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High Court: ओडिशा हाईकोर्ट का केंद्र को सख्त संदेश, कहा- शहीदों के परिवारों का भरोसा न टूटे; जानें मामला

Wed, 21 Jan 2026 11:36 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 21 Jan 2026 11:36 PM IST
सार

उड़ीसा हाईकोर्ट ने 2007 के श्रीनगर आतंकी हमले में दिव्यांग हुए सीआरपीएफ जवान की पत्नी को सहानुभूति के आधार पर हेड कांस्टेबल पद पर नौकरी देने का आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सैनिक इस भरोसे पर देश की रक्षा करते हैं कि संकट में उनके परिवार का साथ दिया जाएगा। आइए पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।

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Odisha High Court to central government says trust of martyrs families should not be broken
ओडिशा हाईकोर्ट - फोटो : आधिकारिक वेबसाइट (orissahighcourt.nic.in)

विस्तार

उड़ीसा हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह वर्ष 2007 में श्रीनगर में हुए आतंकी हमले में दिव्यांग हुए सीआरपीएफ कांस्टेबल की पत्नी को सहानुभूति के आधार पर हेड कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति दे। बम धमाके में घायल जवान को बाद में सेवा से हटा दिया गया था।
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जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपद और जस्टिस चित्तरंजन दास की पीठ ने प्रसिद्ध लेखक जॉर्ज ओरवेल का हवाला देते हुए कहा कि आम लोग शांति से इसलिए सो पाते हैं, क्योंकि सैनिक उनके लिए हिंसा झेलने को तैयार रहते हैं। अदालत ने कहा कि सैनिक यह विश्वास लेकर सीमा पर डटे रहते हैं कि अगर उन्हें कुछ होता है तो सरकार और समाज उनके परिवार की मदद करेगा। हमें इस भरोसे को टूटने नहीं देना चाहिए। हाईकोर्ट ने एकल पीठ के पहले के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि जो समाज अपने रक्षा कर्मियों का सम्मान नहीं करता, वह खुद को ही नुकसान पहुंचाता है। 
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जस्टिस श्रीपद ने चेतावनी दी कि अगर देश की रक्षा करने वालों को पर्याप्त सम्मान और सहयोग नहीं मिला तो राष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। यह मामला उस सीआरपीएफ जवान से जुड़ा है, जो 23 जनवरी 2007 को श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान हुए आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे 7 मार्च 2014 को चिकित्सकीय आधार पर घर भेजा गया और 2024 में सेवा से हटा दिया गया। इसके बाद से दंपति नौकरी की मांग को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

सरकार के रवैये पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अदालत ने कहा कि वर्षों तक चले इस संघर्ष में दंपति को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। कोर्ट ने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए इसे औपनिवेशिक दौर की नौकरशाही सोच जैसा बताया और संविधान के अनुच्छेद 41 का हवाला देते हुए कहा कि चिकित्सकीय अक्षमता के कारण बेरोजगारी की स्थिति में राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह सहायता प्रदान करे।

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