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ओडिशा में भूस्खलन: सोते-सोते काल के गाल में समा गया पूरा परिवार, मलबे से निकले पांच शव; छह लोग अब भी लापता
Thu, 05 Nov 2026 09:46 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, भुवनेश्वर।
पीटीआई, भुवनेश्वर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 05 Nov 2026 09:46 PM IST
सार
ओडिशा के गंजाम जिले के घिड़ीपाबली गांव में भूस्खलन से मरने वालों की संख्या सात हो गई है, जबकि छह लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में एक ही परिवार के पांच सदस्य शामिल हैं, जिनमें तीन बच्चे हैं। चक्रवात और उसके बाद आई बाढ़ से राज्य में कुल 11 लोगों की मौत हुई है। ओडिशा सरकार ने केंद्र से 2,526 करोड़ रुपये की सहायता और स्थायी आपदा प्रबंधन के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा है।
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ओडिशा में तबाही
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ओडिशा के गंजाम जिले के भूस्खलन प्रभावित घिड़ीपाबली गांव में गुरुवार को पांच और शव बरामद किए गए। इसके साथ ही गांव में मरने वालों की संख्या सात हो गई है, जबकि छह लोग अब भी लापता हैं। ये सभी 28 अक्तूबर को आए चक्रवात अर्नब और उसके बाद हुई बाढ़ व भूस्खलन की चपेट में आए थे। कंधमाल के जिला कलेक्टर वेदभूषण ने बताया कि गुरुवार को दिन में दो शव मिले थे, जबकि तलाशी अभियान खत्म होने तक तीन और शव बरामद किए गए।
एक ही परिवार के पांच लोगों की गई जान
बरामद किए गए पांचों शव एक ही परिवार के सदस्यों के थे। इनमें 25 वर्षीय बिजया प्रधान, उनकी 27 वर्षीय पत्नी भूमिका, सात साल का बेटा अरुणा, छह साल की बेटी बिजयालक्ष्मी और एक साल की बेटी बागरी शामिल हैं। परिजनों ने घटनास्थल पर ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। प्रशासन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंतिम संस्कार में मदद की। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और मृतकों के परिजनों को जरूरी मुआवजा दिया जाएगा।
सुबह तीन बजे आया भूस्खलन, मलबे में दबे घर
कलेक्टर के मुताबिक, 28 अक्तूबर की सुबह करीब तीन बजे गंजाम और कंधमाल जिले की सीमा के पास भंजनगर ब्लॉक के घिड़ीपाबली गांव में लगातार भूस्खलन हुआ। उस समय गांव के लोग अपने घरों में सो रहे थे। पहाड़ी पर बसे इस गांव के सात घरों में से नौ घर चट्टानों, उखड़े पेड़ों और मिट्टी के नीचे दब गए। पहाड़ी से पानी भी तेजी से नीचे आया। हालांकि, गांव के 13 लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। बाद में उन्होंने कंधमाल जिले के राहत शिविर में शरण ली। चक्रवात और उसके बाद आई बाढ़ व भूस्खलन से ओडिशा में मरने वालों की कुल संख्या अब 11 हो गई है। इससे पहले सरकार ने कंधमाल में तीन और गजपति में एक मौत की पुष्टि की थी।
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राहत शिविर में रह रहे लोग, गांव लौटना नहीं चाहतीं रिनीमा
बचाव अभियान बुधवार को खराब मौसम के कारण रोक दिया गया था। अब इसे फिर जारी रखा गया है। ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन सेवा और रेलवे की टीमें तलाशी अभियान में जुटी हैं। गांव के बचे लोगों को कंधमाल के किलापंगा प्राथमिक विद्यालय स्थित राहत शिविर में रखा गया है। हादसे में अपने पति और रिश्तेदारों को खोने वाली 26 वर्षीय रिनीमा मलिक ने कहा कि वह अब घिड़ीपाबली वापस नहीं जाना चाहतीं। उनके दो बच्चे हैं और वह गांव से बाहर रहकर उनका पालन-पोषण करना चाहती हैं। उन्होंने सरकार से पुनर्वास की मांग की है। आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार गांव के लोगों को घर उपलब्ध कराएगी और उनका पुनर्वास करेगी। चूंकि गांव गंजाम जिले में आता है, इसलिए पुनर्वास की जिम्मेदारी वहां के प्रशासन की होगी।
यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध पर घिरे रक्षा मंत्री हेगसेथ: डेमोक्रेट्स-रिपब्लिकन ने मांगा इस्तीफा, ट्रंप बोले- पद पर बने रहेंगे
केंद्र से 2,526 करोड़ रुपये की सहायता मांगी
इस बीच, ओडिशा सरकार ने चक्रवात अर्नब और दक्षिणी जिलों में आई बाढ़ से हुए नुकसान के लिए केंद्र से 2,526 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। इसके अलावा आपदाओं से स्थायी रूप से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की मांग भी की गई है। विशेष राहत आयुक्त राजेश पी पाटिल ने बताया कि इस राशि से सिंचाई सुविधाओं और आपदा में क्षतिग्रस्त दूसरे बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय टीम को नुकसान का ब्योरा सौंपा गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी राज्य में बार-बार आने वाली बाढ़, चक्रवात और लू जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत बताई। उन्होंने आपदा से सुरक्षित सड़क, बिजली और दूसरे बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया।
रुशिकुल्या नदी के उफान से खेतों और मकानों को नुकसान
