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Hindi News ›   India News ›   Omicron Variant : What is the reason for danger from this new Variant, know answers to five such important questions related to B11529

ओमिक्रॉन : इस नए स्वरूप से खतरा किस वजह से ज्यादा, जानिए बी.1.1.529 से जुड़े ऐसे ही पांच जरूरी सवाल के जवाब

Sun, 28 Nov 2021 06:15 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 28 Nov 2021 06:15 AM IST
सार

कोरोना का यह नया स्वरूप तेजी से फैला है पर दुनिया इसके प्रभाव से अभी अनजान है। कई माह बाद मिला कोविड का नया स्वरूप इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह बीटा, डेल्टा का नया वंश है और स्पाइक प्रोटीन में 30 म्यूटेशनों ने चिंता बढ़ाई है। स्पाइक प्रोटीन वही हैं प्रमुख कारक जिसकी वजह से अब तक कोरोना की वैक्सीन बनाई गई हैं।

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Omicron Variant : What is the reason for danger from this new Variant, know answers to five such important questions related to B11529
ओमिक्रॉन वेरिएंट(सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

विस्तार

दुनियाभर में टीकाकरण के बाद पटरी पर लौटते जीवन को इन दिनों तेजी से फैल रहे कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से फिर झटका लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे चिंताजनक स्वरूप (वेरिएंट ऑफ कंसर्न) करार दिया है। वायरस के इस बी.1.1.529 रूप का सबसे पहले प्रसार दक्षिण अफ्रीका में देखने को मिला। यह इतना संक्रामक है कि दक्षिण अफ्रीका में दो हफ्तों में ही नए मामले चार गुना से ज्यादा बढ़ गए हैं।

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दक्षिण अफ्रीका में दो हफ्ते में नए मामले बढ़े चार गुना, गौतेंग में 77 सैंपल में मिला
दक्षिण अफ्रीकी एनजीएस को नवंबर के मध्य में गौतेंग प्रांत के 77 सैंपलों में कोरोना का यह नया वंश मिला। इसमें 50 म्यूटेशन मिले, जिनमें 30 अकेले स्पाइक प्रोटीन में पाए गए। कोरोना की ज्यादातर वैक्सीनें स्पाइक प्रोटीन आधारित हैं। ऐसे में टीके के प्रभावी होने में संदेह बढ़ गया है।
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बलि का बकरा बनाया जा रहा : दक्षिण अफ्रीका
इधर, दुनिया भर के कई देशों ने कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट मिलने के बाद दक्षिण अफ्रीका की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे दक्षिण अफ्रीकी सरकार आहत है। उसका कहना है कि हमें जीनोम सीक्वेंसींग के जरिए वैरिएंट खोजने की सजा दी जा रही है। वहां के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला ने कहा है कि नए वैरिएंट को लेकर दक्षिण अफ्रीका पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध कठोर और गलत हैं। लगता है कुछ देश और नेता ओमिक्रॉन की समस्या से निपटने के लिए हमें बलि के बकरे की तरह इस्तेमाल करने की फिराक में हैं।

अच्छे विज्ञान की तारीफ होनी चाहिए
दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश वैरिएंट को जल्दी से खोजने की सजा भुगत रहा है। अच्छे विज्ञान की तारीफ की जानी चाहिए। कोरोना का यह नया स्वरूप डेल्टा से भी अधिक खतरनाक है। इसे डब्ल्यूएचओ ने चिंताजनक श्रेणी में रखा है। हम कोरोना की रोकथाम दुनिया के अन्य देशों की तरह ही बराबर प्रयास कर रहे हैं।

बोत्सवाना, बेल्जियम, हांगकांग और इस्राइल में भी इस स्वरूप की पहचान हुई
दक्षिण अफ्रीका में सेंटर फॉर एपिडेमिक रिस्पांस एंड इनोवेशन (सीईआरआई) के निदेशक ट्यूलियो डी ओलिवेरा के अनुसार, गौतेंग में 90% मामलों में बी.1.1529 स्वरूप मौजूद है और इसने देश को चौथी लहर की कगार पर ला खड़ा किया है।

टीके को चकमा देने की क्षमता जानने पर जोर
इसके कुछ आनुवांशिक बदलाव दूसरे स्वरूपों से ज्ञात हैं और वे इसके प्रसार पर असर डाल सकते हैं या प्रतिरक्षा को चकमा देने में मददगार हो सकते हैं। इसके अधिकांश परिवर्तन अज्ञात हैं, जिनका अध्ययन करना बाकी है।

  • कहा नहीं जा सकता कि म्यूटेशन इसके व्यवहार को कैसे प्रभावित करेंगे।
  • अभी वैज्ञानिक इसके प्रसार, गंभीर बीमार करने और टीके लगवा चुके लोगों में प्रतिरक्षा को चकमा देने की इसकी क्षमता पर गौर कर रहे हैं।
  • इस तरह के अध्ययन पेचीदा होते हैं और इनमें कई महीने लग जाते हैं।

