इस तरह के मिल रहे हैं, जिनके असली मालिक का पता ही नहीं चल पाता। हालांकि देर-सबेर उस सिम का इस्तेमाल करने वाले पकड़ लिए जाते हैं। लेकिन इसके लिए साइबर सेल को काफी पापड़ बेलना पड़ता है।

दिल्ली पुलिस साइबर सेल के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि एक मामले को सुलझाने में अमूमन तीन-चार महीने तक लग जाते हैं। तब तक ऐसे अपराधी 100 से अधिक केस कर चुके होते हैं। सूत्र का कहना है कि देश में पनप रही यह बहुत बड़ी बीमारी है।

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