फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Old Pension scheme opportunity for Congress, but trap for BJP

Old Pension: कांग्रेस के लिए रामबाण तो भाजपा के गले की फांस बना OPS, कौन तोड़ेगा 10 करोड़ वोटों का 'चक्रव्यूह'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 18 Jan 2023 07:05 PM IST
सार

Old Pension: अभी तक कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू कर दिया है। पंजाब में भी 'आप' सरकार ने अपना वादा पूरा किया है। झारखंड में ओपीएस लागू हो गई है...

विज्ञापन
Old Pension scheme opportunity for Congress, but trap for BJP
Old Pension Scheme - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश में पुरानी पेंशन लागू करने का मुद्दा गर्माता जा रहा है। आए दिन केंद्रीय एवं राज्यों के कर्मचारी संगठन इस बाबत किसी न किसी रणनीति की घोषणा कर रहे हैं। रेलवे और रक्षा सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार को सितंबर तक का समय दिया है। अगर इस अवधि में पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा नहीं होती है, तो भारत बंद किया जाएगा। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी एवं कई दूसरे विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह मुद्दा 'रामबाण' तो भाजपा के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। 'पुरानी पेंशन' की बहाली के लिए सरकारी कर्मचारी भी 'चक्रव्यूह 2024' तैयार कर रहे हैं। देश में कर्मचारी, उनके परिवार, पेंशनर और रिश्तेदारों को मिलाकर वह संख्या लगभग 10 करोड़ है। इसी कड़ी में 21 जनवरी को दिल्ली में एनपीएस के खिलाफ एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्सन (एनजेसीए) के बैनर तले होगा। इस नेशनल कन्वेंशन में 50 से अधिक संगठनों के लगभग 700 प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।

विज्ञापन

राज्यों के विधानसभा चुनाव में 'ओपीएस' पर खेलेगी कांग्रेस

अभी तक कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू कर दिया है। पंजाब में भी 'आप' सरकार ने अपना वादा पूरा किया है। झारखंड में ओपीएस लागू हो गई है। भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे राहुल गांधी भी कई बार कह चुके हैं कि ओपीएस, कर्मचारियों का हक है। अब पार्टी ने यह रणनीति बनाई है कि जिस भी राज्य में विधानसभा चुनाव होगा, वहां पुरानी पेंशन लागू करने का वादा प्रमुखता से किया जाएगा। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में, बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारी, कांग्रेस सरकार को सपोर्ट करते हुए दिख रहे हैं। हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी कह दिया है कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस को जीत हासिल होती है, तो कैबिनेट की पहली बैठक में ओपीएस लागू कर दिया जाएगा। कई दूसरे विपक्षी दल भी अब इस मुद्दे पर विचार करने लगे हैं। उधर, आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि जो राज्य, पुरानी पेंशन स्कीम को लागू कर रहे हैं, उन्हें भविष्य में वित्तीय प्रबंधन के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।  

विज्ञापन

ओपीएस पर अब देश के सभी कर्मचारी एक हो गए हैं

एआईडीईएफ के महासचिव और एनजेसीए की संचालन समिति के सदस्य सी. श्रीकुमार ने बताया, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, जिसे एनपीएस कहा जाता है, अब इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन शुरू हो गया है। केंद्र एवं राज्यों के सभी कर्मचारी संगठन ओपीएस पर एकमत हैं। विभिन्न राज्यों में भी अब यह मांग तेजी से उठाई जा रही है। अभी तक केंद्रीय कर्मियों के कई फेडरेशन और यूनियन, अपने-अपने तरीके से एनपीएस के खिलाफ लड़ रहे थे। एआईडीईएफ, जो चार लाख रक्षा नागरिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने सितंबर 2022 में जंतर-मंतर नई दिल्ली में एनपीएस विरोधी धरना दिया था। ओपीएस की बहाली के लिए अब राष्ट्रीय मंच तैयार किया गया है। इसमें रेलवे, रक्षा और अन्य विभागों के अलावा राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन भी शामिल हैं। अब यह फोरम 21 जनवरी को दिल्ली में एनपीएस के खिलाफ एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इसमें एनजेसीए के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा, एम.राघविया सह-संयोजक, एसएन पाठक, सी. श्रीकुमार और अन्य कई बड़े कर्मचारी नेता शामिल होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

एनपीएस को बताया विफल और विनाशकारी

बतौर श्रीकुमार, ओपीएस एक राष्ट्रीय मुद्दा है। पांच राज्य सरकारें, पहले ही एनपीएस को वापस ले चुकी हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि एनपीएस पूरी तरह विफल और विनाशकारी है। इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में ओपीएस, एक बड़ा मुद्दा बनेगा। जो भी दल ओपीएस को लागू करने का वादा करेगा, सरकारी कर्मचारी उसी पार्टी को वोट देंगे। देश के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि केवल सरकारी कर्मचारी, जो कठोर चयन प्रक्रिया के माध्यम से आते हैं, उन्हें पेंशन से वंचित किया जा रहा है। वे अनेक असंतुलित प्रावधानों के अंतर्गत, आचरण नियमों से बंधे हैं, लेकिन उन्हें ही एक परिभाषित और गारंटीकृत पेंशन से वंचित कर दिया गया है।

एनपीएस की वकालत करने वालों को गारंटीकृत पेंशन

राष्ट्रपति, पीएम, सीएम, एमपी, एमएलए से लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि पेंशन के लिए एक पैसा नहीं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आजीवन भर पेंशन मिलती है। बतौर श्रीकुमार, जनप्रतिनिधि रहे लोग बिना किसी योग्य सेवा के पारिवारिक पेंशन के साथ जीवन भर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। दूसरी ओर वही लोग, सरकारी कर्मचारियों को केवल अंशदायी पेंशन मिले, ऐसे नियम और अधिनियम पारित करते हैं। ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है। एनपीएस की वकालत करने वाले सभी लोगों को गारंटीकृत पेंशन मिल रही है। सरकार को अपने राजस्व का केवल चार फीसदी हिस्सा, पेंशन के रूप में खर्च करना पड़ता है। कई दशकों तक देश की सेवा करने वाले पूर्व सरकारी कर्मचारी, राष्ट्रीय संपत्ति हैं। वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना देश का कर्तव्य है। वे 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। उसके बाद वे औसतन अधिकतम 10 से 15 साल तक जीवित रहते हैं। ऐसे में उनकी उपेक्षा कैसे की जा सकती है।

लोकतंत्र में मत पत्र सबसे शक्तिशाली हथियार

एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार ने कहा, लोकतंत्र में मत पत्र सबसे शक्तिशाली हथियार है। हर राजनीतिक दल, जनमत का सम्मान करता है। देश में अगर केंद्र एवं राज्यों के सभी सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों, उनके परिवार और रिश्तेदारों को मिलाकर वह संख्या लगभग 10 करोड़ तक पहुंच जाती है। यह यह एक छोटी संख्या नहीं है। क्या कोई राजनीतिक दल 10 करोड़ की संख्या वाले लोगों के समूह की उपेक्षा करने का साहस कर सकता है। सत्तारूढ़ दलों सहित दूसरी राजनीतिक पार्टियों को एनपीएस पर अपना मन बनाना होगा। उन्हें खुले तौर पर सामने आना पड़ेगा। एनपीएस को खत्म करने की घोषणा करनी होगी। देश में ओपीएस को बहाल करना, समय की मांग है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed