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इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में सुषमा स्वराज की आतंकवाद पर खरी-खरी
Fri, 01 Mar 2019 09:44 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Trainee Trainee
Updated Fri, 01 Mar 2019 09:44 AM IST
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ओआईसी में सुषमा स्वराज
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संयुक्त अरब अमीरात में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है। सुषमा स्वराज अबू धाबी में बैठक के उद्घाटन सत्र को सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। यह पहली बार है जब भारत को सम्मानित अतिथि के रूप में ओआईसी बैठक में आमंत्रित किया गया है। इस्लामी सहयोग संगठन 56 देशों का प्रभावशाली समूह है।
अपने संबोधन में सुषमा ने कहा- प्राचीन सभ्यता और महान धर्म से जुड़े देशों के साथ जुड़ने पर सम्मानित महसूस कर रही हूं। मैं यहां एक ऐसे देश के प्रतिनिधि के रूप में खड़ी हूं जो शांति, ज्ञान, विश्वास और परंपराओं का स्रोत रहा है और कई धर्मों का घर और दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था है।
पाकिस्तान ने मंगलवार को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद कैंप पर भारतीय हवाई हमले के मद्देनजर ओआईसी की बैठक में भारत की भागीदारी पर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। पाकिस्तान से कहा कि 48 साल में पहली बार किसी अभियान को अंजाम देने के लिए भारत के लड़ाकू जेट विमान पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में घुस आए।
पाकिस्तान के दबाव के कारण इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओआईसी ने हवाई हमले को "घुसपैठ और हवाई सीमा का उल्लंघन" करार देते हुए इसकी निंदा की और दोनों देशों को बातचीत के जरिए संकट का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने की अपील की।
हालांकि ओआईसी से मिले निमंत्रण के प्रतीकात्मक महत्व के कारण भारत पाकिस्तान की आलोचना की परवाह नहीं कर रहा, क्योंकि 56 सदस्यों वाले इस समूह का संस्थापक सदस्य पाकिस्तान है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नाम नहीं छापने की शर्त पर घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, "ओआईसी में विदेश मंत्री आतंक का मुद्दा उठाए जाने की उम्मीद है।" उन्होंने बताया, “हम भाग लेंगे। (ओआईसी) सचिवालय द्वारा पाकिस्तान के इशारे पर जारी किए गए बयान को बहुत ज्यादा महत्व नहीं दें, यह बयान हमें बैठक में शामिल होने से रोकने के लिए दिया गया है।
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अपने संबोधन में सुषमा ने कहा- प्राचीन सभ्यता और महान धर्म से जुड़े देशों के साथ जुड़ने पर सम्मानित महसूस कर रही हूं। मैं यहां एक ऐसे देश के प्रतिनिधि के रूप में खड़ी हूं जो शांति, ज्ञान, विश्वास और परंपराओं का स्रोत रहा है और कई धर्मों का घर और दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था है।
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EAM Sushma Swaraj at OIC conclave:. OIC members constitute 1/4th of the United Nations and almost a quarter of humanity. India shares much with you, many of us have shared dark days of colonialism pic.twitter.com/qmsinFqZb0
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 1, 2019
पाकिस्तान को करारा झटका
खास बात ये है कि इसका संस्थापक सदस्य पाकिस्तान ही इसमें हिस्सा नहीं ले रहा है। भारत को मेहमान के तौर पर आमंत्रित किए जाने के विरोध में पाकिस्तान ने सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया है। भारत के लिए इसे बड़ी जीत माना जा रहा है और इससे अरब देशों के साथ उसके संबंधों में और मजबूती आएगी।पाकिस्तान ने मंगलवार को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद कैंप पर भारतीय हवाई हमले के मद्देनजर ओआईसी की बैठक में भारत की भागीदारी पर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। पाकिस्तान से कहा कि 48 साल में पहली बार किसी अभियान को अंजाम देने के लिए भारत के लड़ाकू जेट विमान पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में घुस आए।
पाकिस्तान के दबाव के कारण इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओआईसी ने हवाई हमले को "घुसपैठ और हवाई सीमा का उल्लंघन" करार देते हुए इसकी निंदा की और दोनों देशों को बातचीत के जरिए संकट का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने की अपील की।
हालांकि ओआईसी से मिले निमंत्रण के प्रतीकात्मक महत्व के कारण भारत पाकिस्तान की आलोचना की परवाह नहीं कर रहा, क्योंकि 56 सदस्यों वाले इस समूह का संस्थापक सदस्य पाकिस्तान है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नाम नहीं छापने की शर्त पर घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, "ओआईसी में विदेश मंत्री आतंक का मुद्दा उठाए जाने की उम्मीद है।" उन्होंने बताया, “हम भाग लेंगे। (ओआईसी) सचिवालय द्वारा पाकिस्तान के इशारे पर जारी किए गए बयान को बहुत ज्यादा महत्व नहीं दें, यह बयान हमें बैठक में शामिल होने से रोकने के लिए दिया गया है।