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तेल कंपनियों ने विमान ईंधन पर लगने वाले करों को तर्कसंगत बनाने वाली बाधाओं को उजागर किया

Sun, 08 Sep 2019 07:31 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 08 Sep 2019 07:31 PM IST
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Oil companies exposed barriers to rationalization of taxes on aircraft fuel
प्रतीकात्मक तस्वीर

तेल विपणन कंपनी ने बिक्री कर जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि ये मामले हवाई अड्डों पर उलब्ध कराए जाने वाले विमान ईंधन पर अतिरिक्त शुल्कों को तर्कसंगत बनाने की नागर विमानन मंत्रालय की योजना की राह में बाधक बने हुए हैं। एयरलाइन कंपनियों को देश के हवाई अड्डों पर विमान ईंधन (एटीएफ) भरवाने पर अतिरिक्त शुल्क देना होता है। अधिकारियों ने यह बात कही।

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वर्तमान में एयरलाइन कंपनियां कुछ सेवाओं के लिए कर का भुगतान कर रही हैं। उन्हें किसी भी हवाई अड्डे पर एटीएफ भरवाने पर 'थ्रूपुट शुल्क', 'इंटुप्लेन शुल्क' और 'ईंधन अवसंरचना' शुल्क देना पड़ता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों और हवाई अड्डा परिचालकों के बीच सीधा बिलिंग तंत्र विकसित करने के लिए एक समिति गठित की है ताकि बार-बार लगने वाले करों को हटाया जा सके।
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इस समिति में एयरलाइंस कंपनियों, हवाई अड्डा परिचालक, तेल विपणन कंपनियों और अन्य सेवा प्रदाता इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक, यदि सीधे बिल कटने की व्यवस्था को अमल में लाया जाता है तो एयरलाइंस कंपनियों को सालाना करीब 400 करोड़ रुपये बचेगा। भारत में किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा विमान ईंधन में जाता है। इसलिए विमान ईंधन पर किसी भी प्रकार के कर का कंपनियों पर गहरा असर पड़ता है।
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अधिकारी ने कहा, तेल विपणन कंपनियों ने हमें बताया है कि राज्य-स्तर पर बिक्री कर व्यवस्था के साथ उत्पाद कर व्यवस्था में कुछ प्रावधान हैं, जो सीधे बिलिंग प्रक्रिया को रोक सकता है। अधिकारी ने कहा कि तेल कंपनियां और राज्य सरकारें बिल पर लगने वाले करों से होने वाली आय को खोना नहीं चाहेंगी। उन्होंने कहा कि समिति के जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।

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