विजय माल्या की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बैंकों को नोटिस
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संपत्तियों का पूरा ब्योरा न देने पर जारी अवमानना नोटिस को वापस करने की उद्योगपति विजय माल्या की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों के समूह को नोटिस जारी किया है। ब्रिटिश कंपनी से मिले 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर सहित अपनी कई संपत्तियों का खुलासा नहीं करने पर माल्या को अवमानना नोटिस जारी किया गया है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन की पीठ ने बैंकों को इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 27 सितंबर तक के लिए टाल दी। पीठ ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अदालत की अवमानना नहीं की है।
वहीं बैंकों के समूह की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि चूंकि माल्या ने अदालत द्वारा 25 जुलाई को जारी अवमानना की याचिका पर जवाब नहीं दिया है और न ही वह अदालत के समक्ष पेश हुए हैं। लिहाजा उनकी याचिका पर सुनवाई करने की कोई दरकार नहीं है।
माल्या पर करीब 9400 करोड़ रुपये की देनदारी
साथ ही उन्होंने बताया कि माल्या को अदालत की ओर से पेशी से छूट भी नहीं मिली है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को सीलबंद लिफाफे में अपनी संपत्तियों का ब्योरा देने के लिए कहा था। लेकिन बैंकों के समूह का कहना है कि माल्या ने अपनी संपत्तियों का पूरा ब्योरा नहीं दिया है।
बैंकों का कहना है कि माल्या ने कई जानकारियां छिपा ली हैं। इनमें 2500 करोड़ का नकद लेन-देन भी है, जिसके बारे में माल्या ने जानकारी नहीं दी थी। वहीं माल्या का कहना है कि बैंकों को उनके व उनके परिवार की विदेशी संपत्तियों के बारे में जानकारी मांगने का अधिकार नहीं हैं क्योंकि वह आप्रवासी भारतीय हैं।
गत 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों की याचिका पर माल्या को अवमानना नोटिस जारी किया था। बैंकों का कहना है कि माल्या पर करीब 9400 करोड़ रुपये की देनदारी है।