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अध्ययन: 2030 तक 52% तक बढ़ सकता है एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल, 2016-23 के बीच बिक्री में 16.3% की वृद्धि

Wed, 27 Nov 2024 04:50 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 27 Nov 2024 04:50 AM IST
सार

कोविड-19 के दौरान अस्पतालों में भर्ती संक्रमितों के उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया। 2016 से 2023 के बीच इन दवाओं की बिक्री में 16.3 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2030 तक इन दवाओं के इस्तेमाल में 52 फीसदी तक वृद्धि हो जाएगी।

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One Health Trust Study reveals antibiotics use increase 52 percent by 2030
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनियाभर में स्वच्छ जल का अभाव, खराब स्वच्छता ग्रामीण क्षेत्रों में बगैर डिग्री धारी डॉक्टरों की बढ़ती संख्या और सीमित टीकाकरण के कारण एंटीबायोटिक दवाओं की खपत में भारी इजाफा हुआ है। कोविड-19 के दौरान अस्पतालों में भर्ती संक्रमितों के उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया। 2016 से 2023 के बीच इन दवाओं की बिक्री में 16.3 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2030 तक इन दवाओं के इस्तेमाल में 52 फीसदी तक वृद्धि हो जाएगी।

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वन हेल्थ ट्रस्ट (ओएचटी), पॉपुलेशन काउंसिल,  ज्यूरिख और ब्रुसेल्स विवि, जॉन्स हॉपकिन्स विवि और हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ से जुड़े शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आई है। इसके नतीजे अंतराष्ट्रीय जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पनास) में प्रकाशित हुए हैं।
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जरूरत न होने पर भी हो रहा है इस्तेमाल
अध्ययन में सामने आया कि अप्रशिक्षित चिकित्सक जरूरत न होने पर भी मरीजों को एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कराते हैं। सामान्य वायरल संक्रमण या हल्के बैक्टीरियल संक्रमण में भी अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग से शरीर में इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध पैदा हो रहा है। इस वजह से कई दवाएं मरीजों पर असर नहीं कर रही हैं।

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  • इसकी वजह से रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) की समस्या तेजी से पैर पसार रही है। यह सालाना करीब 50 लाख से ज्यादा जिंदगियों को निगल रही है।

मध्यम आय वाले देशों में सबसे ज्यादा खपत
अध्ययन के अनुसार मध्यम आय वाले देशों में 2016 से 2023 के बीच एंटीबायोटिक दवाओं की खपत सबसे अधिक हुई। हालांकि यह वृद्धि 2008 से 2015 के बीच दर्ज 35.5 फीसदी की वृद्धि से कम रही। शोधकर्ताओं के मुताबिक ऐसा इसलिए है क्योंकि महामारी के पहले वर्ष के दौरान विशेष रूप से अमीर देशों में इन दवाओं का उपयोग तेजी से घट गया था। जब शोधकर्तओं ने उन देशों में एंटीबायोटिक के उपयोग का आकलन किया तो उन्होंने पाया कि इस दौरान एंटीबायोटिक की कुल बिक्री में 20.9 फीसदी की वृद्धि हुई है। खपत की दर में भी 13.1 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

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