भगवंत मान ने शून्य काल में बदला विषय तो ओम बिड़ला बोले- 'पढ़ा-लिखा' स्पीकर हूं
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आज लोकसभा में अजीबो-गरीब वाकया देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद भगवंत मान ने शून्य काल में विषय बदल दिया। इसपर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि मैं पढ़ा-लिखा स्पीकर हूं, विषय बदलने से पहले अनुमति लीजिए।
दरअसल, भगवंत मान लोकसभा में अन्य देशों में स्थित भारत के दूतावासों में भारतीयों को होने वाली कठिनाइयों पर बोलना शुरू किया। उन्होंने बोलना शुरू ही किया था कि स्पीकर ओम बिड़ला ने उन्हें बैठने को कह दिया।
स्पीकर ने कहा, 'यदि आप शून्य काल में विषय बदलना चाहते हैं तो आपको मेरी अनुमति लेनी होगी। आपको पंजाब में शिक्षकों के वेतन से संबंधित विषय दिया गया है। मैं पढ़ा-लिखा स्पीकर हूं।' उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई सांसद शून्य काल में विषय बदलना चाहता है तो उसे अनुमति लेनी होगी। इसके बाद भगवंत मान ने स्पीकर से अनुमति मांगी, जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया।
क्या है शून्य काल
संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के तुरंत बाद की अवधि को शून्य काल (जीरो आवर) कहते हैं। इसका समय 12 बजे से लेकर 1 बजे तक होता है। दोपहर 12 बजे शुरू होने के कारण इसे शून्य काल कहा जाता है। शून्य काल की शुरुआत 1960 के दशकों में हुई थी, जब बिना पूर्व सूचना के बिना देर किए लोक महत्व के विषय उठाने की प्रथा शुरू हुई थी। इस अवधि में आवश्यक दस दिनों के पूर्व नोटिस के बगैर काफी महत्वपूर्ण मामलों को उठाया जा सकता है।