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'मिशन अपनों तक' का कमाल: ओडिया टैटू के जरिए 35 साल बाद मिला परिवार, पर क्यों अधूरा रहा प्रमिला का इंतजार?
Mon, 05 Oct 2026 06:40 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, केंद्रपाड़ा, ओडिशा
पीटीआई, केंद्रपाड़ा, ओडिशा
Published by: अमन मौर्या
Updated Mon, 05 Oct 2026 06:40 PM IST
सार
हाथ पर ओडिया भाषा में बने टैटू की मदद से 35 साल से लापता 70 वर्षीय प्रमिला मलिक को ओडिशा में उनके परिवार से मिलाया गया। हिमाचल प्रदेश सरकार की पहल 'मिशन अपनों तक' की मदद से परिवार से मिली महिला।
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परिवार के साथ प्रमिला मलिक
- फोटो : x
विस्तार
ओडिशा में टैटू से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। एक टैटू की वजह से 35 साल पहले परिवार से बिछड़ गई महिला दोबारा अपने परिवार से मिली। हाथ पर ओडिया लिपि में बने एक टैटू ने दशकों से परिवार से बिछड़ी 70 साल की महिला की पहचान करने और उन्हें ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में उनके रिश्तेदारों से मिलाने में मदद की। पुलिस ने सोमवार को बताया कि बालुरिया गांव की रहने वाली प्रमिला मलिक को हिमाचल प्रदेश के एक वृद्धाश्रम में ढूंढा गया और चार अक्टूबर को उनके गृहनगर वापस लाया गया। उनके बेटे ध्रुव चरण मलिक के अनुसार, प्रमिला ने दशकों पहले अपना ससुराल और मायका छोड़ दिया था और उसके बाद परिवार से उनका संपर्क टूट गया था।
ये भी पढ़ें: 'झोला उठाने का समय जल्दी आ रहा है': महंगी दवाओं को लेकर कांग्रेस का पीएम मोदी पर बड़ा हमला, क्या लगाए आरोप?
कितने साल बाद हुई वापसी?
बेटे ध्रुव चरण मलिक ने बताया कि वह लगभग 35 साल बाद घर लौटीं, लेकिन अपने पति दीनबंधु से नहीं मिल सकीं, जिनका करीब छह महीने पहले निधन हो गया था। पुलिस ने बताया कि उनके हाथ पर ओडिया लिपि में बने टैटू से पता चला कि वह ओडिशा की रहने वाली हैं, जिसके बाद अधिकारियों ने उनके परिवार की तलाश शुरू की और उन्हें केंद्रपाड़ा जिले के पट्टमुंडई इलाके में ढूंढ निकाला।
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कैसे शुरू हुई मुहिम?
हिमाचल प्रदेश सरकार की पहल 'मिशन अपनों तक' ने प्रमिला को परिवार से मिलाने में मदद की। सरकार के इस मिशन का उद्देश्य बेघर, लापता, और कमजोर लोगों की पहचान करके उन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलावाना है। इस मिशन के तहत स्थानीय अधिकारी स्मृतिका नेगी हिमाचल के धर्मशाला स्थित एक वेलफेयर अफसर के साथ वृद्धाश्रम गईं और प्रमिला से उनके अतीत के बारे में जानकारी जुटाई। हालांकि, प्रमिला की यादें धुंधली थीं, लेकिन उन्हें ओडिशा की कई जगहों के नाम याद थे।
टीम को एक अहम सुराग उनके हाथ पर बना टैटू था, जोकि ओडिया भाषा में था। प्रमिला को कटक, ओडिशा के और जगहों के नाम भी याद थे, इससे उनके मूल स्थान की जानकारी मिलने में मदद मिली।
उनके अतीत से जुड़ी जानकारी से संबंधित छोटे-छोटे वीडियो 'इंडिया केयर्स' के साथ साझा किए गए। इसके बाद ओडिशा पुलिस ने भी इस मुहिम में शामिल हो गई। ओडिशा में पुलिस अधिकारियों और स्थानीय संपर्कों के जरिए खोज का दायरा और बढ़ाया गया। इसके बाद ओडिशा पुलिस के अमित कुमार मलिक ने इन कड़ियों पर काम किया और प्रमिला के परिवार से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने में मदद मिली। आखिरकार अधिकारी केंद्रपाड़ा में रहने वाले प्रमिला के परिवार तक पहुंच गए।
इतने साल कहां थी प्रमिला?
संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रमिला 2011 से 2018 तक हिमाचल प्रदेश के शिमला में मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट में रहीं। इसके बाद उन्हें शिमला के नारी निकेतन में भर्ती कराया गया और बाद में फरवरी 2023 में मंडी जिले के भांगरोटू स्थित वृद्धाश्रम में भेज दिया गया। हिमाचल प्रदेश के बल्ह के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के नेतृत्व वाली एक टीम ने ओडिशा पुलिस की मदद से उनकी पहचान और परिवार का पता लगाया। इसके बाद प्रमिला ने ओडिशा लौटने और अपने परिवार से मिलने की इच्छा जताई।
ये भी पढ़ें: 'पारदर्शी नहीं है चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति': मणिशंकर अय्यर ने सीईसी पर उठाए सवाल, काम के तरीके पर क्या कहा?
पुलिस ने क्या कहा?
केंद्रपाड़ा एसपी के निर्देश पर, 26 सितंबर को एक विशेष पुलिस टीम बनाई गई और हिमाचल प्रदेश भेजी गई। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने के बाद, टीम प्रमिला को वापस ओडिशा ले आई। पुलिस ने बताया कि चार अक्तूबर को उन्हें उनके गृहनगर में परिवार से मिलाया गया। एक अधिकारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों के बीच तालमेल से यह मिलन संभव हो पाया और प्रमिला की सुरक्षा व भलाई के लिए इंतजाम किए गए।
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कितने साल बाद हुई वापसी?
बेटे ध्रुव चरण मलिक ने बताया कि वह लगभग 35 साल बाद घर लौटीं, लेकिन अपने पति दीनबंधु से नहीं मिल सकीं, जिनका करीब छह महीने पहले निधन हो गया था। पुलिस ने बताया कि उनके हाथ पर ओडिया लिपि में बने टैटू से पता चला कि वह ओडिशा की रहने वाली हैं, जिसके बाद अधिकारियों ने उनके परिवार की तलाश शुरू की और उन्हें केंद्रपाड़ा जिले के पट्टमुंडई इलाके में ढूंढ निकाला।
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कैसे शुरू हुई मुहिम?
हिमाचल प्रदेश सरकार की पहल 'मिशन अपनों तक' ने प्रमिला को परिवार से मिलाने में मदद की। सरकार के इस मिशन का उद्देश्य बेघर, लापता, और कमजोर लोगों की पहचान करके उन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलावाना है। इस मिशन के तहत स्थानीय अधिकारी स्मृतिका नेगी हिमाचल के धर्मशाला स्थित एक वेलफेयर अफसर के साथ वृद्धाश्रम गईं और प्रमिला से उनके अतीत के बारे में जानकारी जुटाई। हालांकि, प्रमिला की यादें धुंधली थीं, लेकिन उन्हें ओडिशा की कई जगहों के नाम याद थे।
टीम को एक अहम सुराग उनके हाथ पर बना टैटू था, जोकि ओडिया भाषा में था। प्रमिला को कटक, ओडिशा के और जगहों के नाम भी याद थे, इससे उनके मूल स्थान की जानकारी मिलने में मदद मिली।
उनके अतीत से जुड़ी जानकारी से संबंधित छोटे-छोटे वीडियो 'इंडिया केयर्स' के साथ साझा किए गए। इसके बाद ओडिशा पुलिस ने भी इस मुहिम में शामिल हो गई। ओडिशा में पुलिस अधिकारियों और स्थानीय संपर्कों के जरिए खोज का दायरा और बढ़ाया गया। इसके बाद ओडिशा पुलिस के अमित कुमार मलिक ने इन कड़ियों पर काम किया और प्रमिला के परिवार से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने में मदद मिली। आखिरकार अधिकारी केंद्रपाड़ा में रहने वाले प्रमिला के परिवार तक पहुंच गए।
इतने साल कहां थी प्रमिला?
संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रमिला 2011 से 2018 तक हिमाचल प्रदेश के शिमला में मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट में रहीं। इसके बाद उन्हें शिमला के नारी निकेतन में भर्ती कराया गया और बाद में फरवरी 2023 में मंडी जिले के भांगरोटू स्थित वृद्धाश्रम में भेज दिया गया। हिमाचल प्रदेश के बल्ह के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के नेतृत्व वाली एक टीम ने ओडिशा पुलिस की मदद से उनकी पहचान और परिवार का पता लगाया। इसके बाद प्रमिला ने ओडिशा लौटने और अपने परिवार से मिलने की इच्छा जताई।
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पुलिस ने क्या कहा?
केंद्रपाड़ा एसपी के निर्देश पर, 26 सितंबर को एक विशेष पुलिस टीम बनाई गई और हिमाचल प्रदेश भेजी गई। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने के बाद, टीम प्रमिला को वापस ओडिशा ले आई। पुलिस ने बताया कि चार अक्तूबर को उन्हें उनके गृहनगर में परिवार से मिलाया गया। एक अधिकारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों के बीच तालमेल से यह मिलन संभव हो पाया और प्रमिला की सुरक्षा व भलाई के लिए इंतजाम किए गए।