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KIIT: क्या है ओडिशा की यूनिवर्सिटी में नेपाली छात्रा की मौत का मामला, कैसे दांव पर लगा हजार छात्रों का भविष्य?

Fri, 21 Feb 2025 03:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 21 Feb 2025 03:11 PM IST
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सार
कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में नेपाली छात्रा की मौत से जुड़ा यह विवाद क्या है? इस मामले में पूरा घटनाक्रम क्या रहा है? केआईआईटी कैसे इस मामले में एक के बाद एक उलझता चला गया? सरकारी और राजनयिक स्तर पर इस मामले में क्या हुआ है? आइये जानते हैं...
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Odisha Kalinga Institute of Industrial Technology Nepal Girl Student Death Timeline explained CM Majhi PM Oli
नेपाल की छात्रा की मौत के मामले में प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) हाल ही के दिनों में चर्चा में रही है। इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की यह चर्चा किसी उपलब्धि के चलते नहीं, बल्कि बीते कुछ दिनों में उभरते एक विवाद की वजह से हुई है। मामला है केआईआईटी में एक छात्रा की मौत का, जिसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी हैं। स्थिति तो यहां तक आ गई कि मामले में ओडिशा के यूनिवर्सिटी को स्टूडेंट्स से माफी तक मांगनी पड़ गई और राज्य की सरकार ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है। इतना ही नहीं मामले ने राजनयिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया और चिंताएं गहरा गईं। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में नेपाली छात्रा की मौत से जुड़ा यह विवाद क्या है? इस मामले में पूरा घटनाक्रम क्या रहा है? केआईआईटी कैसे इस मामले में एक के बाद एक उलझता चला गया? सरकारी और राजनयिक स्तर पर इस मामले में क्या हुआ है? आइये जानते हैं...

पहले जानें- क्या है नेपाली छात्रा की मौत का मामला?
केआईआईटी से बीटेक की तीसरे साल की छात्रा प्रकृति लामसाल (20) का कैंपस में ही स्थित हॉस्टल में शव मिला था। बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसके बाद प्रकृति के माता-पिता को उसके निधन की जानकारी दी और उसकी मौत को आत्महत्या बताया। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। 

केआईआईटी में तनाव क्यों हुआ?
नेपाली छात्रा की मौत की खबर सामने आते ही कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। यहां बड़े स्तर पर स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। 





 

केआईआईटी प्रशासन के कदमों पर कैसे उठे सवाल?
नेपाल की छात्रा की मौत के मामले में जब यूनिवर्सिटी प्रशासन पर शिकायत के बावजूद आरोपी छात्रों पर कार्रवाई न होने की बात सामने आई तो यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने केआईआईटी के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन किया। इनमें बड़ी संख्या नेपाल के छात्रों की रही, जिन्होंने अपनी सुरक्षा का मसला उठाया। इस बीच केआईआईटी प्रशासन ने नाराज विदेशी छात्रों से बातचीत की कोशिश की। हालांकि, इससे स्थिति नियंत्रण में नहीं आई। बताया जाता है कि इस दौरान यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी नेपाली छात्रों से अभद्र व्यवहार किया और उन्हें अपशब्द कहे। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी में लगे कर्मियों ने भी इन स्टूडेंट्स के साथ बलप्रयोग किया। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गए। अमर उजाला इन वीडियोज की पुष्टि नहीं करता। 

स्थिति नियंत्रण में न आते देख यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नेपाली स्टूडेंट्स को वापस नेपाल भेजने का फैसला किया। रिपोर्ट्स की मानें तो यूनिवर्सिटी का यह फैसला उल्टा पड़ गया। दरअसल, जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले के तहत नेपाली स्टूडेंट्स के लिए यूनिवर्सिटी को अनिश्चितकाल तक बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले करीब 1000 से ज्यादा नेपाली छात्र-छात्राओं को बिना उनसे पूछे उनके घरों के लिए रवाना किया जाने लगा। 

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना ही उन्हें बसों में बिठाकर कटक रेलवे स्टेशन रवाना कर दिया गया, जो कि यूनिवर्सिटी से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बाद उन्हें रेलवे स्टेशन पर अपने हाल पर छोड़ दिया गया। कई नेपाली छात्र-छात्राओं के पास इस दौरान घर जाने के लिए ट्रेन टिकट तक नहीं था। एक छात्र ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया था कि उनकी परीक्षाएं 28 फरवरी से होनी हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें हॉस्टल खाली करने के लिए कह दिया और रेलवे स्टेशन तक छुड़वा दिया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उनके पास खाने और पीने का सामान खरीदने तक के पैसे नहीं थे। 

राजनयिक स्तर तक कैसे पहुंच गया मामला?
इस मामले में वीडियोज के वायरल होने के बाद नेपाल सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया पर नेपाली छात्रों को जबरदस्ती केआईआईटी से निकालने की घटना पर चिंता जाहिर की और भारत सरकार से दखल देने की मांग की। 



इसके बाद ओली ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली में स्थित नेपाल दूतावास के अधिकारियों को भुवनेश्वर जाकर प्रभावित छात्रों की मदद के लिए कहा गया है। दूतावास ने सुनिश्चित किया है कि जो छात्र कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं वे या तो हॉस्टल में रहें या फिर अपनी मर्जी से घर लौट जाएं। 

