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Karnataka: पांच फीसदी सुविधा शुल्क से परेशान ओला उबर चालक, ओयूडीओए ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
Sun, 27 Nov 2022 05:37 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 27 Nov 2022 05:37 PM IST
सार
ओयूडीओए के प्रमुख तनवीर पाशा ने कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष मामले को ठीक से पेश नहीं करने के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया। पाशा ने कहा, सरकार को कर्नाटक ऑन डिमांड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर्स रूल्स में संशोधन करना चाहिए था।
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ओला और उबर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कर्नाटक की बोम्मई सरकार ने 25 नवंबर को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों को निर्देश दिया था कि वह ऐप आधारित ऑटो एग्रीगेटर्स से यात्री की प्रत्येक सवारी के लिए पांच फीसदी सुविधा शुल्क और वस्तु-सेवा कर (जीएसटी) वसूलें। इसके बाद से ओला उबर ड्राइवर्स एंड ओनर्स एसोसिएशन (ओयूडीओए) और ऐप आधारित वाहन चलाने वाले ड्राइवर आशंकित हैं।
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ओयूडीओए के प्रमुख तनवीर पाशा ने कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष मामले को ठीक से पेश नहीं करने के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया। पाशा ने कहा, सरकार को कर्नाटक ऑन डिमांड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी एग्रीगेटर्स रूल्स में संशोधन करना चाहिए था, क्योंकि इसमें ऑटोरिक्शा का कोई प्रावधान नहीं है।
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पाशा ने कहा, अगर उन्होंने (परिवहन विभाग) ने कोर्ट को उचित जानकारी दी होती, तो अदालत सरकार को नियम में संशोधन करने का निर्देश देती। पाशा ने यह भी आरोप लगाया कि परिवहन विभाग ने बेंगलुरु शहरी जिला के क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण साथ नहीं लिया, जिसके अध्यक्ष बेंगलुरु शहरी जिले उपायुक्त हैं।
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सरकार द्वारा ऑटोरिक्शा की सवारी के लिए निर्धारित न्यूनतम शुल्क तीस रुपये है और इससे ऊपर प्रति किलोमीटर 15 रुपये किराया है। एक ऑटोरिक्शा चालक थिम्मप्पा ने कहा कि यह निर्धारित किराया बहुत ज्यादा नहीं लगता है, लेकिन यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि ये कंपनियां लोगों से कैसे शुल्क लेंगी। उन्होंने कहा, ये ओला-उबर कंपनियां बहुत ज्यादा शुल्क ले रही थीं, जिसके कारण सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। हम नहीं जानते कि नए आदेश का पालन कैसे करेंगे।
एक अन्य ऑटोरिक्शा चालक वेंकटेश. एन ने कहा, अब समय ही बताएगा कि प्रत्येक सवारी पर दरें कैसे तय की जाएंगी और कैसे लोगों से शुल्क लिया जाएगा। ओला कैब्स के एक जनसंपर्क दल के सदस्य ने पांछ फीसदी सुविदा शुल्क पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।