सार्स-कोव-2 के ज्यादा करीब
बी.1.1.529 की आनुवांशिक प्रोफाइल अन्य चिंताजनक स्वरूपों से काफी भिन्न है। इसका बीटा या डेल्टा से संबंध होने के बजाय यह सार्स-कोव-2 के नए वंश का प्रतिनिधित्व करता दिख रहा है।

डेल्टा से ज्यादा खतरनाक, कई मामलों में लक्षण ही नहीं मिले

गौतेंग प्रांत में ओमिक्रॉन के अचानक मामले बढ़ने से पता चलता कि यह आसानी से फैलता है। हालांकि यह डेल्टा से भी ज्यादा खतरनाक है या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है। इससे संक्रमित कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें लोगों में कोई लक्षण नहीं उभरा।

प्रतिरक्षा को पूरी तरह खत्म कर सकता है
कोई तथ्यात्मक टिप्पणी नहीं की जा सकती। वैसे, अफ्रीका में टीके लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आए हैं। कुछ महामारीविद यह पता लगा रहे हैं कि टीकाकरण करा चुके कितने लोगों में ओमिक्रॉन फैला है। फाइजर टीका बनाने वाली कुछ कंपनियां ज्यादा डाटा की प्रतीक्षा कर रही हैं। ताकि, तय किया जा सके कि उनकी एमआरएनए वैक्सीन में किस संशोधन की जरूरत है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन प्रतिरक्षा को पूरी तरह से खत्म करने की ताकत रखता है।

सावधानियां
फिलहाल कोरोना दिशानिर्देशों का पालन और पूर्ण टीकाकरण ही समाधान है। यह सभी को मानकर चलना चाहिए कि महामारी थोड़ी थमी जरूर है पर खत्म नहीं हुई है।

चिंताजनक
वायरस का कोई स्वरूप तब चिंताजनक (वेरिएंट ऑफ कंसर्न/वीओसी) बन जाता है, जब वह तेजी से फैलने और नुकसान पहुंचाने के साथ टीके की क्षमता को प्रभावित कर सकता हो।

संभव है, एड्स मरीज से फैला हो ओमिक्रॉन

महामारीविदों ने ओमिक्रॉन के किसी एचआईवी पीड़ित से उभरने का अंदेशा जताया है। एड्स पीड़ित की प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है। उसमें कोरोना वायरस अधिक अवधि तक रह जाए तो वह ज्यादा मजबूत स्वरूप में दूसरे लोगों में फैल सकता है।

टीकों की क्षमता जानने में जुटी कंपनियां
टीका निर्माता मॉडर्ना ने कहा है, कंपनी ओमिक्रॉन के खिलाफ अपनी वैक्सीन की क्षमता परख रही है। वहीं, एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन भी टीके पर नए स्वरूप का असर समझ रही है।

ओमिक्रॉन से सतर्कता जरूरी, विदेशी उड़ानों की करें समीक्षा : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। पीएम ने कोविड-19 के फैलाव और टीकाकरण पर शीर्ष अफसरों के साथ बैठक में 15 दिसंबर से विदेशी उड़ानों में छूट देने के फैसले की समीक्षा के लिए भी कहा। सरकार ने एक दिन पहले ही यह फैसला किया था।

प्रधानमंत्री को अफसरों ने बताया कि दुनिया में फिर से कोविड-19 का उभार हो रहा है। नए वेरिएंट के लक्षणों और विभिन्न देशों में इसके असर की जानकारी भी दी। पीएम मोदी ने संभावित खतरे को देखते हुए हर विदेशी उड़ान की निगरानी, कोविड दिशा-निर्देशों के अनुसार यात्रियों की जांच व नए वेरिएंट के जोखिम वाले देशों के यात्रियों पर विशेष ध्यान देने को भी कहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमिक्रॉन को डेल्टा वेरिएंट की तरह ही अत्यंत संक्रामक बताया है।

कर्नाटक और गुजरात में जांच जरूरी

दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों को मुंबई में क्वारंटीन किया जाएगा। यात्रियों के सैंपल के जीनोम सीक्वेंसिंग भी होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा घोषित ‘जोखिम वाले देशों’ से आने वालों के लिए कर्नाटक और गुजरात में आरटी-पीसीआर जांच जरूरी कर दी है।

द. अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे दो यात्री संक्रमित
दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे दो भारतीय कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि, ये दोनों डेल्टा वायरस से संक्रमित हैं। उन्हें क्वारंटीन कर दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि अफ्रीकी देशों से पहुंचे 94 यात्रियों की जांच की जा रही है।

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