राजनयिक हस्तक्षेप के बाद सख्त हुई ओडिशा सरकार?
नेपाल सरकार के दखल के बाद ओडिशा सरकार ने मामले का संज्ञान लिया। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कहा कि नेपाली प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह हमारे राज्य की बेटी थी। हम उसे बाहरी नहीं मानते। हमने नेपाल के विदेश मंत्री से भी बात की और उन्होंने हमारे द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया। हम नेपाली विद्यार्थियों के माता-पिता और छात्रों का विश्वास जीतने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेंगे। इस संबंध में नेपाल की विदेश मंत्री डॉ. आरजू राणा देउबा ने भी मंत्री सूर्यवंशी सूरज से फोन पर बात की।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भारत-नेपाल के करीबी संबंधों के मद्देनजर इस मामले को पूरी गंभीरता से देखने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि केआईआईटी को नेपाली छात्रों को जबरन हॉस्टल से बाहर नहीं करना चाहिए था। इसी के साथ ओडिशा सरकार ने केआईआईटी को आदेश दिया कि वह नेपाली छात्रों को वापस कैंपस में भेजे। 



ओडिशा सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया। टीम के अन्य सदस्य उच्च शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव हैं। इस समिति ने शुक्रवार (21 फरवरी) को ही केआईआईटी के संस्थापक अच्युत सामंत को अपने समक्ष पेश होने का आदेश दिया।

सरकार के दखल के बाद क्या हुआ?
ओडिशा सरकार के दखल के बाद 18 फरवरी को केआईआईटी के कुलपति प्रोफेसर सरणजीत सिंह ने मामले का संज्ञान लिया और नेपाली छात्रों से माफी मांगी। उन्होंने बताया कि नेपाली छात्रों को हॉस्टल से निकालने का फैसला बड़ी गलती था और यूनिवर्सिटी के जिन कर्मियों ने स्टूडेंट्स के खिलाफ गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियां कीं, उन्हें सेवा से हटा दिया गया है। इसे लेकर केआईआईटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स एक पत्र भी जारी किया। वीसी ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल करने वाली सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है। उन्होंने नेपाली स्टूडेंट्स से क्लासेज में लौटने की अपील की। 

इतना ही नहीं केआईआईटी ने छात्रा की मौत के मामले में कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की। इनमें हॉस्टल के दो वरिष्ठ अधिकारी और इंटरनेशनल रिलेशन ऑफिस (आईआरओ) पर जांच बिठा दी गई है और इसके पूरे होने तक उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही लड़कियों के हॉस्टल के निदेशक और कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर को भी सेवा से हटा दिया गया। इन अधिकारियों ने अपनी टिप्पणियों को लेकर वीडियो संदेश के जरिए माफी भी मांगी।

मामले में आरोपियों का क्या हुआ?
  • इस घटना के बाद पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई। भुवनेश्वर के डिप्टी कमिश्नर पिनाक मिश्रा ने बताया कि लड़की की मौत के मामले में एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है। वह एक बड़े नेता का बेटा है। उस पर नेपाली लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। उसे  नेपाली छात्रा की मौत के कुछ घंटों बाद शहर से भागने की कोशिश करते हुए यहां बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ा गया था। उस पर छात्रा को ब्लैकमेल करने और गाली-गलौज करने का आरोप है।
  • इसके अलावा केआईआईटी में मानव संसाधन महानिदेशक सिबानंद मिश्रा, निदेशक (प्रशासन) प्रताप कुमार चामुपति और छात्रावास निदेशक सुधीर कुमार रथ को भी गिरफ्तार किया गया। इन सभी को बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई।
  • भुवनेश्वर पुलिस ने इस मामले में उन दो सुरक्षाकर्मियों को भी गिरफ्तार किया, जिन पर प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स के साथ बल प्रयोग करने का आरोप लगा था। पुलिस ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि केआईआईटी के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो और वे हॉस्टल में सुरक्षित रहें।
  • पुलिस ने बताया कि लड़की का परिवार उसका शव लेने के लिए ओडिशा आया था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को यूनिवर्सिटी में कुछ साथी छात्रों द्वारा ब्लैकमेल किया गया था, जिसके बाद उसने यह कदम उठाया। 

लड़की के माता-पिता ने इस घटना पर क्या कहा?
केआईआईटी कैंपस हॉस्टल में आत्महत्या करने वाली लड़की के माता-पिता ने इस घटना पर दुख जाहिर किया। उन्होंने बताया कि प्रकृति की आत्महत्या की खबर उन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन से करीब 5-5.30 बजे के आसपास मिली थी। इससे महज दो घंटे पहले ही उनकी प्रकृति से बात हुई थी। उसने कहा था कि वह यूनिवर्सिटी फेस्ट में हिस्सा लेने जा रही है और लौटने के बाद बात करेगी। 

प्रकृति को याद करते हुए उसके परिवारवालों ने कहा कि प्रकृति मेधावी छात्रा थी। वह शुरुआत से ही पढ़ाई में काफी तेज रही थी और आईटी सेक्टर में अपना नाम बनाना चाहती थी। लेकिन वह खुलकर बात नहीं कर पाती थी। 

प्रकृति के पिता सुनील लामसाल ने बताया कि 2022 में कलिंग इंस्टीट्यूट ने नेपाल के काठमांडू में एक सम्मेलन किया था, जहां नेपाली छात्रों को आकर्षित करने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया गया। इससे आकर्षित होने के बाद ही उन्होंने प्रकृति को पढ़ने के लिए ओडिशा भेजने का फैसला किया। प्रकृति के साथ उसके दो भाई (कजिन) ने भी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था।

उन्होंने कहा कि उनकी बेटी तो चली गई, लेकिन किसी और छात्र-छात्रा के साथ ऐसा नहीं होनी चाहिए। यहां लोग दूर-दराज के इलाकों से पढ़ने आते हैं।  

केआईआईटी में अभी कैसे हैं हालात?
20 फरवरी के हालात को देखा जाए तो केआईआईटी में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। छात्र कक्षाओं में लौटने लगे हैं। देखा जाए तो परिसर के बाहर विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा प्रदर्शन जारी है, जिसमें नेपाली छात्रा की मौत और नेपाली छात्रों पर हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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