बीएसएफ में सुरक्षा सहायकों को लेकर नहीं चलेगी अफसरों की मनमर्जी, तबादला होने पर नहीं ले जा सकेंगे साथ
बीएसएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी डीजी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि कोई भी अधिकारी सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजे...
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मुख्यालय ने अपने अफसरों के लिए खास आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अधिकारियों को सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजने के लिए कहा गया है। बीएसएफ ने यह आदेश उन अफसरों के लिए आदेश जारी किया है, जो अपनी सुविधा अनुसार और मनमर्जी से सुरक्षा सहायक रखते थे।
ये अधिकारी जहां भी जाते थे, ये सहायक उनके साथ ही रहते थे। बीएसएफ के सूत्रों का कहना है, बहुत से अफसर तो ऐसे रहे हैं जो दस-बारह साल से सुरक्षा सहायकों को अपने पास रखे हुए हैं।
बीएसएफ में अगर किसी अफसर का तबादला हो जाता है, तो वह मुख्यालय में पैरवी लगा कर उसे अपने साथ ले जाता था। सुरक्षा सहायकों में ड्राइवर, गार्ड या घर पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल होते हैं।
बीएसएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी डीजी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि कोई भी अधिकारी सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजे। वह जिस भी नई पोस्टिंग पर जाता है, वहां से सुरक्षा सहायक ले सकता है। बीएसएफ में हर जगह काबिल जवान हैं।
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बता दें कि बीएसएफ में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दिल्ली मुख्यालय में तैनात बल के एक अधिकारी बताते हैं कि इससे सरकार को भी आर्थिक नुकसान होता है। अब कोई अधिकारी अपनी नई पोस्टिंग पर जाता है और वह अपने सुरक्षा सहायक का तबादला भी वहीं करा लेता है तो ऐसे में करीब 75 हजार रुपये, जिसमें ट्रैवलिंग अलाउंस, सामान ढोने के लिए गाड़ी का किराया व दूसरे भत्ते शामिल है, खर्च हो जाते हैं।
कई अफसर तो ऐसे बताए गए हैं, जिनके पास घर व कार्यालय के लिए अलग अलग सुरक्षा सहायक होता है। सातवें वित्त आयोग की सिफारिशों में सिपाही को अफसरों के घर या उनके दूसरे निजी कार्य में लगाने पर बैन लगाया गया है।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सभी डीजी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखित में यह आश्वासन दे चुके हैं कि वे अपने सरकारी आवास या कार्यालय में बल की मैनपावर का दुरुपयोग नहीं करेंगे। डीजी के आदेशों की कॉपी अमर उजाला डॉट कॉम के पास है।
बल के के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने लिखित में सवाल मांगे। अमर उजाला द्वारा सवाल भेजे जाने पर उनका उत्तर नहीं मिल पाया।