तटीय सुरक्षा हुई और मजबूत, गश्ती पोत 'वज्र' को सेवा में किया गया शामिल
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केंद्रीय जहाजरानी मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को गश्ती पोत ‘ओपीवी5-वराड’ को भारतीय तटरक्षक बल को सौंपा। अत्याधुनिक नौवहन एवं संचार उपकरणों से लैस यह पोत भारतीय तटीय सीमाओं की निगरानी बढ़ाने में मदद करेगा। लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड ने 98 मीटर लंबे जहाज को कट्टुपल्ली में अपने यार्ड में तैयार किया है।
मांडविया ने तटरक्षक के महानिदेशक के नटराजन, चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट के प्रमुख पी रवींद्रन की मौजूदगी में चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट पर पोत को सेवा में शामिल किया। वराड एलएंडटी द्वारा विकसित पांचवां पोत है जिसके लिए 2015 में रक्षा मंत्रालय के साथ 1432 करोड़ रुपये का करार हुआ था। तटरक्षक बल के महानिदेशक नटराजन ने कहा, इस पोत से पहले ‘आईसीजीसी वराड’ 28 वर्षों तक सेवा में रहा।
उन्होंने कहा, आवंटित निधि का 90 प्रतिशत पोतों को स्वदेशी बनाने पर खर्च किया जाता है। नटराजन ने कहा, अभी 61 जहाजों का निर्माण कार्य जारी है। 2025 तक 200 जहाजों को तटरक्षक बल में शामिल करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 100 हवाई जहाजों को भी शामिल किया जा सकता है। अभी 65 हवाई जहाज तटरक्षक बल के पास हैं।
पोत की विशेषताएं
‘ओपीवी5- वराड’ 30 एमएम और 12.7 एमएम बंदूकों से लैस है। इसमें इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम और उच्च क्षमता वाली बाह्य अग्निशमन प्रणाली शामिल है। यह रात में उड़ने में सक्षम दो इंजन वाले हल्के हेलिकॉप्टरों को भी ढो सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 26 नॉट्स है और यह एक बार में बिना रुके 10,000 किलोमीटर की यात्रा पर जा सकता है। इस पर 11 अधिकारी और 91 क्रू सदस्य तैनात होंगे।