केंद्रीय टीम के प्रमुख रविशंकर ने बताया कि गंजाम और गजपति जिलों में बाढ़ का व्यापक असर हुआ है। गंजाम में रुशिकुल्या नदी का पानी फैलने से कई इलाकों में खेतों, सड़कों, घरों और सरकारी कार्यालयों में रेत जमा हो गई है। कई मकान गिरे नहीं हैं, लेकिन उनकी संरचना कमजोर हो गई है। नदी से गाद निकालने की जरूरत भी बताई गई है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रविशंकर के नेतृत्व में आई आठ सदस्यीय टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम में कृषि, वित्त, जल शक्ति, बिजली, सड़क परिवहन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक प्रतिनिधि शामिल है। टीम सात से आठ दिनों में नुकसान का पूरा आकलन करेगी और 8 से 10 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी।
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एक ही परिवार के पांच लोगों की गई जान
बरामद किए गए पांचों शव एक ही परिवार के सदस्यों के थे। इनमें 25 वर्षीय बिजया प्रधान, उनकी 27 वर्षीय पत्नी भूमिका, सात साल का बेटा अरुणा, छह साल की बेटी बिजयालक्ष्मी और एक साल की बेटी बागरी शामिल हैं। परिजनों ने घटनास्थल पर ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। प्रशासन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंतिम संस्कार में मदद की। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और मृतकों के परिजनों को जरूरी मुआवजा दिया जाएगा।
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सुबह तीन बजे आया भूस्खलन, मलबे में दबे घर
कलेक्टर के मुताबिक, 28 अक्तूबर की सुबह करीब तीन बजे गंजाम और कंधमाल जिले की सीमा के पास भंजनगर ब्लॉक के घिड़ीपाबली गांव में लगातार भूस्खलन हुआ। उस समय गांव के लोग अपने घरों में सो रहे थे। पहाड़ी पर बसे इस गांव के सात घरों में से नौ घर चट्टानों, उखड़े पेड़ों और मिट्टी के नीचे दब गए। पहाड़ी से पानी भी तेजी से नीचे आया। हालांकि, गांव के 13 लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। बाद में उन्होंने कंधमाल जिले के राहत शिविर में शरण ली। चक्रवात और उसके बाद आई बाढ़ व भूस्खलन से ओडिशा में मरने वालों की कुल संख्या अब 11 हो गई है। इससे पहले सरकार ने कंधमाल में तीन और गजपति में एक मौत की पुष्टि की थी।
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राहत शिविर में रह रहे लोग, गांव लौटना नहीं चाहतीं रिनीमा
बचाव अभियान बुधवार को खराब मौसम के कारण रोक दिया गया था। अब इसे फिर जारी रखा गया है। ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन सेवा और रेलवे की टीमें तलाशी अभियान में जुटी हैं। गांव के बचे लोगों को कंधमाल के किलापंगा प्राथमिक विद्यालय स्थित राहत शिविर में रखा गया है। हादसे में अपने पति और रिश्तेदारों को खोने वाली 26 वर्षीय रिनीमा मलिक ने कहा कि वह अब घिड़ीपाबली वापस नहीं जाना चाहतीं। उनके दो बच्चे हैं और वह गांव से बाहर रहकर उनका पालन-पोषण करना चाहती हैं। उन्होंने सरकार से पुनर्वास की मांग की है। आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार गांव के लोगों को घर उपलब्ध कराएगी और उनका पुनर्वास करेगी। चूंकि गांव गंजाम जिले में आता है, इसलिए पुनर्वास की जिम्मेदारी वहां के प्रशासन की होगी।
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केंद्र से 2,526 करोड़ रुपये की सहायता मांगी
इस बीच, ओडिशा सरकार ने चक्रवात अर्नब और दक्षिणी जिलों में आई बाढ़ से हुए नुकसान के लिए केंद्र से 2,526 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। इसके अलावा आपदाओं से स्थायी रूप से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की मांग भी की गई है। विशेष राहत आयुक्त राजेश पी पाटिल ने बताया कि इस राशि से सिंचाई सुविधाओं और आपदा में क्षतिग्रस्त दूसरे बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय टीम को नुकसान का ब्योरा सौंपा गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी राज्य में बार-बार आने वाली बाढ़, चक्रवात और लू जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत बताई। उन्होंने आपदा से सुरक्षित सड़क, बिजली और दूसरे बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया।
रुशिकुल्या नदी के उफान से खेतों और मकानों को नुकसान
केंद्रीय टीम के प्रमुख रविशंकर ने बताया कि गंजाम और गजपति जिलों में बाढ़ का व्यापक असर हुआ है। गंजाम में रुशिकुल्या नदी का पानी फैलने से कई इलाकों में खेतों, सड़कों, घरों और सरकारी कार्यालयों में रेत जमा हो गई है। कई मकान गिरे नहीं हैं, लेकिन उनकी संरचना कमजोर हो गई है। नदी से गाद निकालने की जरूरत भी बताई गई है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रविशंकर के नेतृत्व में आई आठ सदस्यीय टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम में कृषि, वित्त, जल शक्ति, बिजली, सड़क परिवहन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक प्रतिनिधि शामिल है। टीम सात से आठ दिनों में नुकसान का पूरा आकलन करेगी और 8 से 10 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी।